Updated NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 8 बड़े भाई साहब
Welcome, students! This guide provides complete NCERT solutions and important questions for CBSE Class 10 Hindi Sparsh Chapter 8, "बड़े भाई साहब." This heartwarming story by Munshi Premchand is crucial for understanding character analysis and is a favorite for board exam questions. Let's master it together!
Chapter at a Glance
Chapter 8: बड़े भाई साहब – Quick Reference
| Chapter Name | बड़े भाई साहब (Bade Bhai Sahab) |
| Author | मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) |
| Subject | Hindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2) |
| Class / Board | Class 10 / CBSE |
| Target Year | 2026-27 |
| Key Topics | Character analysis, satire on rote learning, importance of experience vs. bookish knowledge. |
| Difficulty Level | Easy to Medium |
| Exam Weightage | 3–5 Marks |
Learning Objectives
Understand the plot and central theme of the story "बड़े भाई साहब."
Analyze the characters of the elder and younger brothers.
Explain the difference between bookish knowledge (किताबी ज्ञान) and practical experience (अनुभव).
Answer all NCERT exercise questions confidently.
Tackle important board-style questions, including MCQs and long-answer questions.
Appreciate the subtle humor and message in Munshi Premchand's writing.
Key Concepts & Characters
Full NCERT Solutions (Updated for 2026-27)
कथा नायक (छोटे भाई) की रुचि खेल-कूद में थी। उसे मैदान की सुखद हरियाली, हवा के हल्के-हल्के झोंके, फुटबॉल की उछल-कूद, वॉलीबॉल की तेज़ी और कनकौए (पतंग) उड़ाने और लूटने में मज़ा आता था। उसे पढ़ाई करना बिल्कुल पसंद नहीं था।
बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय यही सवाल पूछते थे - "कहाँ थे?" इसके बाद वह हमेशा उपदेश देना शुरू कर देते थे कि उसे हर समय पढ़ाई करनी चाहिए और खेलना-कूदना बंद कर देना चाहिए।
दूसरी बार भी कक्षा में अव्वल आने पर छोटे भाई के मन में अभिमान (घमंड) आ गया। वह सोचने लगा कि अब उसे पढ़ने की कोई खास ज़रूरत नहीं है। उसने पतंगबाजी और खेल-कूद में अपना ज़्यादातर समय बिताना शुरू कर दिया और बड़े भाई साहब की डाँट का भी उस पर ज़्यादा असर नहीं होता था।
बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में पाँच साल बड़े थे। जब छोटा भाई नौ साल का था और पाँचवीं कक्षा में पढ़ता था, तब बड़े भाई साहब चौदह साल के थे और नौवीं कक्षा में पढ़ते थे।
बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए अपनी कॉपी और किताब के हाशिये (margins) पर चिड़ियों, कुत्तों, और बिल्लियों के चित्र बनाते थे। कभी-कभी वह एक ही शब्द या वाक्य को कई बार लिखते या फिर ऐसी शब्द-रचना करते जिसका कोई अर्थ नहीं होता था।
छोटे भाई ने टाइम-टेबल बनाते समय सोचा कि वह मन लगाकर पढ़ाई करेगा और बड़े भाई को शिकायत का कोई मौका नहीं देगा। उसने सुबह छह बजे से लेकर रात ग्यारह बजे तक का एक कठोर टाइम-टेबल बनाया, जिसमें खेल-कूद के लिए कोई जगह नहीं थी।
