Updated NCERT Solutions for Class 10 Hindi: कर चले हम फ़िदा (Chapter 6)
Welcome, future toppers! This guide breaks down "कर चले हम फ़िदा" (Kar Chale Hum Fida), a powerful patriotic poem from your Sparsh textbook. We'll explore its deep meaning, cover all NCERT questions, and practice important board-style questions to help you score full marks in your 2026-27 exams.
Chapter at a Glance
Chapter 6: कर चले हम फ़िदा – Quick Reference
| Chapter Name | Chapter 6 – कर चले हम फ़िदा (Kar Chale Hum Fida) |
| Poet | कैफ़ी आज़मी (Kaifi Azmi) |
| Subject | Hindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2) |
| Class / Board | Class 10 / CBSE |
| Target Year | 2026-27 |
| Important Topics | Poem's summary (भावार्थ), soldier's sacrifice, patriotism, symbolism (हिमालय, सीता), call to the youth. |
| Difficulty Level | Easy to Moderate |
| Exam Weightage | 3–5 Marks |
Learning Objectives
Understand the deep patriotic feelings of a soldier.
Explain the meaning (भावार्थ) of each stanza of the poem.
Identify the symbols used by the poet, Kaifi Azmi.
Analyze the soldier's last message to his countrymen.
Write effective answers for your CBSE board exams.
Key Concepts & Important Terms
Full NCERT Solutions – स्पर्श भाग 2
हाँ, इस गीत की एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। यह गीत 1962 के भारत-चीन युद्ध (Sino-Indian War) की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसे चेतन आनंद द्वारा निर्देशित फ़िल्म 'हकीकत' (Haqeeqat) के लिए लिखा गया था। यह गीत उन भारतीय सैनिकों की भावनाओं को व्यक्त करता है जिन्होंने हिमालय की बर्फीली चोटियों पर देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था।
इस पंक्ति में हिमालय भारत के मान-सम्मान और गौरव का प्रतीक है। जिस तरह हिमालय भारत का मस्तक बनकर खड़ा है और शत्रुओं से हमारी रक्षा करता है, उसी तरह हमारे सैनिक भी देश के सम्मान की रक्षा करते हैं। सैनिकों का कहना है कि उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान देकर भी हिमालय का सिर, यानी देश का गौरव, झुकने नहीं दिया।
इस गीत में धरती को दुल्हन इसलिए कहा गया है क्योंकि:
- रक्षा का वचन: जिस प्रकार एक वर अपनी दुल्हन की रक्षा का वचन लेता है, उसी प्रकार सैनिक अपनी धरती माँ की रक्षा का वचन लेते हैं।
- लाल जोड़ा: सैनिक जब युद्ध में घायल होते हैं, तो उनका खून धरती पर फैलता है। यह खून से सनी धरती ऐसी लगती है मानो उसने लाल जोड़ा पहन रखा हो। इसीलिए सैनिकों ने धरती को खून से सजी हुई दुल्हन कहा है।
गीतों में कुछ खास बातें होती हैं जिनकी वजह से वे जीवन भर याद रह जाते हैं:
- भावनाओं से जुड़ाव (Emotional Connection): गीत सीधे हमारे दिल और भावनाओं से जुड़ते हैं।
- लय और संगीत (Rhythm and Music): उनकी लय, धुन और संगीत उन्हें यादगार बनाते हैं।
- सरल भाषा (Simple Language): गीतों की भाषा अक्सर सरल और दिल को छू लेने वाली होती है।
- प्रेरणा (Motivation): 'कर चले हम फ़िदा' जैसे गीत देशभक्ति और त्याग की भावना जगाते हैं, जो हमें हमेशा प्रेरित करती है।
