CBSE 2026-27 | स्पर्श भाग 2

पर्वत प्रदेश में पावस: Updated NCERT Solutions & Important Questions for Class 10 Hindi (2026-27)

📚 Class 10 CBSE 🇮🇳 Hindi Course B – Sparsh ⚡ 3–5 Marks 🔵 Medium

Explore the magic of 'Parvat Pradesh Mein Pavas' by Sumitranandan Pant. This detailed guide provides complete NCERT solutions, important questions, and simple explanations. Mastering this beautiful poem is crucial for scoring high marks in your CBSE Class 10 Hindi board exams. Let's begin our journey!

📋Chapter Overview: पर्वत प्रदेश में पावस

📚

Chapter 4: पर्वत प्रदेश में पावस – Quick Reference

Chapter Nameपर्वत प्रदेश में पावस (Chapter 4)
Authorसुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant)
SubjectHindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2)
Class / BoardCBSE Class 10
Target Year2026-27
Important Topicsभावार्थ (Poem Explanation), मानवीकरण अलंकार (Personification), प्रकृति का सजीव चित्रण (Live depiction of nature), कठिन शब्दार्थ (Difficult word meanings).
Difficulty LevelMedium
Exam Weightage3–5 Marks

📊Key Imagery – कविता के मुख्य बिम्ब

🏔
पर्वत का आकार
मेखलाकार
💕
झरनों का रूप
मोती की लड़ियाँ
🧴
तालाब का रूप
विशाल दर्पण
🌳
पेड़ों की भावना
उच्चाकांक्षाएँ
🌧
मौसम का बदलाव
इंद्रजाल
👀
पर्वत की आँखें
सहस्र दृग-सुमन

🎯Learning Objectives

1

Understand the complete meaning (भावार्थ) of the poem 'Parvat Pradesh Mein Pavas'.

2

Explain the beautiful depiction of nature during the monsoon in the mountains.

3

Identify and explain the key literary device used: मानवीकरण अलंकार (Personification).

4

Analyze the poet's perspective and the magical atmosphere he creates.

5

Confidently answer all NCERT questions and extra board exam questions.

6

Appreciate the richness of Hindi poetry and the works of Sumitranandan Pant.

💡Key Concepts & Definitions

पावस ऋतु
The rainy season or monsoon.
मेखलाकार
Shaped like a 'mekhla' or a waistband; ring-shaped. This describes the mountain range.
सहस्र दृग-सुमन
Thousands of flower-like eyes. The poet imagines the flowers on the mountain as its eyes.
दर्पण
Mirror. The poet refers to the vast lake at the foot of the mountain as a giant mirror.
मोती की लड़ियाँ
Strings of pearls. This is used to describe the beautiful, sparkling waterfalls.
उच्चाकांक्षाएँ
High ambitions or aspirations. The tall trees are personified as having high ambitions to touch the sky.
इंद्रजाल
The magic of Lord Indra (the god of rain and thunderstorms). This refers to the suddenly changing, magical weather.
💡
मानवीकरण अलंकार (Personification)
This is a figure of speech where non-living objects (like mountains, trees, clouds) are given human qualities. This poem is a prime example of personification.

📝Updated NCERT Solutions for Sparsh Chapter 4

Here are the complete and easy-to-understand solutions for all the questions from your NCERT Sparsh (स्पर्श भाग 2) textbook.

