NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 2: पद
Welcome, students! This guide will help you master CBSE Class 10 Hindi Sparsh Chapter 2, "पद" by मीराबाई. We'll break down the beautiful verses of devotion, making them easy to understand. This chapter is crucial for scoring well in your board exams and appreciating the richness of Hindi poetry.
Chapter at a Glance
Chapter 2: पद – Quick Reference
| Chapter Name | पद (Pad) |
| Author | मीराबाई (Mirabai) |
| Subject | Hindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2) |
| Class | 10 |
| Board | CBSE |
| Important Topics | - मीरा की भक्ति (Mira's Devotion) - कृष्ण के रक्षक रूप का वर्णन (Description of Krishna as a protector) - मीरा की चाकरी की इच्छा (Mira's desire for service) - कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन (Description of Krishna's beauty) |
| Difficulty Level | Easy to Medium |
| Exam Weightage | 3–5 Marks |
Learning Objectives
Understand the deep meaning (भावार्थ) of both pads written by Mirabai.
Explain Mirabai's unwavering devotion (भक्ति-भावना) towards Lord Krishna.
Describe the examples Mira gives to show Krishna as the protector of his devotees.
Analyze Mira's desire to become a servant (दासी) of Krishna and its purpose.
Confidently answer all NCERT Solutions and Important Questions in your exams.
Key Concepts & Definitions
Full NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 2 - पद
पहले पद में, मीराबाई ने हरि (श्री कृष्ण) से अपनी पीड़ा हरने की विनती करते हुए उन्हें उनके भक्त-रक्षक रूप का स्मरण कराया है। वह कई उदाहरण देती हैं:
- द्रौपदी का उदाहरण: जिस प्रकार आपने (श्री कृष्ण ने) द्रौपदी का चीर बढ़ाकर भरी सभा में उसकी लाज बचाई थी।
- प्रह्लाद का उदाहरण: जिस प्रकार आपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए नरसिंह का रूप धारण किया और हिरण्यकशिपु का वध किया।
- गजराज (हाथी) का उदाहरण: जिस प्रकार आपने डूबते हुए हाथी (गजराज) को मगरमच्छ से बचाया और उसके कष्ट को दूर किया।
इन उदाहरणों को देकर मीरा कहती हैं कि हे प्रभु! जिस तरह आपने इन सब भक्तों के दुःख हरे, उसी प्रकार मेरी भी पीड़ा हरो और मुझे कष्टों से मुक्ति दो।
दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी (सेवा) इसलिए करना चाहती हैं क्योंकि इससे उन्हें तीन बड़े लाभ मिलेंगे। वह मानती हैं कि चाकरी के बहाने उन्हें हमेशा अपने प्रभु के समीप रहने का अवसर मिलेगा।
मीरा के अनुसार, चाकरी करने से:
- नित उठ दरसण पास्यूँ: उन्हें रोज़ सुबह उठते ही श्री कृष्ण के दर्शन प्राप्त होंगे।
- भाव भगती जागीरी पास्यूँ: कृष्ण की भक्ति-भावना रूपी जागीर (संपत्ति) प्राप्त होगी, जो कभी खत्म नहीं होगी।
- खरची में नाम सुमरण: उन्हें श्री कृष्ण का नाम स्मरण करने रूपी खर्च मिलेगा।
इस प्रकार, सेवा के बहाने मीरा को दर्शन, भक्ति और स्मरण, तीनों का सौभाग्य प्राप्त हो जाएगा, जो उनके जीवन का परम लक्ष्य है।
मीराबाई ने दूसरे पद में श्री कृष्ण के मनमोहक रूप-सौंदर्य का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है। वह कहती हैं:
- पीताम्बरधारी: उनके प्रभु श्री कृष्ण पीले वस्त्र (पीताम्बर) धारण करते हैं, जो उनके सांवले शरीर पर बहुत सुशोभित होते हैं।