कवि ने 'साथियो' संबोधन का प्रयोग देश के अन्य सैनिकों और देशवासियों के लिए किया है। एक शहीद होता हुआ सैनिक अपने साथियों और देश के नागरिकों से यह कह रहा है कि हमने तो अपनी कुर्बानी दे दी, अब इस देश की रक्षा की जिम्मेदारी तुम्हारे हवाले है। यह एक पीढ़ी का दूसरी पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपना है।
कवि ने इस कविता में देश के लिए बलिदान और त्याग के काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है। सैनिक कहते हैं कि देश की रक्षा के लिए कुर्बानियों का जो सिलसिला शुरू हुआ है, वह कभी रुकना नहीं चाहिए। अगर कोई एक टुकड़ी शहीद हो जाए, तो दूसरी टुकड़ी को तुरंत उसकी जगह लेकर देश की रक्षा के लिए आगे बढ़ना चाहिए।
'सर पर कफ़न बाँधना' एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है मौत के लिए तैयार रहना। इस गीत में यह इस ओर संकेत करता है कि सैनिक जब युद्ध के मैदान में जाते हैं, तो वे अपने जीवन का मोह त्याग देते हैं। वे देश के लिए हँसते-हँसते अपनी जान कुर्बान करने के लिए तैयार रहते हैं।
'कर चले हम फ़िदा' कविता का प्रतिपाद्य देशभक्ति, बलिदान और कर्तव्य की भावना है। इस कविता के माध्यम से कवि कैफ़ी आज़मी एक सैनिक की अंतिम इच्छा को व्यक्त करते हैं। एक सैनिक अपनी जान देते हुए भी चाहता है कि देश की रक्षा का यह क्रम कभी न रुके। वह देशवासियों से अपील करता है कि वे देश की आन-बान-शान पर कभी आँच न आने दें। वह युवाओं को राम और लक्ष्मण बनकर देश रूपी सीता की रक्षा के लिए प्रेरित करता है। यह कविता हमें सिखाती है कि देश का सम्मान हमारे जीवन से भी बढ़कर है।
Extra Board Exam Questions (2026-27)
सैनिकों को अपनी ज़िंदगी से ज़्यादा देश का मान-सम्मान और गौरव प्यारा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे मानते हैं कि व्यक्तिगत जीवन तो क्षणभंगुर है, लेकिन देश हमेशा रहना चाहिए। वे देश की आन, बान और शान के लिए हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं।
इस पंक्ति का आशय है कि सैनिक मौत को गले लगा रहे हैं, यानी वे खुशी-खुशी देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर रहे हैं। उनके लिए यह मौत का डर नहीं, बल्कि देश के लिए बलिदान का एक गौरवपूर्ण अवसर है। वे मौत का स्वागत ऐसे कर रहे हैं जैसे कोई अपने प्रिय से मिलता है।
यहाँ 'सीता का दामन' से अभिप्राय भारत माता की इज़्ज़त और सम्मान से है। जिस प्रकार रावण ने सीता का हरण करके उन्हें अपवित्र करने का प्रयास किया था, कवि उसी तरह देश के दुश्मनों को रावण बता रहा है। सैनिक देशवासियों से कहते हैं कि कोई भी दुश्मन रूपी रावण भारत माता रूपी सीता के आँचल को छू भी न पाए।
'कर चले हम फ़िदा' कविता एक सैनिक की अंतिम भावनाओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। एक मरते हुए सैनिक के मन में निम्नलिखित इच्छाएँ हैं:
- गौरव की भावना: वह इस बात से संतुष्ट है कि उसने मरते दम तक देश के सम्मान (हिमालय) को झुकने नहीं दिया।
- जिम्मेदारी का हस्तांतरण: वह अपने देशवासियों और साथी सैनिकों ('साथियो') से अपील करता है कि अब देश की रक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।
- बलिदान की परंपरा: वह चाहता है कि कुर्बानियों का यह सिलसिला कभी न थमे। एक के बाद एक सैनिक देश की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहे।
- देश की अखंडता: वह चाहता है कि देशवासी अपने खून से ऐसी लक्ष्मण रेखा खींच दें जिसे कोई दुश्मन पार न कर सके।
