NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 14: कारतूस
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चैप्टर का संक्षिप्त विवरण: कारतूस
पाठ 14: कारतूस – एक नजर में
| पाठ का नाम | पाठ 14 – कारतूस (Kartoos) |
| लेखक | हबीब तनवीर (Habib Tanvir) |
| विषय | Hindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2) |
| कक्षा | Class 10 |
| बोर्ड | CBSE |
| महत्वपूर्ण विषय | वज़ीर अली का चरित्र, देशभक्ति, अंग्रेजों की कूटनीति, एकांकी की नाट्य कला |
| Difficulty Level | Easy to Medium |
| Exam Weightage | 3–5 Marks |
मुख्य पात्र और तथ्य
Learning Objectives
18वीं सदी के अंत में अवध में ब्रिटिश शासन के ऐतिहासिक संदर्भ को समझना।
एक बहादुर, निडर और देशभक्त नायक के रूप में वज़ीर अली के चरित्र का विश्लेषण करना।
ब्रिटिश कर्नल और सआदत अली के इरादों को समझाना।
इस एकांकी के नाटकीय तत्वों और चरमोत्कर्ष की सराहना करना।
CBSE Class 10 Hindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2) Chapter 14 के सभी प्रश्नों का आत्मविश्वास से उत्तर देना।
मुख्य अवधारणाएँ और पात्र
Full NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 14 कारतूस
कर्नल कॉलिंज का खेमा जंगल में वज़ीर अली को पकड़ने के उद्देश्य से लगा हुआ था। वज़ीर अली अंग्रेजों का एक बड़ा दुश्मन था और कई हफ़्तों से उनकी पकड़ से बाहर था। वह इन्हीं जंगलों में कहीं छिपा हुआ था, इसलिए कर्नल और उसके सिपाही उसे पकड़ने के लिए जंगल में डेरा डाले हुए थे।
सिपाही वज़ीर अली से इसलिए तंग आ चुके थे क्योंकि वह कई हफ़्तों से उन्हें धूल चटा रहा था और उनकी पकड़ में नहीं आ रहा था। वज़ीर अली बहुत बहादुर और चालाक था। वह मुट्ठी भर आदमियों के साथ जंगल में भटक रहा था, फिर भी किसी की हिम्मत नहीं थी कि उसका सामना कर सके। उसकी इस बहादुरी ने सिपाहियों को परेशान कर दिया था।
कर्नल ने अपने फायदे के लिए सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाया। सआदत अली, वज़ीर अली का चाचा और अंग्रेजों का दोस्त था। उसे तख्त पर बिठाने के बदले में कंपनी को दस लाख रुपये और बहुत सारी जायदाद मिली। सआदत अली एक ऐश-परस्त आदमी था, इसलिए अंग्रेजों को पता था कि वह उनके नियंत्रण में रहेगा।
सआदत अली एक ऐश-परस्त और स्वार्थी आदमी था। उसे अपने देश या अपनी प्रजा से कोई लगाव नहीं था। वह केवल अपनी सुख-सुविधाओं और सत्ता का भूखा था। उसने अवध का नवाब बनने के लिए अंग्रेजों से हाथ मिला लिया और अपनी आधी जायदाद उन्हें दे दी।
वज़ीर अली ने वकील का कत्ल इसलिए किया क्योंकि वकील ने उसकी बेइज़्ज़ती की थी। जब वज़ीर अली को बनारस भेजा गया, तो उसने कंपनी के वकील से शिकायत की कि उसे कलकत्ता क्यों बुलाया जा रहा है। इस पर वकील ने वज़ीर अली की एक न सुनी और उसे बुरा-भला कहा। अपनी आत्म-सम्मान पर इस चोट को वज़ीर अली बर्दाश्त नहीं कर सका और उसने गुस्से में वकील का कत्ल कर दिया।
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-
वज़ीर अली के बहादुरी और हिम्मत से भरे कारनामे सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद आ जाती थी। जिस तरह रॉबिनहुड अमीरों को लूटकर गरीबों की मदद करता था और प्रशासन को चकमा देता था, उसी तरह वज़ीर अली भी अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम किए हुए था और उनकी पकड़ से बाहर था। उसकी निडरता और साहस रॉबिनहुड जैसे ही थे।
सआदत अली को तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का मुख्य मकसद अवध की दौलत पर कब्ज़ा करना और शासन पर नियंत्रण रखना था। सआदत अली अंग्रेजों का पिट्ठू था और उसने नवाब बनने के लिए उन्हें दस लाख रुपये और अपनी आधी संपत्ति दे दी थी। इससे कंपनी को बहुत फायदा हुआ और अवध पर उनका प्रभाव भी बढ़ गया।
वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली ने अपनी हिफ़ाज़त के लिए तुरंत कार्रवाई की। वह अपने कुछ साथियों के साथ आजमगढ़ की तरफ भागा और वहाँ के नवाब की मदद से सुरक्षित घाघरा तक पहुँच गया। इसके बाद से वह इन्हीं जंगलों में भटक रहा था और अपनी शक्ति बढ़ाने का प्रयास कर रहा था।
