NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 10: ताताँरा-वामीरो कथा
Welcome, students! This guide will help you master CBSE Class 10 Hindi Sparsh Chapter 10, "ताताँरा-वामीरो कथा" (Tantara-Vamiro Katha). We'll explore the beautiful yet tragic love story, its powerful message against outdated traditions, and cover all NCERT solutions and important board exam questions for CBSE Board Exams 2026-27.
Chapter at a Glance
Chapter 10: ताताँरा-वामीरो कथा – Quick Reference
| Chapter Name | अध्याय 10 – ताताँरा-वामीरो कथा (Tantara-Vamiro Katha) |
| Author | लीलाधर मंडलोई (Leeladhar Mandloi) |
| Subject | Hindi Course B – Sparsh (स्पर्श भाग 2) |
| Class / Board | CBSE Class 10 |
| Important Topics | प्रेम और त्याग की भावना, सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार, अंडमान-निकोबार की लोककथा, चरित्र-चित्रण |
| Difficulty Level | Moderate |
| Exam Weightage | 3–5 Marks |
Learning Objectives
Understand the plot and theme of the folk tale "Tantara-Vamiro Katha".
Analyze the characters of Tatara and Vamiro.
Explain the story's message about love, sacrifice, and fighting against meaningless social customs.
Confidently answer all NCERT and board exam questions.
Appreciate the cultural heritage of the Andaman and Nicobar Islands.
Key Concepts & Definitions
Full NCERT Solutions for ताताँरा-वामीरो कथा (Updated 2026-27)
ताताँरा-वामीरो कथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की एक प्रसिद्ध लोककथा है। यह कथा लिटिल अंडमान और कार-निकोबार द्वीपों से जुड़ी है।
वामीरो गाते-गाते अचानक समुद्र की एक ऊँची लहर से पूरी तरह भीग गई। इसी हड़बड़ाहट और अचानक हुई घटना के कारण वह अपना गाना भूल गई।
ताताँरा, वामीरो के मधुर गीत से मंत्रमुग्ध हो गया था। उसने वामीरो से याचना की कि वह अपना अधूरा गाना पूरा करे और अगले दिन उसी स्थान पर उससे मिलने आए।
ताताँरा-वामीरो के गाँव की यह रीति थी कि कोई भी विवाह या संबंध अपने गाँव के बाहर किसी दूसरे गाँव के व्यक्ति के साथ नहीं हो सकता था। यह एक कठोर सामाजिक नियम था।
गाँव वालों और वामीरो की माँ द्वारा अपमानित होने पर क्रोध में ताताँरा ने अपनी दैवीय शक्ति वाली लकड़ी की तलवार को पूरी ताकत से धरती में घोंप दिया और द्वीप को चीरते हुए दूर तक खींचता चला गया, जिससे द्वीप दो भागों में बँट गया।
ताताँरा की तलवार के बारे में लोगों का मानना था कि उस लकड़ी की तलवार में अद्भुत दैवीय शक्ति है। वे मानते थे कि ताताँरा अपने सभी साहसिक और चमत्कारी कारनामे इसी तलवार की शक्ति से करता है। हालांकि, किसी ने भी उसे उस तलवार का उपयोग करते हुए नहीं देखा था।
जब ताताँरा ने वामीरो से उसका नाम और गीत पूरा करने को कहा, तो वामीरो ने उसे बेरुखी से जवाब दिया। उसने कहा, "पहले बताओ कि तुम कौन हो और इस तरह मुझे घूर क्यों रहे हो? तुम मेरे प्रश्न का उत्तर देने के बजाय अपने ही प्रश्न क्यों दोहरा रहे हो?"