- मोर मुकुट: उनके सिर पर मोरों के पंखों से बना सुंदर मुकुट विराजमान है।
- गले में वैजयंती माला: उनके गले में वैजयंती फूलों की माला है, जो उनकी सुंदरता को और बढ़ा देती है।
मीरा बताती हैं कि उनका प्रिय कृष्ण वृन्दावन की गलियों में गायें चराता है और मन को मोह लेने वाली मुरली बजाता है। कृष्ण का यह रूप मीरा के हृदय में बस गया है।
मीराबाई की भाषा-शैली अत्यंत सरल, सहज और भावपूर्ण है। उनकी भाषा की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- भाषा: मीराबाई के पदों में ब्रजभाषा का प्रमुखता से प्रयोग हुआ है, लेकिन उस पर राजस्थानी, गुजराती और पंजाबी भाषा का भी प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। इसे 'मिश्रित ब्रजभाषा' कहा जा सकता है।
- भावपूर्णता: उनकी भाषा सीधे हृदय से निकली हुई लगती है। उसमें भक्ति, प्रेम, विरह और समर्पण के भाव कूट-कूट कर भरे हैं।
- गीतात्मकता और संगीतात्मकता: उनके पद गेय हैं, यानी उन्हें गाया जा सकता है। इसमें लय और संगीत का अद्भुत संगम है।
- अलंकार: उन्होंने अनुप्रास, रूपक, और उदाहरण जैसे अलंकारों का सहज प्रयोग किया है, जिससे काव्य का सौंदर्य बढ़ गया है।
संक्षेप में, मीरा की भाषा-शैली उनके भावों को व्यक्त करने में पूरी तरह समर्थ है और पाठक या श्रोता को सीधे उनके भक्ति-रस में डुबो देती है।
मीराबाई श्री कृष्ण को पाने के लिए और उनके समीप रहने के लिए कोई भी कार्य करने को तैयार हैं। वह उनकी दासी या सेविका बनना चाहती हैं। दूसरे पद के अनुसार, वह निम्नलिखित कार्य करने को तैयार हैं:
- बाग लगाना: वह श्री कृष्ण के घूमने के लिए बाग-बगीचे लगाना चाहती हैं ताकि इसी बहाने रोज़ उनके दर्शन कर सकें।
- ऊँचे महल बनवाना: वह वृन्दावन में ऊँचे-ऊँचे महल बनवाना चाहती हैं, जिनमें खिड़कियाँ हों, ताकि वह उन खिड़कियों से आसानी से अपने प्रभु कृष्ण को देख सकें।
- दासी बनना: वह कृष्ण की दासी बनकर उनकी हर आज्ञा का पालन करना चाहती हैं।
- लीलाओं का गान करना: वह वृन्दावन की कुंज-गलियों में घूम-घूमकर कृष्ण की लीलाओं का गुणगान करना चाहती हैं।
- साड़ी पहनना: वह कृष्ण के दर्शन के लिए कुसुम्बी रंग की साड़ी पहनने को तैयार हैं।
मीरा का एकमात्र उद्देश्य कृष्ण का सान्निध्य पाना है, और इसके लिए वह हर संभव प्रयास करने को तैयार हैं।
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इस पंक्ति का आशय है कि जिस प्रकार श्री कृष्ण ने डूबते हुए गजराज (ऐरावत हाथी) की पुकार सुनकर उसे मगरमच्छ के मुँह से बचाया और उसकी पीड़ा को दूर किया, उसी प्रकार हे प्रभु, आप मेरी भी पीड़ा को दूर करें। यह मीरा की कृष्ण के रक्षक रूप में आस्था को दर्शाता है।
मीराबाई को चाकरी में तीन मुख्य चीजें मिलेंगी: रोज़ कृष्ण के दर्शन का अवसर, भक्ति रूपी जागीर, और नाम स्मरण रूपी जेब खर्च।
मीरा का हृदय अपने आराध्य प्रभु श्री कृष्ण से मिलने के लिए अत्यंत अधीर या बेचैन है। वह कृष्ण के दर्शन की प्यासी हैं और उनकी विरह-वेदना सहन नहीं कर पा रही हैं, इसलिए उनका हृदय मिलने के लिए तड़प रहा है।
यह कथन पूरी तरह सत्य है कि मीरा की भक्ति माधुर्य भाव की है, जिसमें भक्त अपने आराध्य को प्रेमी या पति के रूप में देखता है। 'पद' पाठ के आधार पर इसे इस प्रकार सिद्ध किया जा सकता है:
- समीपता की चाह: दूसरे पद में मीरा कृष्ण की चाकरी सिर्फ इसलिए करना चाहती हैं ताकि वह उनके पास रह सकें, उनके दर्शन कर सकें। यह एक प्रेयसी की अपने प्रियतम के समीप रहने की इच्छा को दर्शाता है।
