CBSE 2026-27 | स्पर्श भाग 2

आत्मत्राण Class 10: Updated NCERT Solutions & Important Questions

📚 Class 10 CBSE 📝 Hindi Course B – Sparsh ⭐ 4–6 Marks 🧠 Moderate

Welcome, students! यह गाइड आपको Class 10 Hindi Sparsh Chapter 7, आत्मत्राण, के लिए संपूर्ण NCERT समाधान और महत्वपूर्ण प्रश्न प्रदान करती है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर की यह सुंदर कविता हमें सच्चे साहस और आत्मनिर्भरता के बारे में सिखाती है। CBSE board exams 2026-27 में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए इस अध्याय में महारत हासिल करना महत्वपूर्ण है।

📋Chapter at a Glance

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अध्याय 7: आत्मत्राण – Quick Reference

अध्याय का नामआत्मत्राण (Atmatran)
कविरवीन्द्रनाथ ठाकुर (Rabindranath Tagore)
विषयहिन्दी कोर्स B – स्पर्श (भाग 2)
कक्षा10
बोर्डCBSE
महत्वपूर्ण विषयकवि की अनूठी प्रार्थना, साहस का सही अर्थ, आत्मनिर्भरता, ईश्वर और स्वयं में अटूट विश्वास।
कठिनाई स्तरमध्यम (भाषा सरल है, लेकिन दार्शनिक गहराई के लिए सावधानीपूर्वक समझने की आवश्यकता है।)
परीक्षा में महत्व4–6 Marks

💡Poem's Core Ideas

💪
Prayer For
शक्ति
🚫
Not For
मुक्ति
🧘
Central Theme
आत्मबल
✏️
Poet
R. Tagore

🎯Learning Objectives

1

'आत्मत्राण' कविता के गहरे अर्थ और संदेश को समझ सकेंगे।

2

प्रार्थना और दुख पर कवि के अनूठे दृष्टिकोण का विश्लेषण कर सकेंगे।

3

मुक्ति माँगने और शक्ति माँगने के बीच के अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।

4

कक्षा 10 हिंदी कोर्स बी - स्पर्श (भाग 2) अध्याय 7 के सभी NCERT समाधानों का आत्मविश्वास से उत्तर दे सकेंगे।

5

बोर्ड परीक्षा के प्रश्नों के लिए अच्छी तरह से संरचित उत्तर लिख सकेंगे।

6

जीवन में आत्म-विश्वास और आंतरिक शक्ति के मूल्य की सराहना कर सकेंगे।

💡Key Concepts & Themes

आत्मत्राण (Atmatran)
शीर्षक का अर्थ है 'स्व-उद्धार' या 'स्व-मुक्ति'। यह अपनी आंतरिक शक्ति के माध्यम से स्वयं को बचाने को संदर्भित करता है।
शक्ति के लिए प्रार्थना, बचाव के लिए नहीं
कवि ईश्वर से अपने दुखों (`विपदाओं से मुझे बचाओ`) को दूर करने के लिए नहीं कहता। इसके बजाय, वह उनका सामना करने का साहस (`विपदाओं से भय न पाऊँ`) माँगता है।
अटूट विश्वास
दुख और धोखे के अपने सबसे अंधकारमय क्षणों में भी, कवि चाहता है कि ईश्वर में उसका विश्वास (`तुम पर करूँ नहीं कुछ संशय`) अडिग रहे।
आत्म-निर्भरता (आत्मबल)
केंद्रीय विषय आत्मनिर्भरता है। कवि अपनी चुनौतियों पर अपनी ताकत (`मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना`) का उपयोग करके जीतना चाहता है।
Self-Reliance

📝Updated NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 7

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Solutions for 2026-27 Session
Here are the complete and detailed answers to all the exercise questions from your NCERT Sparsh textbook.
📌 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
✅ Model Answer

कवि करुणामय ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है।

कवि की प्रार्थना अन्य भक्तों से पूरी तरह भिन्न है। वह ईश्वर से यह प्रार्थना नहीं कर रहा कि वे उसे आने वाली विपत्तियों और दुखों से बचाएँ, बल्कि वह ईश्वर से उन मुश्किलों का सामना करने के लिए आत्मबल और साहस माँग रहा है। वह चाहता है कि:

  • विपत्तियों से वह डरे नहीं।
  • दुखों में भी ईश्वर पर उसकी आस्था बनी रहे।
  • हानि होने पर भी वह हार न माने।
  • उसका बल-पौरुष बना रहे, चाहे कोई सहायक न मिले।
  • सुख के दिनों में भी वह ईश्वर को हमेशा याद रखे।
✅ Model Answer

