CBSE 2026-27 | स्पर्श भाग 2

Updated NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Ch 9: डायरी का एक पन्ना

📚 Class 10 CBSE 🇮🇳 Hindi Course B – Sparsh ⚡ 4–6 Marks 🔵 Medium

Welcome, students! Are you ready to dive into a powerful chapter from India's history? This guide provides updated NCERT Solutions for Class 10 Hindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2) Chapter 9, 'डायरी का एक पन्ना'. We've included detailed answers, important board exam questions, and easy explanations to help you score full marks.

This chapter, 'डायरी का एक पन्ना' (A Page from a Diary), is a real-life account of India's fight for freedom. It’s crucial for your CBSE board exams as it often features in question papers. Understanding this chapter helps you connect with our history and develop strong answer-writing skills.

📋Chapter at a Glance

📚

Chapter 9: डायरी का एक पन्ना – Quick Reference

Chapter Nameडायरी का एक पन्ना (Diary ka Ek Panna)
Authorसीताराम सेकसरिया (Sitaram Seksaria)
SubjectHindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2)
Board / ClassCBSE Class 10
Target Year2026-27
Key Topics26 जनवरी 1931 का दिन, कलकत्ता में स्वतंत्रता दिवस, लोगों का उत्साह, पुलिस का दमन
Difficulty LevelMedium
Exam Weightage4–6 Marks

🎯Learning Objectives

1

Understand the historical significance of 26th January before India's independence.

2

Analyze Sitaram Seksaria's diary entry as a historical document.

3

Describe the patriotic zeal of Indians, including women, during the freedom struggle.

4

Explain the events that took place in Calcutta (now Kolkata) on January 26, 1931.

5

Answer all Important Questions from this chapter for your Board Exam 2026-27.

💡Key Concepts, Dates, and Terms

26 जनवरी 1930
The day the Indian National Congress declared 'Purna Swaraj' (Complete Independence) and urged Indians to celebrate it as Independence Day.
26 जनवरी 1931
The date of this diary entry, marking the second 'Independence Day' celebration, which is the main focus of the chapter.
मुख्य घटना
कलकत्ता (Kolkata)
The city where the events described in the diary took place.
सीताराम सेकसरिया
The author of the diary, a freedom fighter and social worker.
लेखक
मोनुमेंट (Monument)
The central location (now Shaheed Minar) where the flag hoisting and meeting were planned.
जुलूस (Juloos)
A procession or rally taken out by freedom fighters.
💡
British Authority vs. Indian Will
1. पुलिस कमिश्नर का नोटिस (Police Commissioner's Notice) — An official order declaring any meeting or procession illegal. Represented British oppression.
2. कौंसिल का नोटिस (Council's Notice) — A notice by the 'सर्व भारतीय प्रतिनिधि सभा' challenging the British by calling people for the gathering. Represented Indian defiance.

Extra MCQs – Practice & Self-Test

💡
How to Use
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Difficulty: Easy
Q1. 'डायरी का एक पन्ना' पाठ किस ऐतिहासिक घटना पर आधारित है?
✅ Correct: (ग) कलकत्ता में दूसरे स्वतंत्रता दिवस का आयोजन
Difficulty: Easy
Q2. मोनुमेंट पर झंडा फहराने का समय क्या निश्चित किया गया था?
✅ Correct: (ख) शाम 4 बजकर 24 मिनट पर
Difficulty: Easy
Q3. स्त्रियों के जुलूस का नेतृत्व कौन कर रही थीं?
✅ Correct: (ग) जानकीदेवी और मदालसा बजाज (पाठ के सन्दर्भ में, ये प्रमुख नाम थे)
Difficulty: Easy
Q4. पुलिस ने सुभाष बाबू पर कहाँ लाठियाँ बरसाईं?
✅ Correct: (ग) चौरंगी पर
Difficulty: Easy
Q5. लेखक के अनुसार इस दिन के प्रदर्शन में लगभग कितनी स्त्रियाँ पकड़ी गईं?
✅ Correct: (ग) 105