- नारी सम्मान की रक्षा: वह देश की धरती (जिसे दुल्हन और सीता कहा गया है) की इज्जत की रक्षा के लिए देश के युवाओं को राम और लक्ष्मण बनने का आह्वान करता है।
संक्षेप में, सैनिक की अंतिम इच्छा यही है कि देश हमेशा सुरक्षित और गौरवशाली बना रहे, भले ही इसके लिए अनगिनत प्राणों की आहुति क्यों न देनी पड़े।
इस कविता में कवि कैफ़ी आज़मी ने देश के युवाओं को एक बहुत ही शक्तिशाली संदेश दिया है।
- कर्तव्य का आह्वान: मरता हुआ सैनिक युवाओं को देश की रक्षा का पवित्र कर्तव्य याद दिलाता है। वह कहता है कि अब यह 'वतन' उनके हवाले है।
- राम और लक्ष्मण बनें: कवि युवाओं को पौराणिक नायक राम और लक्ष्मण का उदाहरण देता है। वह कहता है कि जैसे राम और लक्ष्मण ने सीता की रक्षा की थी, वैसे ही आज के युवाओं को भारत माता की रक्षा करनी है।
- एकता का संदेश: 'तुम ही राम हो, तुम ही लक्ष्मण' कहकर कवि यह भी बताता है कि देश की रक्षा की जिम्मेदारी किसी एक की नहीं, बल्कि हर एक नौजवान की है। उन्हें मिलकर इस कर्तव्य को निभाना है।
- साहस और पराक्रम: यह कविता युवाओं को साहसी, पराक्रमी और निडर बनने के लिए प्रेरित करती है, ताकि कोई भी 'रावण' रूपी दुश्मन देश की तरफ आँख उठाकर भी न देख सके।
इस प्रकार, यह कविता युवाओं में देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और आत्म-बलिदान की भावना जगाने का एक सशक्त माध्यम है।
खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर
इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई
तोड़ दो हाथ गर हाथ उठने लगे
छू न पाए सीता का दामन कोई
राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
Q11. 'ज़मीं पर लकीर खींचने' का क्या अर्थ है? (1 Mark)
इसका अर्थ है अपने खून से देश की सीमाओं को सुरक्षित करना ताकि कोई दुश्मन उसे पार न कर सके।
Q12. कवि ने देश के दुश्मनों को क्या संज्ञा दी है? (1 Mark)
कवि ने देश के दुश्मनों को 'रावण' की संज्ञा दी है।
Q13. 'सीता का दामन' किसका प्रतीक है? उसकी रक्षा के लिए क्या करने को कहा गया है? (2 Marks)
'सीता का दामन' भारत माता के सम्मान और अस्मिता का प्रतीक है। उसकी रक्षा के लिए देशवासियों को एकजुट होकर राम और लक्ष्मण की तरह सजग रहने को कहा गया है, ताकि कोई भी दुश्मन रूपी रावण भारत माता का अपमान न कर सके।
Q14. 'राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण' क्यों कहा गया है?
यह इसलिए कहा गया है क्योंकि देश की रक्षा का भार अब देश के नौजवानों और नागरिकों पर है। उन्हें ही मिलकर राम और लक्ष्मण की तरह देश की रक्षा करनी है।
Q15. इस पद्यांश का मुख्य संदेश क्या है?
इस पद्यांश का मुख्य संदेश यह है कि देश की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है। हमें किसी भी बाहरी शक्ति को देश का अहित नहीं करने देना चाहिए।
Common Mistakes to Avoid
Exam Preparation Tips for 2026-27
Frequently Asked Questions (FAQs)
Master कर चले हम फ़िदा 🇮🇳
"कर चले हम फ़िदा" एक ऐसा गीत है जो हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की ज्वाला जलाता है। यह हमें उन अनाम सैनिकों के बलिदान की याद दिलाता है जिनकी वजह से हम सुरक्षित हैं। इस चैप्टर को सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि देश के प्रति अपने कर्तव्य को समझने के लिए भी पढ़ें।
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