लेकिन, वह इसका पालन नहीं कर पाया क्योंकि टाइम-टेबल बनाना एक बात है और उस पर अमल करना दूसरी। मैदान की हरियाली, फुटबॉल और पतंगबाज़ी का आकर्षण उसे पढ़ाई से दूर खींच लेता था। उसका मन खेलने के लिए व्याकुल हो जाता था, इसलिए वह पहले ही दिन से टाइम-टेबल की अवहेलना करने लगा।
एक दिन गुल्ली-डंडा खेलने के बाद जब छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा, तो वह बहुत गुस्से में थे। उन्होंने छोटे भाई को खूब डाँटा। उन्होंने कहा कि उसे कक्षा में अव्वल आने का घमंड हो गया है, जबकि घमंड तो रावण जैसे महान राजा का भी नहीं टिक सका। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि सिर्फ़ परीक्षा पास कर लेना ही सब कुछ नहीं होता। असली ज्ञान अनुभव से आता है और उसे अपनी मेहनत की कमाई को इस तरह खेल-कूद में बर्बाद नहीं करना चाहिए।
बड़े भाई साहब बड़े होने के नाते अपने छोटे भाई के लिए एक आदर्श बनना चाहते थे। वह जानते थे कि यदि वह खुद खेलेंगे-कूदेंगे या अनुशासनहीनता करेंगे, तो उनका छोटा भाई भी वही सीखेगा। अपने छोटे भाई को सही रास्ते पर रखने और उसके भविष्य को उज्ज्वल बनाने की ज़िम्मेदारी के कारण उन्हें अपने मन की सभी इच्छाएँ, जैसे खेलना, पतंग उड़ाना और मेले में जाना, दबानी पड़ती थीं।
बड़े भाई साहब छोटे भाई को हर समय पढ़ाई करने, खेल-कूद से दूर रहने और मेहनत करने की सलाह देते थे। उनका मानना था कि शिक्षा का आधार मज़बूत होना चाहिए, इसलिए एक-एक चीज़ को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है। वह अंग्रेज़ी, इतिहास और ज्यामिति जैसे विषयों की कठिनाइयों का उदाहरण देकर छोटे भाई को डराते थे ताकि वह खेल में अपना समय बर्बाद न करे और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करे। वह ऐसा इसलिए करते थे क्योंकि वह अपने छोटे भाई से बहुत स्नेह करते थे और चाहते थे कि उसका भविष्य अच्छा हो।
बड़े भाई साहब के लंबे और उपदेश भरे भाषणों को सुनकर छोटा भाई निराश हो जाता था। उसे अपनी नादानी और छोटेपन का एहसास होता था और वह रोने लगता था। वह कुछ देर के लिए सोचता कि पढ़ाई करना कितना मुश्किल है और उसे घर लौट जाना चाहिए। लेकिन थोड़ी ही देर बाद, निराशा के बादल छँट जाते और वह फिर से खेल-कूद में मग्न होने का निश्चय कर लेता। इस प्रकार, उनके भाषण का असर क्षणिक (temporary) होता था।
आशय: इस पंक्ति का आशय यह है कि केवल परीक्षा में अंक लाकर पास हो जाना ही सच्ची शिक्षा नहीं है। सच्ची शिक्षा वह है जिससे हमारी समझ और बुद्धि का विकास हो। बड़े भाई साहब कहना चाहते हैं कि रटकर परीक्षा पास करने से कोई व्यक्ति ज्ञानी नहीं बन जाता। असली ज्ञान जीवन के अनुभव और गहरी समझ से आता है।
आशय: इस पंक्ति का आशय यह है कि छोटे भाई के लिए खेल-कूद का आकर्षण बहुत प्रबल था। जिस प्रकार मृत्यु के सामने भी मनुष्य सांसारिक मोह-माया नहीं छोड़ पाता, ठीक उसी प्रकार, छोटा भाई भी बड़े भाई साहब की डाँट-फटकार के बावजूद खेल-कूद को नहीं छोड़ पाता था। डाँट खाने के बाद वह थोड़ी देर के लिए दुखी होता, लेकिन फिर से खेलने का मोह उसे मैदान की ओर खींच लेता था।
आशय: इस पंक्ति के माध्यम से बड़े भाई साहब शिक्षा के महत्व को समझा रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरह एक मज़बूत इमारत के लिए उसकी नींव (बुनियाद) का पक्का होना ज़रूरी है, उसी तरह जीवन में सफलता पाने के लिए शुरुआती शिक्षा का आधार बहुत मज़बूत होना चाहिए। अगर ज्ञान की नींव ही कमज़ोर होगी, तो व्यक्ति जीवन में आगे नहीं बढ़ सकता।