📝Full NCERT Solutions – All Exercise Questions

📌 (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (एक-दो पंक्तियों में) दीजिए
✅ Model Answer

कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि एक साल पहले 26 जनवरी 1930 को पूरे भारत में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। इस साल वे इसकी वर्षगाँठ मना रहे थे और देश का दूसरा स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहे थे।

✅ Model Answer

सुभाष बाबू के जुलूस का पूरा भार और प्रबंधन की जिम्मेदारी पूर्णोदास पर थी।

✅ Model Answer

विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने जैसे ही तारा सुंदरी पार्क में झंडा गाड़ा, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और उनके साथ के अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया।

✅ Model Answer

सुभाष बाबू को चौरंगी पर पकड़ लिया गया और पुलिस ने उन पर लाठियाँ बरसाईं।

📌 (ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए
✅ Model Answer

26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए कलकत्ता में व्यापक तैयारियाँ की गईं। लोगों ने अपने घरों और दफ्तरों पर तिरंगा फहराया। शहर के लगभग सभी मकानों पर राष्ट्रीय झंडा लगा था और कई मकानों को तो ऐसे सजाया गया था मानो स्वतंत्रता ही मिल गई हो।

✅ Model Answer

आज का दिन निराला था क्योंकि पुलिस के कड़े पहरे और कमिश्नर के नोटिस के बावजूद, लोगों ने बड़ी संख्या में जुलूस और सभाओं में भाग लिया। प्रचार में ₹2000 खर्च किए गए थे और कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को प्रोत्साहित कर रहे थे। यह उत्साह और निडरता ही इस दिन को निराला बना रही थी।

✅ Model Answer

पुलिस कमिश्नर का नोटिस सभाओं और जुलूसों को गैरकानूनी घोषित करता था और लोगों को इसमें भाग लेने से रोकता था। इसके विपरीत, कौंसिल का नोटिस लोगों को ठीक 4:24 पर मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराने और प्रतिज्ञा पढ़ने के लिए आमंत्रित करता था, जो सीधे तौर पर ब्रिटिश शासन को एक खुली चुनौती थी।

✅ Model Answer

धर्मतल्ले के मोड़ पर पुलिस ने जुलूस को रोकने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। इस लाठीचार्ज के कारण भीड़ तितर-बितर हो गई और कई लोग घायल हो गए। सुभाष बाबू को भी यहीं पर पकड़ लिया गया, जिससे जुलूस टूट गया।

✅ Model Answer

डॉ. दासगुप्ता जुलूस में घायल हुए लोगों की देखभाल और उनकी तस्वीरें खींच रहे थे। उनकी भूमिका घायलों को प्राथमिक चिकित्सा देने और ब्रिटिश पुलिस की क्रूरता के सबूत इकट्ठा करने की थी। बाद में उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।

📌 (ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए
✅ Model Answer

सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज ने अभूतपूर्व भूमिका निभाई। महिलाएँ बड़ी संख्या में जुलूस में शामिल हुईं। जानकीदेवी और मदालसा बजाज जैसी प्रमुख महिलाएँ भी मौजूद थीं। मोनुमेंट के पास से ही स्त्रियों ने एक अलग जुलूस निकाला और अपनी गिरफ्तारी दी। उन्होंने सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराने का प्रयास भी किया। उनकी निडरता और सक्रिय भागीदारी ने आंदोलन को और भी सशक्त बना दिया।

✅ Model Answer

जब जुलूस लालबाजार आया तो लोगों की दशा बहुत खराब हो गई। पुलिस ने उन्हें बेरहमी से पीटा। बहुत से लोग घायल हुए, कई के सिर फट गए। स्त्रियों के दल को गिरफ्तार कर लिया गया। लेखक के अनुसार, लगभग 105 महिलाएँ गिरफ्तार हुईं और कई लोगों को लॉकअप में बंद कर दिया गया। यह सब देखकर ऐसा लग रहा था मानो अंग्रेजी शासन ने अपनी पूरी ताकत प्रदर्शनकारियों को कुचलने में लगा दी हो।