📌 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए- (लिखित - क)
✅ Model Answer

पावस ऋतु में प्रकृति में पल-पल परिवर्तन आते हैं। कभी तेज़ बारिश होती है, तो कभी धूप निकल आती है। पर्वत, तालाब, और पेड़-पौधे सब पर इस बदलते मौसम का प्रभाव दिखाई देता है। चारों ओर धुंध छा जाती है और झरने बहने लगते हैं, जिससे प्रकृति का रूप हर क्षण नया लगता है।

✅ Model Answer

'मेखलाकार' शब्द का अर्थ है 'करधनी के आकार का' (shaped like a waistband)। कवि ने इस शब्द का प्रयोग पर्वत श्रृंखला के लिए किया है क्योंकि पहाड़ियाँ घुमावदार और एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, जो किसी कमर पर बंधी करधनी जैसी प्रतीत होती हैं।

✅ Model Answer

'सहस्र दृग-सुमन' से तात्पर्य है 'हजारों पुष्प रूपी आँखें'। कवि ने इस पद का प्रयोग पर्वत पर खिले हुए अनगिनत फूलों के लिए किया है। कवि कल्पना करता है कि पर्वत इन फूलों रूपी आँखों से अपने विशाल रूप को नीचे तालाब में देख रहा है।

✅ Model Answer

कवि ने तालाब की समानता एक विशाल दर्पण (mirror) के साथ दिखाई है। ऐसा इसलिए क्योंकि तालाब का पानी बिलकुल शांत और स्वच्छ है, जिसमें पर्वत अपनी हज़ारों पुष्प-रूपी आँखों के साथ अपना प्रतिबिंब स्पष्ट रूप से देख सकता है।

📌 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 25-30 शब्दों में लिखिए- (लिखित - ख)
✅ Model Answer

पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर अपनी उच्चाकांक्षाओं (high ambitions) के कारण देख रहे थे। वे शांत आकाश को छूना चाहते हैं। यह इस बात को प्रतिबिंबित करता है कि मनुष्य के मन में भी हमेशा ऊँचा उठने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रबल इच्छा होती है, ठीक उन पेड़ों की तरह।

✅ Model Answer

जब मूसलाधार बारिश के कारण चारों ओर घना कोहरा और धुँआ छा जाता है, तो ऐसा लगता है मानो तालाब जल गया हो। इस भयानक और बदलते दृश्य को देखकर शाल के ऊँचे-ऊँचे वृक्ष भयभीत होकर धरती में धँस गए प्रतीत होते हैं। यह प्रकृति के रौद्र रूप से डर जाने का एक काव्यात्मक चित्रण है।

✅ Model Answer

झरने ऊँचे पर्वतों के गौरव का गान कर रहे हैं। वे पर्वतों की महानता और ऊँचाई के गीत गा रहे हैं। बहते हुए झरनों की तुलना मोतियों की चमकीली लड़ियों (sparkling strings of pearls) से की गई है, क्योंकि उनका सफ़ेद, झागदार पानी चट्टानों पर गिरते हुए मोतियों की माला जैसा सुंदर लगता है।

📌 निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए- (लिखित - ग)
✅ Model Answer

इस पंक्ति का भाव है कि मूसलाधार और घनी बारिश हो रही है, जिससे ऐसा लग रहा है मानो आकाश ही धरती पर टूट पड़ा हो। चारों तरफ पानी ही पानी है और बारिश की तेज़ धार के कारण आकाश और धरती का अंतर मिट गया है। यह वर्षा की भयंकरता और तीव्रता को दर्शाता है।

✅ Model Answer

इस पंक्ति का भाव है कि पर्वतीय प्रदेश में वर्षा के कारण मौसम में तेज़ी से अद्भुत परिवर्तन हो रहे हैं। कभी धूप, कभी बारिश, और कभी घना कोहरा छा जाता है। इस जादुई और मायावी बदलाव को देखकर कवि को ऐसा लगता है कि वर्षा के देवता इंद्र बादलों रूपी विमान में घूम-घूम कर अपना जादुई खेल (इंद्रजाल) दिखा रहे हैं।

✅ Model Answer

भाव यह है कि पहाड़ पर उगे ऊँचे-ऊँचे पेड़ ऐसे लग रहे हैं जैसे वे पर्वत के हृदय से उगी उसकी ऊँची आकांक्षाएँ हों। ये पेड़ एकदम शांत, स्थिर और एकटक होकर शांत आकाश की ओर देख रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे अपनी ऊँची आकांक्षाओं को पूरा न कर पाने की चिंता में डूबे हुए हैं और आकाश को छूने का कोई उपाय सोच रहे हैं।