सवार के जाने के बाद कर्नल इसलिए हक्का-बक्का रह गया क्योंकि उसे पता चला कि वह सवार कोई और नहीं, बल्कि स्वयं वज़ीर अली था। जिस दुश्मन को पकड़ने के लिए वह जंगल में डेरा डाले बैठा था, वह खुद उसके खेमे में आया, उससे कारतूस ले गया और अपनी जान की परवाह किए बिना अपना नाम भी बता गया। वज़ीर अली की इस अविश्वसनीय हिम्मत को देखकर कर्नल हैरान और स्तब्ध रह गया।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-
लेफ्टिनेंट को ऐसा इसलिए लगा क्योंकि कर्नल ने उसे बताया कि सिर्फ वज़ीर अली ही अकेला दुश्मन नहीं है। दक्षिण में टीपू सुल्तान, बंगाल के नवाब का भाई शम्सुद्दौला, और अफगानिस्तान का बादशाह शाहे-ज़मा भी अंग्रेजों के खिलाफ थे। शाहे-ज़मा को भारत पर हमला करने के लिए वज़ीर अली ने ही न्योता दिया था। इन सभी शासकों का एक साथ अंग्रेजों के विरुद्ध खड़ा होना इस बात का संकेत था कि पूरे हिंदुस्तान में कंपनी के खिलाफ एक विद्रोह की लहर दौड़ गई है।
वज़ीर अली निसंदेह एक जाँबाज़ सिपाही था। इसके कई प्रमाण पाठ में मिलते हैं:
- साहस: उसने केवल पाँच महीने की हुकूमत में ही अवध से अंग्रेजों का प्रभाव लगभग समाप्त कर दिया था।
- आत्म-सम्मान: जब वकील ने उसकी बेइज़्ज़ती की, तो उसने अपनी जान की परवाह किए बिना उसे वहीं मार डाला।
- निडरता: वह अकेले ही अंग्रेजों के कर्नल के खेमे में घुस गया, उससे बातें की, और उससे कारतूस भी ले आया।
- चतुरता: वह हफ़्तों तक अंग्रेजों की पूरी फौज को जंगल में छकाता रहा।
ये सभी घटनाएँ साबित करती हैं कि वज़ीर अली एक सच्चा जाँबाज़ था।
सवार (वज़ीर अली) ने बड़ी चतुराई और हिम्मत से कर्नल से कारतूस हासिल किए। वह अकेले ही कर्नल के खेमे में पहुँचा और कहा कि वह वज़ीर अली को पकड़ने में कर्नल की मदद करना चाहता है, जिसके लिए उसे कुछ कारतूस चाहिए। कर्नल उसकी बातों में आ गया और उसे वज़ीर अली को पकड़ने के लिए एक आम हिंदुस्तानी सिपाही समझकर कारतूस दे दिए। जब कर्नल ने उसका नाम पूछा, तो उसने निडरता से अपना नाम "वज़ीर अली" बताया और चला गया।
(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
आशय: इस पंक्ति का आशय है कि वज़ीर अली के पास बहुत कम सैनिक (मुट्ठी भर आदमी) थे, फिर भी उसके अंदर इतना साहस और बल (दमखम) था कि उसने अंग्रेजों की शक्तिशाली फौज को परेशान कर रखा था। यह पंक्ति वज़ीर अली की असाधारण वीरता और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है, जिसे देखकर कर्नल भी हैरान था।
आशय: इस संवाद का आशय है कि आने वाले घोड़े की गति बहुत तेज़ थी। वह घोड़ा इतनी तेज़ी से दौड़ रहा था कि उसके टापों से उठने वाली धूल (गर्द) का गुबार देखकर ऐसा लग रहा था मानो कोई बड़ा काफिला आ रहा हो। लेकिन जब लेफ्टिनेंट ध्यान से देखता है, तो उसे पता चलता है कि यह धूल सिर्फ एक ही घुड़सवार के कारण है। यह पंक्ति वज़ीर अली के आने की नाटकीयता और उसकी असाधारण घुड़सवारी को दर्शाती है।
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वज़ीर अली को उसके पद से इसलिए हटाया गया क्योंकि वह अंग्रेजों के प्रभाव को पसंद नहीं करता था और उसने अपनी हुकूमत के दौरान अवध से अंग्रेजी असर को खत्म करने की कोशिश की। यह बात कंपनी सरकार को पसंद नहीं आई, इसलिए उन्होंने वज़ीर अली के दुश्मन और चाचा सआदत अली के साथ मिलकर उसे पद से हटा दिया।
कर्नल दुश्मन होते हुए भी वज़ीर अली से प्रभावित था क्योंकि वह उसकी बहादुरी, निडरता और चतुराई का कायल था। वज़ीर अली का अकेले ही खेमे में आकर कारतूस ले जाना और अपना नाम बताकर चले जाना जैसी घटनाएँ कर्नल को हैरान कर देती थीं और वह मन ही मन उसकी हिम्मत की प्रशंसा करता था।