✅ Model Answer

यहाँ ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए उस कानून को भंग करने की बात हो रही है जिसके तहत किसी भी प्रकार की सभा या जुलूस पर पाबंदी थी। यह कानून भारतीयों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करता था।

पाठ के संदर्भ में, इस कानून को भंग करना पूरी तरह से उचित था। यह 'ओपन लड़ाई' इसलिए थी क्योंकि भारतीय निडर होकर अपनी आज़ादी का हक़ माँग रहे थे। गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने और अपने देश को स्वतंत्र कराने के लिए ऐसे अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण विरोध करना देशभक्तों का कर्तव्य था।

📌 (घ) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए
✅ Model Answer

आशय: इस पंक्ति का आशय है कि 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में जो हुआ, वह अभूतपूर्व था। पहले यह माना जाता था कि बंगाल या कलकत्ता में स्वतंत्रता आंदोलन को लेकर उतना जोश और काम नहीं हो रहा है। लेकिन इस दिन, पुलिस के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, जिस तरह हज़ारों लोगों ने, विशेषकर महिलाओं ने, निडर होकर प्रदर्शन किया, उसने इस कलंक को धो दिया। इस दिन ने साबित कर दिया कि कलकत्ता भी स्वतंत्रता संग्राम में किसी से पीछे नहीं है।

✅ Model Answer

आशय: इस पंक्ति का आशय है कि कौंसिल द्वारा पुलिस कमिश्नर के नोटिस के जवाब में सभा करने का नोटिस निकालना एक सीधी और खुली चुनौती थी। पहले के प्रदर्शनों में शायद इतनी स्पष्ट और सीधी टक्कर ब्रिटिश शासन से नहीं ली गई थी। कौंसिल ने समय और स्थान बताकर सभा की घोषणा की, जो यह दर्शाता था कि भारतीय अब डरने वाले नहीं हैं और वे अपने अधिकारों के लिए खुलकर लड़ेंगे, भले ही परिणाम कुछ भी हो।

🚀Extra Important Questions (Board Style 2026-27)

📌 लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
✅ Model Answer

बड़ाबाजार के मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहराना ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक मूक लेकिन शक्तिशाली विरोध था। यह दर्शाता था कि कलकत्ता के आम नागरिक और व्यापारी भी दिल से स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करते हैं और वे अपनी राष्ट्रीय पहचान को गर्व से प्रदर्शित करने से नहीं डरते।

✅ Model Answer

पुलिस की बर्बरता के बावजूद लोग मैदान में डटे रहे क्योंकि उनके दिलों में देशभक्ति की ज्वाला जल रही थी। वे अपने देश को आज़ाद कराने के लिए किसी भी तरह का बलिदान देने को तैयार थे। सुभाष बाबू जैसे नेताओं की उपस्थिति ने उनके जोश को और भी बढ़ा दिया था।

✅ Model Answer
  1. इतने कड़े सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद अभूतपूर्व संख्या में लोगों ने प्रदर्शन में भाग लिया।
  2. महिलाओं ने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में और इतने जोश के साथ जुलूसों में भाग लेकर अपनी गिरफ्तारी दी थी।
✅ Model Answer

इस कथन से लेखक का तात्पर्य है कि यह सभा ब्रिटिश सरकार के लिए एक खुली चुनौती थी। क्रांतिकारियों ने छिपकर नहीं, बल्कि पहले से घोषणा करके, समय और स्थान बताकर सभा का आयोजन किया था। यह सीधे-सीधे ब्रिटिश सत्ता को यह संदेश देना था कि भारतीय अब डरने वाले नहीं हैं।