🚀Extra Important Questions (Board Exam 2026-27)

❓ MCQs (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Difficulty: Easy
Q1. 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के रचयिता कौन हैं?
✅ Correct: (ख) सुमित्रानंदन पंत
Difficulty: Easy
Q2. कवि ने 'मोती की लड़ियों' किसे कहा है?
✅ Correct: (ग) झरनों को
Difficulty: Medium
Q3. 'उड़ गया, अचानक लो, भूधर!' - इस पंक्ति में 'भूधर' का क्या अर्थ है?
✅ Correct: (घ) पहाड़
Difficulty: Medium
Q4. कविता में कौन-सा प्रमुख अलंकार बार-बार प्रयोग हुआ है?
✅ Correct: (घ) मानवीकरण
Difficulty: Medium
Q5. देवता इंद्र अपना 'इंद्रजाल' किस पर बैठकर खेल रहे हैं?
✅ Correct: (ख) जलद-यान पर (बादल रूपी विमान)
📌 Short Answer Questions (लघु उत्तरीय प्रश्न)
✅ Model Answer

कवि को पर्वत पर खिले हजारों फूल पर्वत की आँखों (सहस्र दृग-सुमन) जैसे लग रहे हैं। कवि कल्पना करता है कि पर्वत इन फूलों रूपी आँखों से नीचे फैले विशाल तालाब रूपी दर्पण में अपनी विशालता को निहार रहा है।

✅ Model Answer

मूसलाधार बारिश के कारण चारों ओर घना कोहरा छा गया था। इस कोहरे में ऊँचे-ऊँचे शाल के पेड़ दिखाई नहीं दे रहे थे, वे अदृश्य हो गए थे। इस दृश्य को देखकर ऐसा लग रहा था मानो वे प्रकृति के इस बदलते रूप से डरकर धरती के अंदर धँस गए हों।

✅ Model Answer

'पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश' का आशय है कि पर्वतीय प्रदेश में वर्षा ऋतु के समय प्रकृति का रूप हर क्षण बदल रहा है। कभी धूप निकलती है, तो अगले ही पल बादल छा जाते हैं और मूसलाधार बारिश होने लगती है। यह तीव्र परिवर्तन एक नाटक के बदलते दृश्यों जैसा लगता है।

✅ Model Answer

झरने की 'झर-झर' आवाज़ को सुनकर कवि कल्पना करता है कि झरने अपनी इस ध्वनि से पर्वतों की महानता और गौरव का गुणगान कर रहे हैं। उनकी ध्वनि नस-नस में उत्साह और प्रसन्नता भर देती है।

✅ Model Answer

कवि ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि अचानक घने बादल और कोहरा छा जाने के कारण विशाल पर्वत आँखों से ओझल हो गया। वह दिखाई देना बंद हो गया, मानो कोई विशाल पक्षी की तरह अपने पंख फड़फड़ाकर उड़ गया हो। यह प्रकृति के जादुई और अप्रत्याशित बदलाव को दर्शाता है।

📌 Long Answer & Value-Based Questions
✅ Model Answer

'पर्वत प्रदेश में पावस' सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित प्रकृति के सौंदर्य की एक अद्भुत कविता है।