आशय: इस पंक्ति में लेखक ने एक कटी हुई पतंग का सुंदर वर्णन किया है। लेखक की आँखें आसमान में उस कटकर धीरे-धीरे नीचे आती हुई पतंग पर टिकी थीं। वह पतंग लेखक को एक ऐसे यात्री की तरह लग रही थी जो धीरे-धीरे ज़मीन की ओर आ रहा हो। लेखक ने उसकी तुलना एक ऐसी आत्मा से की है जो स्वर्ग से आकर नए शरीर में प्रवेश करने जा रही हो। यह दिखाता है कि लेखक का मन खेल में कितना रमा हुआ था।
Extra Board Exam Questions (2026-27)
Explanation: बड़े भाई साहब हमेशा किताबों में खोए रहते थे और अपने छोटे भाई को लेकर बहुत गंभीर थे।
Explanation: कहानी में यह विडंबना है कि कम पढ़ने के बावजूद छोटा भाई हमेशा अपनी कक्षा में प्रथम आता था।
Explanation: खेल-कूद का मोह इतना प्रबल था कि वह कठोर टाइम-टेबल का पालन नहीं कर सका।
बड़े भाई साहब के फेल होने का मुख्य कारण शिक्षा प्रणाली का दोष था। वह हर चीज़ को गहराई से और रटकर पढ़ते थे, जिसमें बहुत समय लगता था। वह ज्ञान की बुनियाद को मज़बूत करने में इतना व्यस्त रहते थे कि परीक्षा पास करने की तकनीक को नहीं समझ पाए।
कहानी के अंत में जब बड़े भाई साहब ने पतंग को पकड़कर हॉस्टल की ओर दौड़ लगाई, तो छोटे भाई को एहसास हुआ कि उनके बड़े भाई के अंदर भी एक बच्चा छिपा है। उसे यह भी समझ आया कि भाई साहब ने केवल उसकी भलाई के लिए अपनी इच्छाओं को दबाया था। इसी अनुभव से उसे उनकी महानता का एहसास हुआ।
'बड़े भाई साहब' कहानी में बड़े भाई एक अत्यंत ज़िम्मेदार, अध्ययनशील और गंभीर चरित्र हैं। वह अपने छोटे भाई के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करना चाहते हैं।
- अध्ययनशील: वह हर समय किताबों में डूबे रहते हैं और ज्ञान की बुनियाद को मज़बूत करने में विश्वास रखते हैं।
- ज़िम्मेदार: वह अपने छोटे भाई की पूरी ज़िम्मेदारी उठाते हैं और उसकी भलाई के लिए अपनी इच्छाओं का दमन करते हैं।
- उपदेशक: वह छोटे भाई को सही रास्ते पर लाने के लिए लंबे-लंबे भाषण देते हैं और विभिन्न विषयों की कठिनाइयों का वर्णन करते हैं।
- अनुभवी: अंत में, वह यह सिद्ध करते हैं कि किताबी ज्ञान से बढ़कर जीवन का अनुभव होता है।
भले ही वह परीक्षा में असफल होते हैं, लेकिन एक बड़े भाई के रूप में वह पूरी तरह सफल हैं।
यह कथन पूरी तरह सहमत है। 'बड़े भाई साहब' कहानी उस समय की शिक्षा प्रणाली पर एक तीखा व्यंग्य करती है जो रटने और किताबी कीड़ा बनने पर ज़ोर देती थी। बड़े भाई साहब इसी प्रणाली के शिकार हैं। वह दिन-रात मेहनत करते हैं, एक-एक अक्षर रटते हैं, फिर भी फेल हो जाते हैं। वहीं, छोटा भाई जो खेल-कूद में मस्त रहता है, वह आसानी से पास हो जाता है।
यह कहानी दिखाती है कि हमारी शिक्षा प्रणाली बुद्धि के विकास या व्यावहारिक ज्ञान के बजाय केवल परीक्षा पास करने पर केंद्रित थी। प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सच्ची शिक्षा वह है जो बच्चे की स्वाभाविक रुचियों को दबाए नहीं, बल्कि उसके सर्वांगीण विकास में सहायक हो।
Common Mistakes to Avoid
Exam Preparation Tips for 2026-27
Frequently Asked Questions (FAQs)
Master बड़े भाई साहब 📚
"बड़े भाई साहब" is more than just a story; it's a life lesson packed with humor and emotion. By practicing these questions and understanding the main themes, you will surely excel in your board exams! All the best!
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