✅ Model Answer

घायल लोगों की तस्वीरें ब्रिटिश पुलिस की क्रूरता और अत्याचार को दुनिया के सामने लाने के लिए एक सबूत के तौर पर खींची जा रही थीं। इससे यह साबित किया जा सकता था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर किस तरह का अमानवीय व्यवहार किया गया।

📌 दीर्घ उत्तरीय/मूल्य-आधारित प्रश्न (Long/Value-based Questions)
✅ Model Answer

'डायरी का एक पन्ना' पाठ हमें सिखाता है कि सच्ची देशप्रेम की भावना किसी भी डर या दमन से बड़ी होती है। कलकत्ता के निवासियों ने धर्म, जाति और लिंग के भेद को भुलाकर एकजुटता का परिचय दिया। पुरुषों, महिलाओं, छात्रों और आम नागरिकों, सभी ने मिलकर आजादी के लिए संघर्ष किया। यह घटना हमें प्रेरणा देती है कि राष्ट्र के लिए एकजुट होकर बड़े से बड़े संकट का सामना किया जा सकता है और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर देशहित में बलिदान देना ही सर्वोच्च कर्तव्य है।

✅ Model Answer

पाठ के आधार पर यह स्पष्ट है कि स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। उस ज़माने में जब महिलाएँ आमतौर पर घर की चारदीवारी तक सीमित रहती थीं, उन्होंने जुलूसों में भाग लिया, झंडा फहराने का प्रयास किया और निडर होकर गिरफ्तारियाँ दीं। उनकी भागीदारी ने आंदोलन को एक नई शक्ति और व्यापकता प्रदान की। इसने समाज के हर वर्ग को यह संदेश दिया कि आज़ादी की लड़ाई सबकी है। उनकी हिम्मत देखकर पुरुषों का भी मनोबल बढ़ा। अतः उनकी भूमिका केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि निर्णायक थी।

✅ Model Answer

यदि मैं कोलकाता में उस ऐतिहासिक मोनुमेंट (शहीद मीनार) के पास खड़ा होऊँ, तो मेरा मन गर्व और कृतज्ञता के भाव से भर जाएगा। मैं उन हजारों अनाम नायकों और नायिकाओं को याद करूँगा जिन्होंने इसी धरती पर लाठियाँ खाईं, लहू बहाया और अपनी आज़ादी के सपने के लिए बलिदान दिया। सीताराम सेकसरिया की डायरी के शब्द मेरी आँखों के सामने जीवंत हो उठेंगे। मुझे एहसास होगा कि जिस आज़ादी की हवा में हम साँस ले रहे हैं, वह कितने संघर्षों और बलिदानों का परिणाम है। यह स्थान मेरे लिए केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक प्रेरणा-तीर्थ बन जाएगा।

✅ Model Answer

सीताराम सेकसरिया की डायरी लेखन शैली की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  1. तथ्यात्मक और सजीव वर्णन: वे घटनाओं का ज्यों का त्यों, बिना किसी लाग-लपेट के वर्णन करते हैं। समय, स्थान, लोगों के नाम और आँकड़ों (जैसे ₹2000 का खर्च, 105 स्त्रियाँ गिरफ्तार) का सटीक उल्लेख उनके लेखन को एक विश्वसनीय ऐतिहासिक दस्तावेज़ बनाता है।
  2. भावनात्मक गहराई: तथ्यात्मक होने के साथ-साथ उनका लेखन भावनाओं से भी ओत-प्रोत है। वे लोगों के जोश, उत्साह, पीड़ा और गर्व को अपने शब्दों में सफलतापूर्वक व्यक्त करते हैं, जिससे पाठक सीधे उस घटना से जुड़ जाता है।
✅ Model Answer