- रूप-सौंदर्य पर मुग्ध होना: मीरा कृष्ण के 'मोर मुकुट पीताम्बर सोहे' वाले रूप पर मोहित हैं। वह उनके सौंदर्य का वर्णन एक भक्त की तरह नहीं, बल्कि एक प्रेमिका की तरह करती हैं जो अपने प्रिय के रूप पर आसक्त है।
- मिलने की व्याकुलता: दूसरे पद के अंत में मीरा कहती हैं, "हिवड़ो घणो अधीरो", जिसका अर्थ है कि उनका हृदय कृष्ण से मिलने के लिए बहुत बेचैन है। यह विरह की तीव्र अनुभूति माधुर्य भाव का ही एक अंग है।
अतः, मीरा की भक्ति में दासता का भाव होते हुए भी, मूल रूप से माधुर्य भाव की प्रधानता है।
पहले पद में मीरा ने तीन भक्तों का उल्लेख किया है:
- द्रौपदी: महाभारत में जब दुःशासन भरी सभा में द्रौपदी का चीर-हरण कर रहा था, तब द्रौपदी ने श्री कृष्ण को पुकारा। कृष्ण ने अदृश्य रूप से उसकी साड़ी को इतना बढ़ा दिया कि दुःशासन उसे खींचते-खींचते थक गया पर साड़ी खत्म नहीं हुई। इस प्रकार कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई।
- भक्त प्रह्लाद: प्रह्लाद, राक्षस राजा हिरण्यकशिपु का पुत्र था और भगवान विष्णु का परम भक्त था। जब हिरण्यकशिपु ने उसे मारने का हर संभव प्रयास किया और असफल रहा, तो अंत में कृष्ण (विष्णु) ने नरसिंह (आधा मनुष्य, आधा सिंह) का अवतार लेकर खंभे से निकलकर हिरण्यकशिपु का वध किया और प्रह्लाद की रक्षा की।
- गजराज: पौराणिक कथा के अनुसार, गजराज (हाथियों का राजा) एक सरोवर में पानी पीने गया जहाँ एक शक्तिशाली मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया। जब गजराज खुद को छुड़ा नहीं पाया तो उसने विष्णु जी का स्मरण किया। उसकी पुकार सुनकर भगवान विष्णु स्वयं आकर मगरमच्छ का वध करके गजराज को मुक्त कराते हैं।
गिरधारी लाला म्हाने चाकर राखोजी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गास्यूँ।"
- Q11. प्रस्तुत पद्यांश की कवयित्री और पाठ का नाम लिखिए।
उत्तर: कवयित्री - मीराबाई, पाठ - पद। - Q12. कवयित्री 'चाकर' क्यों बनना चाहती हैं?
उत्तर: कवयित्री 'चाकर' इसलिए बनना चाहती हैं ताकि वे अपने आराध्य श्री कृष्ण के समीप रह सकें और रोज़ उनके दर्शन पा सकें। - Q13. 'नित उठ दरसण पास्यूँ' का क्या लाभ है?
उत्तर: इसका लाभ यह है कि सेविका बनकर मीरा को प्रतिदिन अपने प्रभु के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी अभिलाषा है। - Q14. मीरा वृन्दावन की गलियों में क्या करना चाहती हैं?
उत्तर: मीरा वृन्दावन की कुंज गलियों में घूम-घूमकर अपने आराध्य गोविन्द (श्री कृष्ण) की लीलाओं का गुणगान करना चाहती हैं। - Q15. इस पद्यांश की भाषा कौन-सी है?
उत्तर: इस पद्यांश की भाषा मिश्रित ब्रजभाषा है, जिसमें राजस्थानी शब्दों का भी प्रयोग हुआ है।
Common Mistakes to Avoid
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Frequently Asked Questions (FAQs)
Master मीरा के पद 🌸
Mirabai's 'Pad' are not just poems; they are a window into the soul of a true devotee. By understanding the भावार्थ, you not only prepare for your CBSE Class 10 Hindi Board Exam but also connect with a timeless piece of literature. Keep revising these Updated NCERT Solutions and practice the Important Questions. Regular practice and a clear understanding of the concepts are your keys to success. Good luck!
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