  • सजीव चित्रण: कवि ने शब्दों के माध्यम से पर्वतीय प्रदेश में वर्षा ऋतु का एक सजीव और गतिशील चित्र खींचा है। पर्वत, झरने, तालाब, पेड़ और बादल सभी जीवंत प्रतीत होते हैं।
  • मानवीकरण का प्रयोग: कविता का सबसे बड़ा सौंदर्य इसमें प्रयुक्त मानवीकरण अलंकार है। पर्वत को आँखों वाला, पेड़ों को चिंतित और महत्त्वाकांक्षी, और बादलों पर इंद्र को जादू करते हुए दिखाकर कवि ने निर्जीव प्रकृति में जान डाल दी है।
  • ध्वनि और गति: 'झर-झर' झरनों की आवाज़ और 'पल-पल बदलते' प्रकृति के रूप से कविता में एक गति और संगीत का अनुभव होता है।
  • रूपक और उपमा: तालाब को दर्पण और झरने को मोतियों की लड़ी बताकर कवि ने भाषा को अत्यंत सुंदर और प्रभावी बना दिया है।

संक्षेप में, यह कविता प्रकृति के कोमल, सुंदर और जादुई रूप का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो पाठक को मंत्रमुग्ध कर देती है।

✅ Model Answer

कवि ने प्रकृति के अनेक रूपों का चित्रण किया है।

वर्षा से पहले का दृश्य:

  • पर्वत अपनी करधनी जैसी श्रृंखला के साथ खड़ा है।
  • उस पर खिले फूल उसकी आँखें हैं।
  • पर्वत के नीचे एक विशाल तालाब है जो दर्पण का काम कर रहा है।
  • ऊँचे-ऊँचे वृक्ष शांत आकाश को देख रहे हैं।
  • पहाड़ों से गिरते झरने मोतियों की लड़ियों जैसे लग रहे हैं।

वर्षा के दौरान का दृश्य:

  • अचानक घने बादल छा जाते हैं और पर्वत अदृश्य हो जाता है।
  • केवल झरनों की आवाज़ सुनाई देती है, फूल छिप जाते हैं।
  • मूसलाधार वर्षा होती है, मानो आकाश धरती पर टूट पड़ा हो।
  • चारों ओर कोहरा और धुँआ सा छा जाता है, जिससे शाल के पेड़ भी छिपे हुए और डरे हुए लगते हैं।
  • यह पूरा दृश्य इंद्र का रचा हुआ कोई जादू (इंद्रजाल) लगता है।

इस प्रकार, कवि ने प्रकृति के शांत, सुंदर और फिर अचानक रौद्र व मायावी, दोनों रूपों का अद्भुत चित्रण किया है।

✅ Model Answer

पेड़ों को 'उच्चाकांक्षाओं से तरुवर' कहकर कवि हमें जीवन में हमेशा ऊँचे लक्ष्य रखने की प्रेरणा देते हैं। जिस प्रकार पेड़ बिना हिले-डुले, शांत भाव से आकाश को छूने की आकांक्षा रखते हैं, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए धैर्य और स्थिरता के साथ प्रयास करना चाहिए। यह हमें सिखाता है कि महत्त्वाकांक्षी होना एक स्वाभाविक और सकारात्मक गुण है, बशर्ते हम उसे प्राप्त करने के लिए सही मार्ग पर चलें।

✅ Model Answer

इस कविता को 'चित्रमयी' कविता इसलिए कहा जाता है क्योंकि कवि सुमित्रानंदन पंत अपने शब्दों से पाठक के मन में एक सजीव चित्र बना देते हैं। कविता को पढ़ते हुए ऐसा लगता है मानो सब कुछ हमारी आँखों के सामने घटित हो रहा हो।

  • उदाहरण 1: "मेखलाकार पर्वत अपार, अपने सहस्र दृग-सुमन फाड़"। इन पंक्तियों को पढ़ते ही आँखों के सामने करधनी के आकार का पहाड़ और उस पर खिले हज़ारों फूल आ जाते हैं।
  • उदाहरण 2: "गिरिवर के उर से उठ-उठ कर... झाँक रहे नीरव नभ पर"। इसे पढ़कर लंबे-लंबे पेड़ जो आकाश की ओर देख रहे हैं, उनका चित्र मन में बन जाता है।