इस 'कलंक' से लेखक का आशय उस आम धारणा से था कि बंगाल और विशेषकर कलकत्ता के लोग स्वतंत्रता संग्राम में उतनी सक्रियता और जोश नहीं दिखा रहे हैं, जितनी देश के अन्य भागों में दिख रही है। यह कलंक 26 जनवरी 1931 के सफल और विशाल प्रदर्शन से धुला। इस दिन, पुलिस की तमाम पाबंदियों और चेतावनियों को धता बताते हुए, हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने जुलूस निकाले, सभा की और लाठीचार्ज का सामना किया। महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी ने इस प्रदर्शन को और भी शक्तिशाली बना दिया। इस व्यापक जन-भागीदारी ने साबित कर दिया कि बंगाल का राष्ट्रप्रेम किसी से कम नहीं है।

Common Mistakes Students Make

01
📅
Confusing the Dates
Students often mix up 26 Jan 1930 (first Independence Day declaration) and 26 Jan 1931 (the day of the diary entry). Remember, the chapter is about the *second* celebration.
02
🙄
Vague Answers
Writing generic answers like "people were patriotic" isn't enough. You must include specific details from the chapter, like the roles of Subhash Babu, women, students, and the police's reaction.
03
👤
Ignoring the Author's Perspective
Remember this is a diary entry. Your answers should reflect the personal, first-hand account of Sitaram Seksaria. Use phrases like "According to the author..." (लेखक के अनुसार...).
04
✏️
Spelling Errors
Pay attention to Hindi spellings of names and places like 'सीताराम सेकसरिया', 'मोनुमेंट', 'चौरंगी'.

📚Exam Preparation Tips for 2026-27

01
📈
Create a Timeline
Make a flowchart or timeline of the events of 26 Jan 1931 as they happened, from morning preparations to evening arrests.
02
📋
Character Notes
Write short notes on the roles of Subhash Chandra Bose, Sitaram Seksaria, women activists, and the police.
03
🔍
Focus on the 'Why'
Don't just learn *what* happened, but *why* it happened. Why was the day 'unprecedented' (अपूर्व)? Why was it an 'open battle' (ओपन लड़ाई)?
04
📝
Practice Writing
Write down the long-answer questions in your own words. This improves both speed and quality for the board exam.

🅾Frequently Asked Questions (FAQs)

What is the summary of Class 10 Hindi Chapter 'डायरी का एक पन्ना'?
This chapter is a diary entry by Sitaram Seksaria describing the passionate and defiant celebration of 'Independence Day' on January 26, 1931, in Calcutta, despite heavy police restrictions and brutality by the British authorities.
Why was 26 January 1931 celebrated as Independence Day in Kolkata?
It was celebrated to mark the first anniversary of 'Purna Swaraj Day'. On 26 January 1930, the Indian National Congress had declared complete independence as its goal and called on Indians to celebrate this day as Independence Day annually until freedom was achieved.
What was the role of women in the events of 'डायरी का एक पन्ना'?
Women played a very active and brave role. Large groups of women formed their own processions, tried to hoist the flag at the Monument, faced police, and courted arrest. Their massive participation was a key highlight of the day.
Who was Sitaram Seksaria?
Sitaram Seksaria was a freedom fighter, social reformer, and businessman based in Calcutta. He actively participated in the Indian independence movement and documented his experiences in his diary, which serves as a valuable historical record.
What is the main message of Chapter 9, 'डायरी का एक पन्ना'?
The main message is that freedom is not easily won. It requires immense courage, unity, sacrifice, and the unwavering spirit of a nation's people. It highlights the power of non-violent, civil disobedience in the face of oppression.

Master डायरी का एक पन्ना 🇮🇳

'डायरी का एक पन्ना' is more than just a chapter; it's a window into the soul of our freedom struggle. By understanding these NCERT Solutions for Class 10 Hindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2) Chapter 9, you are not just preparing for your exams but also paying tribute to our heroes. Revise these questions, practice writing the answers, and you'll be well-prepared to ace your Hindi exam. Keep up the great work!

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