"एक जाँबाज़" शब्द कर्नल ने वज़ीर अली के लिए प्रयोग किया है। उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वज़ीर अली ने अकेले ही उसके खेमे में घुसकर, उसे धोखा देकर कारतूस हासिल किए और अपनी जान की बाज़ी लगाकर यह कारनामा कर दिखाया। इस असाधारण साहस को देखकर कर्नल के मुँह से अनायास ही यह शब्द निकल पड़े।
पाठ के अंत में कर्नल इसलिए हक्का-बक्का रह गया क्योंकि जिस सवार को वह वज़ीर अली को पकड़ने में मदद करने वाला एक आम सिपाही समझ रहा था, वह स्वयं वज़ीर अली निकला। वज़ीर अली ने न केवल उसे धोखा दिया, बल्कि उसकी जान भी बख्श दी, जो कर्नल के लिए एक अविश्वसनीय और स्तब्ध कर देने वाली घटना थी।
लेफ्टिनेंट कर्नल का एक अधीनस्थ और वफादार अधिकारी है। वह जिज्ञासु स्वभाव का है और कर्नल से सवाल पूछकर कहानी को आगे बढ़ाता है। वह वज़ीर अली के बारे में बहुत कम जानता है और कर्नल की बातों से प्रभावित होता है। वह एक सतर्क सिपाही है लेकिन कर्नल जितना अनुभवी नहीं है।
'कारतूस' शीर्षक इस एकांकी के लिए पूरी तरह से सार्थक और सटीक है। पूरी कहानी वज़ीर अली को पकड़ने की योजना के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन कहानी का चरमोत्कर्ष (climax) कारतूसों पर ही आधारित है। वज़ीर अली, जो अंग्रेजों का सबसे बड़ा दुश्मन है, अपनी जान जोखिम में डालकर केवल 'दस कारतूस' लेने के लिए कर्नल के खेमे में आता है। यही कारतूस उसकी बहादुरी, चतुराई और निडरता का प्रतीक बन जाते हैं। यह घटना ही कर्नल को वज़ीर अली को "जाँबाज़" मानने पर मजबूर कर देती है। पूरी एकांकी की सबसे प्रभावशाली और नाटकीय घटना कारतूस मांगने और ले जाने की ही है। अतः यह शीर्षक कहानी के केंद्रीय भाव को सफलतापूर्वक व्यक्त करता है।
वज़ीर अली 'कारतूस' एकांकी का नायक है और उसका चरित्र देशभक्ति और वीरता से ओत-प्रोत है। उसकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- साहसी और वीर: वह एक बहादुर योद्धा है जो अंग्रेजों की विशाल सेना से डरता नहीं है।
- स्वाभिमानी: जब बनारस में वकील उसकी बेइज़्ज़ती करता है तो वह इसे बर्दाश्त नहीं कर पाता और उसका कत्ल कर देता है।
- चतुर और बुद्धिमान: वह बड़ी चतुराई से कर्नल के खेमे में घुसता है और उसे धोखा देकर कारतूस हासिल कर लेता है।
- देशभक्त: उसका एकमात्र लक्ष्य अंग्रेजों को हिंदुस्तान से बाहर निकालना है। इसके लिए वह अफगानिस्तान के बादशाह से भी मदद माँगता है।
- निडर: वह मौत के सामने भी नहीं डरता। कर्नल के सामने अपना असली नाम बताना उसकी निडरता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
संक्षेप में, वज़ीर अली एक ऐसा नायक है जो अपनी मातृभूमि की आज़ादी के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
यह संवाद सवार, यानी वज़ीर अली के आगमन के नाटकीय दृश्य को प्रस्तुत करता है। इस संवाद से उसकी मनःस्थिति और उद्देश्य का पता चलता है:
- उद्देश्य की स्पष्टता: घोड़े को इतनी तेज़ दौड़ाना यह दिखाता है कि सवार के मन में अपने लक्ष्य को लेकर कोई संदेह नहीं है। वह जल्दी से जल्दी कर्नल के खेमे तक पहुँचना चाहता है। उसका उद्देश्य स्पष्ट है: कारतूस हासिल करना।
- आत्मविश्वास और निडरता: अकेले होते हुए भी इतनी धूल उड़ाते हुए आना उसके आत्मविश्वास को दर्शाता है। उसे पकड़े जाने का डर नहीं है, बल्कि वह एक विजेता की तरह प्रवेश कर रहा है।
- समय का महत्व: उसकी गति बताती है कि वह समय बर्बाद नहीं करना चाहता। उसे पता है कि उसका मिशन खतरनाक है और उसे जल्दी पूरा करके निकलना होगा।
यह दृश्य वज़ीर अली के चरित्र को स्थापित करता है - वह जो भी करता है, पूरे निश्चय और बहादुरी के साथ करता है।
Common Mistakes to Avoid
Exam Preparation Tips for 2026-27
Frequently Asked Questions (FAQs)
पाठ 14, 'कारतूस' में महारत हासिल करें 🌍
'कारतूस' सिर्फ एक कहानी से कहीं बढ़कर है; यह भारत के शुरुआती स्वतंत्रता सेनानियों की भावना की एक झलक है। वज़ीर अली के चरित्र को समझने से न केवल आपको अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद मिलेगी बल्कि आपमें गर्व की भावना भी भरेगी।
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