इस पंक्ति के द्वारा कवि यह स्पष्ट करना चाहता है कि उसकी प्रार्थना का स्वरूप पारंपरिक नहीं है। वह ईश्वर से यह नहीं माँगता कि उसके जीवन में कोई दुख, कष्ट या विपत्ति न आए। वह जानता है कि जीवन में चुनौतियाँ और कठिनाइयाँ स्वाभाविक हैं।

इसके बजाय, कवि यह कहना चाहता है कि वह इन विपदाओं से भागना नहीं चाहता। वह तो बस इतना चाहता है कि ईश्वर उसे इतनी शक्ति और निर्भयता प्रदान करें कि वह हर विपत्ति का डटकर सामना कर सके और उससे भयभीत न हो। यह पंक्ति कवि के आत्मविश्वास और साहस को दर्शाती है।

✅ Model Answer

कवि जानता है कि जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब कोई हमारी सहायता करने के लिए उपस्थित नहीं होता। ऐसी स्थिति में व्यक्ति अक्सर निराश और हताश हो जाता है।

इसलिए, कवि सहायक के न मिलने पर ईश्वर से यह प्रार्थना करता है कि उसका बल और पौरुष (हिम्मत) कम न हो। वह अकेले ही अपनी चुनौतियों से लड़ने की क्षमता रखना चाहता है। वह बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने आंतरिक बल (आत्मबल) पर विश्वास रखना चाहता है।

✅ Model Answer

कविता के अंत में कवि ईश्वर से दो अनुनय (विनती) करता है:

  1. पहली विनती: चाहे सारा संसार उसे धोखा दे और उसके दुख बहुत बढ़ जाएँ, तब भी उसके मन में ईश्वर के प्रति संदेह या अविश्वास पैदा न हो। वह हर परिस्थिति में ईश्वर पर अपनी आस्था बनाए रखना चाहता है।
  2. दूसरी विनती: जब उसके जीवन में सुख के दिन हों, तब भी वह ईश्वर को एक क्षण के लिए भी न भूले। वह सिर झुकाकर ईश्वर को हमेशा याद रखना चाहता है।
✅ Model Answer

'आत्मत्राण' शीर्षक इस कविता के लिए पूर्णतः सार्थक है। 'आत्मत्राण' का शाब्दिक अर्थ है - 'आत्मा का त्राण' अर्थात् अपना उद्धार या बचाव स्वयं करना।

पूरी कविता में, कवि ईश्वर से सीधे-सीधे दुखों को हरने या उनसे बचाने की प्रार्थना नहीं करता। इसके बजाय, वह हर परिस्थिति में अपने बचाव के लिए आवश्यक शक्ति और साहस की माँग करता है।

  • वह विपत्तियों से भयभीत न होने का वरदान माँगता है।
  • वह दुख सहने की शक्ति माँगता है।
  • वह सहायक के बिना भी न डगमगाने का बल माँगता है।

इस प्रकार, कवि दुखों से मुक्ति के लिए किसी और पर नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति और ईश्वर द्वारा दिए गए आत्मबल पर निर्भर रहना चाहता है। वह अपना उद्धार स्वयं करना चाहता है। इसलिए, 'आत्मत्राण' शीर्षक कविता के मूल भाव को सटीक रूप से व्यक्त करता है।

✅ Model Answer

(यह प्रश्न छात्रों को स्वयं करने के लिए है, लेकिन एक आदर्श उत्तर इस प्रकार हो सकता है।)

अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मैं प्रार्थना के अतिरिक्त निम्नलिखित प्रयास करता/करती हूँ:

  • कठिन परिश्रम: किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सबसे ज़रूरी है कड़ी मेहनत। मैं अपने लक्ष्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर उसे पूरा करने के लिए परिश्रम करता/करती हूँ।
  • योजना बनाना: मैं अपने काम की एक सुव्यवस्थित योजना बनाता/बनाती हूँ ताकि समय का सही उपयोग हो सके और कोई भी महत्वपूर्ण कदम न छूटे।
  • अनुशासन: मैं नियमित रूप से और अनुशासित रहकर अपने काम को करता/करती हूँ।
  • सीखना और सुधार करना: मैं अपनी गलतियों से सीखता/सीखती हूँ और निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को बढ़ाने का प्रयास करता/करती हूँ।
  • सकारात्मक सोच: मैं हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण रखता/रखती हूँ, क्योंकि यह मुझे मुश्किल समय में भी प्रेरित रखता है।

केवल प्रार्थना करने से इच्छाएँ पूरी नहीं होतीं; प्रार्थना हमें मानसिक बल देती है, लेकिन कर्म करना हमारे हाथ में है।

✅ Model Answer

हाँ, कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की यह प्रार्थना निश्चित रूप से अन्य प्रार्थना-गीतों से बिल्कुल अलग है।