कवि की शब्द-चयन की यही शक्ति इस कविता को एक चित्रमयी कविता बनाती है।

✅ Model Answer

कवि की इस कल्पना का गहरा आशय है। यह केवल एक काव्यात्मक वर्णन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के शक्तिशाली और अप्रत्याशित रूप को दर्शाता है। इसका आशय यह है कि प्रकृति जब अपना रूप बदलती है, तो बड़ी से बड़ी और मज़बूत चीज़ें भी उसके सामने तुच्छ और असहाय लगने लगती हैं। ऊँचे और अटल दिखने वाले शाल के पेड़ भी प्रकृति के कोप (घने कोहरे और बारिश) के सामने डरकर छिप जाते हैं। यह मनुष्य को यह संदेश भी देता है कि उसे प्रकृति की शक्ति का सम्मान करना चाहिए।

Common Mistakes Students Make

01
🔄
Ignoring 'भावार्थ'
Students often just learn the word-to-word meaning, but in Hindi poetry, 'भावार्थ' (the inner meaning and emotion) is key. Always try to understand the poet's feeling behind the lines.
02
🔍
Confusing 'मेखलाकार' and 'दर्पण'
'मेखलाकार' describes the shape of the mountain range, while 'दर्पण' (mirror) refers to the lake/talab. Don't mix them up.
03
💬
Not Explaining Personification
Simply writing "मानवीकरण अलंकार है" is not enough. You must explain how it is used. For example, "The poet has personified the mountain by giving it thousands of flower-like eyes."
04
Spelling Errors
Words like 'सहस्र', 'उच्चाकांक्षा', 'इंद्रजाल' are often misspelled. Practice writing them correctly.

📚Exam Preparation Tips for 2026-27

01
📈
Read the Poem Aloud
Read the poem 2-3 times to feel its rhythm and sound. This helps in remembering the lines.
02
📋
Focus on Stanza-wise Explanation
Prepare a short summary for each stanza of the poem. This will help in answering any 'भाव स्पष्ट कीजिए' type question.
03
📍
Create a Word Bank
Make a list of all the difficult words (e.g., पावस, मेखलाकार, दृग-सुमन, उर, तरुवर, जलद-यान) and their simple meanings.
04
📝
Practice Writing
Don't just read the answers. Write the answers to the important questions to improve your speed and presentation for the board exam.

🅾Frequently Asked Questions (FAQs)

What is the central theme or summary of the poem 'Parvat Pradesh Mein Pavas'?
The central theme is the magical and ever-changing beauty of nature in the mountains during the monsoon. The poem describes how the landscape transforms from serene and beautiful to mysterious and awe-inspiring within moments, using vivid imagery and personification.
Who was Sumitranandan Pant?
Sumitranandan Pant was one of the most celebrated Hindi poets of the 20th century. He was a key figure of the 'Chhayavaadi' school of Hindi literature and was known for his poetry inspired by nature, beauty, and philosophy.
What is the meaning of 'Indrajal' in the poem?
'Indrajal' literally means 'the magic of Lord Indra'. In the poem, it refers to the magical and sudden changes in the weather during the monsoon – the appearance of clouds, heavy rain, and fog which makes the mountains disappear and reappear.
Is Parvat Pradesh Mein Pavas an important chapter for CBSE Class 10 boards?
Yes, it is an important chapter from the poetry section. Questions related to its 'Bhavarth' (explanation), literary devices (especially personification), and key terms are frequently asked in the board exams for 3-5 marks.
What is the main 'Alankar' (literary device) used in this poem?
The main literary device used throughout the poem is मानवीकरण अलंकार (Personification), where non-human things like mountains, trees, and waterfalls are given human qualities and emotions.

Master पर्वत प्रदेश में पावस 🌧

'Parvat Pradesh Mein Pavas' is not just a chapter; it's a beautiful journey into the heart of nature. We hope this detailed guide helps you master it completely. Revise regularly, practice writing, and you'll be set for your exams!

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