अंतर इस प्रकार हैं:

  • सामान्य प्रार्थना-गीत: आमतौर पर, प्रार्थना-गीतों में भक्त ईश्वर से अपने दुखों, कष्टों और समस्याओं को दूर करने, सुख-समृद्धि और सफलता प्रदान करने की सीधी-सीधी माँग करते हैं। वे ईश्वर से बचाव और रक्षा की गुहार लगाते हैं।
  • 'आत्मत्राण' की प्रार्थना: इसके विपरीत, 'आत्मत्राण' में कवि ईश्वर से कुछ भी माँग नहीं रहा है। वह न तो दुख कम करने को कहता है, न ही विपत्तियों से बचाने को। वह तो केवल उन चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति, साहस और निर्भयता माँगता है। वह ईश्वर से केवल एक सहायक और प्रेरक शक्ति के रूप में बने रहने की कामना करता है, ताकि उसका आत्मबल कभी कम न हो।

यह प्रार्थना व्यक्ति को कर्मठ और स्वावलंबी बनने की प्रेरणा देती है, जबकि अन्य प्रार्थना-गीत अक्सर व्यक्ति को ईश्वर पर पूरी तरह निर्भर बना देते हैं।

🚀Extra Board Exam Questions (2026-27)

📌 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
Difficulty: Easy
Q1. कवि ईश्वर से कैसी शक्ति माँगता है?
✅ Correct: (ख) दुखों को सहने और उन पर विजय पाने की
Difficulty: Easy
Q2. 'नतशिर होकर सुख के दिन में' - इस पंक्ति में 'नतशिर' का क्या अर्थ है?
✅ Correct: (ख) सिर झुकाकर
Difficulty: Medium
Q3. कवि के अनुसार, दुख की रात्रि में भी वह किस पर संदेह नहीं करना चाहता?
✅ Correct: (घ) ईश्वर पर
Difficulty: Hard
Q4. 'मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना' - इस पंक्ति का आशय क्या है?
✅ Correct: (ख) कवि चाहता है कि ईश्वर उसका बोझ हल्का न भी करें, तो भी उसे दुख सहने की शक्ति दें।
📌 लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
✅ Model Answer

कवि सुख के दिनों में भी सिर झुकाकर ईश्वर का चेहरा पहचानना चाहता है, अर्थात् उन्हें विनम्रतापूर्वक याद रखना चाहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अक्सर लोग सुख में ईश्वर को भूल जाते हैं, लेकिन कवि ऐसी गलती नहीं करना चाहता और हर पल ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहना चाहता है।

✅ Model Answer

यहाँ 'अनामय' का अर्थ है 'रोग-रहित' या 'स्वस्थ'। इस पंक्ति में कवि ईश्वर से यह प्रार्थना करता है कि उसे तैरने की, अर्थात् भवसागर को पार करने की जो शक्ति मिले, वह स्वस्थ हो। इसका आशय यह है कि वह चाहता है कि उसका आत्मबल और साहस बिना किसी कमज़ोरी के दृढ़ बना रहे।

✅ Model Answer

कवि के अनुसार, जीवन में सबसे बड़ी हानि धन-दौलत या मान-सम्मान का चला जाना नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी हानि है अपने आत्मबल और पौरुष का क्षीण हो जाना। वह हर नुकसान उठाने को तैयार है, पर अपनी हिम्मत और साहस खोना नहीं चाहता।

✅ Model Answer

'आत्मत्राण' कविता हमें सिखाती है कि जीवन में हमें चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए। हमें ईश्वर या दूसरों से समस्याओं को हल करने की अपेक्षा करने के बजाय, उनका सामना करने के लिए स्वयं को मजबूत बनाना चाहिए। यह कविता हमें आत्मनिर्भरता, साहस और कर्मठता का पाठ पढ़ाती है।

📌 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
✅ Model Answer

यह कथन पूरी तरह सत्य है। 'आत्मत्राण' कविता में कवि की प्रार्थना पारंपरिक न होकर आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से परिपूर्ण है। वह ईश्वर से हर बात के लिए याचना नहीं करता, बल्कि अपनी शक्ति पर विश्वास रखता है।

  • विपत्तियों का सामना: वह विपदाओं से बचाने की नहीं, बल्कि उनसे निर्भय होकर लड़ने की शक्ति माँगता है।
  • दुख सहने की हिम्मत: वह दुख का भार कम करने की बजाय, उसे सहने की क्षमता माँगता है।
  • अकेले लड़ने का साहस: जब कोई सहायक न हो, तब भी वह अपना बल-पौरुष बनाए रखने की प्रार्थना करता है, जो उसकी आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
  • विजय का श्रेय: वह चाहता है कि जब वह मुश्किलों पर जीत हासिल करे तो उसका श्रेय उसे ही मिले, इसके लिए वह ईश्वर से केवल प्रेरणा और बल चाहता है।

ये सभी बिंदु यह सिद्ध करते हैं कि कवि की प्रार्थना उसे एक याचक नहीं, बल्कि एक कर्मठ और आत्मविश्वासी योद्धा के रूप में प्रस्तुत करती है।

✅ Model Answer
<यहाँ एक पर्वतारोही का चित्र लगाएँ जो तूफ़ान में एक ऊँची चोटी पर अकेला चढ़ रहा है।>

उपरोक्त चित्र को देखकर 'आत्मत्राण' कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ याद आती हैं:

"मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।
केवल इतना रखना अनुनय-
वहन कर सकूँ इसको निर्भय।
...
कोई कहीं सहायक न मिले,
तो अपना बल-पौरुष न हिले।"

समानता:

चित्र में पर्वतारोही और कविता में कवि, दोनों ही एक समान भाव को दर्शाते हैं।

  1. चुनौती का सामना: पर्वतारोही बर्फीले तूफ़ान और खड़ी चढ़ाई जैसी भयानक चुनौती का सामना कर रहा है, ठीक वैसे ही जैसे कवि जीवन की विपदाओं का सामना कर रहा है।
  2. अकेलापन: चित्र में पर्वतारोही अकेला है, उसका कोई सहायक नहीं है। यह कविता की उस स्थिति से मेल खाता है जहाँ कवि कहता है 'कोई कहीं सहायक न मिले'।
  3. आत्मबल: पर्वतारोही अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति के बल पर ही आगे बढ़ रहा है। यही 'आत्मबल' या 'बल-पौरुष' है जिसकी कामना कवि ईश्वर से करता है। वह भी चाहता है कि उसका हौसला न डगमगाए।

इस प्रकार, यह चित्र 'आत्मत्राण' कविता के मूल संदेश - बाहरी सहायता पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आंतरिक शक्ति से चुनौतियों पर विजय प्राप्त करना - का एक सशक्त दृश्य रूप है।

Common Mistakes Students Make

01
🔄
Misinterpreting the Prayer
The biggest mistake is thinking the poet is asking God for help. Remember: He is not asking for help to remove problems, but for strength to face them.
02
🔍
Confusing Keywords
Students often get confused between `सांत्वना` (consolation) and `शक्ति` (strength). The poet can live without consolation but not without strength.
03
💡
Ignoring the Title
Not understanding the meaning of 'आत्मत्राण' (Self-Rescue) leads to a poor understanding of the poem's core message.
04
💬
Generic Answers
Avoid writing generic answers. Always use lines and examples from the poem to support your points. This is key for scoring full marks.

📚Exam Preparation Tips for 2026-27

01
📈
Understand the Core Message
Focus on the central idea - the prayer for strength, not for rescue. All questions will revolve around this.
02
📋
Memorize Key Lines
"विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं" और "दुख-रात्रि में करे वंचना मेरी जिस दिन निखिल मही" जैसी महत्वपूर्ण पंक्तियों को याद करें।
03
✏️
Practice Writing
Write the answers to the NCERT questions and the important questions provided above. This will improve your speed and answer quality.
04
📝
Make a Vocab List
`अनामय`, `नतशिर`, `निखिल मही`, `वंचना`, `संशय` जैसे कठिन शब्दों और उनके अर्थों को नोट करें।

🅾Frequently Asked Questions (FAQs)

What is the central message of the poem 'Atmatran'?
The central message is that true prayer is not about asking for problems to be removed, but about asking for the inner strength, courage, and self-reliance to overcome them.
Who is the author of Atmatran Class 10?
The original poem was written by the Nobel laureate Rabindranath Tagore in Bengali. It has been translated into Hindi for the Sparsh textbook.
Why is the poet's prayer in 'Atmatran' considered unique?
It is unique because unlike traditional prayers that ask for rescue and happiness, the poet here embraces suffering as a part of life and only asks for the strength to endure and conquer it.
What does the title 'Atmatran' mean?
'Atmatran' (आत्मत्राण) means 'self-rescue' or 'self-deliverance'. It signifies saving oneself using one's own inner strength and courage, which is the main theme of the poem.

मास्टर करें 'आत्मत्राण' 🌍

'आत्मत्राण' आपकी हिंदी पुस्तक का केवल एक अध्याय नहीं है; यह साहस और आत्म-विश्वास में जीवन का एक सबक है। हमें उम्मीद है कि यह विस्तृत गाइड आपको अपनी CBSE 2026-27 परीक्षाओं की तैयारी में मदद करेगा।

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