ताताँरा-वामीरो की त्यागमयी और दुखद मृत्यु के बाद, निकोबार के लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने उस रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ दिया जिसके अनुसार एक गाँव के व्यक्ति का विवाह दूसरे गाँव में नहीं हो सकता था। अब निकोबारी दूसरे गाँवों में भी आपसी वैवाहिक संबंध स्थापित करने लगे।
इस लोककथा के अनुसार, जब ताताँरा को समाज के नियमों के कारण वामीरो से विवाह करने से रोका गया, तो उसने क्रोध में अपनी तलवार को धरती में गाड़कर द्वीप को दो भागों में चीर दिया। एक भाग कार-निकोबार और दूसरा लिटिल अंडमान कहलाया। इस प्रकार, यह कथा इस भौगोलिक घटना को ताताँरा के क्रोध और प्रेम के बलिदान से जोड़ती है।
निकोबारियों का विश्वास है कि प्राचीन काल में लिटिल अंडमान और कार-निकोबार द्वीप आपस में जुड़े हुए थे। उनके विभक्त होने के पीछे ताताँरा-वामीरो की प्रेम कथा है। उनके अनुसार, जब समाज ने ताताँरा और वामीरो के प्रेम को स्वीकार नहीं किया, तो क्रोधित ताताँरा ने अपनी तलवार से धरती पर एक लकीर खींच दी, जिससे द्वीप के दो टुकड़े हो गए। ताताँरा एक टुकड़े पर था और वामीरो दूसरे पर। यह उनके प्रेम के बलिदान का प्रतीक है, जिसके बाद दोनों हमेशा के लिए एक-दूसरे से बिछड़ गए।
'पास' गाँव में पशु पर्व का आयोजन एक पारंपरिक और सामाजिक उत्सव था। यह हष्ट-पुष्ट पशुओं के प्रदर्शन के लिए होता था, जिसमें पुरुष अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते थे। इस पर्व में पशुओं की दौड़, नृत्य, संगीत और भोजन का आयोजन होता था। शाम के समय, लोग नाच-गाकर और पारंपरिक भोजन का आनंद लेकर उत्सव मनाते थे। यह सभी गाँवों के लोगों के लिए एक-दूसरे से मिलने और मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण अवसर था।
यह कथन बिल्कुल सत्य है। रूढ़ियाँ और परंपराएँ समाज को अनुशासित करने और व्यवस्थित रखने के लिए बनाई जाती हैं। लेकिन जब ये परंपराएँ समय के साथ अपनी उपयोगिता खो देती हैं और व्यक्ति की स्वतंत्रता, खुशी और प्रगति में बाधक बनने लगती हैं, तो वे एक बंधन और बोझ बन जाती हैं। ताताँरा-वामीरो कथा में, गाँव के बाहर विवाह न करने की रूढ़ि ने दो प्रेमियों की जान ले ली। ऐसी रूढ़ियाँ जो मानवता और प्रेम से बड़ी हो जाएँ, उनका टूट जाना ही समाज की भलाई के लिए आवश्यक है, ताकि समाज आगे बढ़ सके।
आशय: इस पंक्ति का आशय है कि जब ताताँरा को वामीरो की माँ और गाँव वालों द्वारा अपमानित किया गया और उसे अपने प्रेम को पाने का कोई रास्ता नहीं सूझा, तो वह अत्यंत क्रोधित और असहाय हो गया। अपने उस असहनीय क्रोध को शांत करने के लिए, उसने अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपनी तलवार को धरती में गाड़ दिया और उसे खींचने लगा, जो उसके गहरे दुख, निराशा और विद्रोह का प्रतीक था।
आशय: इस पंक्ति का आशय ताताँरा के मन की आशा और निराशा की मिली-जुली भावना से है। वामीरो से मिलने की उम्मीद उसके लिए एक छोटी सी आशा की किरण की तरह थी। लेकिन उसे यह भी डर था कि जिस तरह सूरज की किरणें समुद्र में डूबकर गायब हो जाती हैं, वैसे ही समाज की रूढ़ियों के कारण उसकी यह आशा भी कभी भी टूट सकती है और हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है।
Extra Board Exam Questions (2026-27)
ताताँरा सुबह से शाम तक कठोर परिश्रम करता था। वह एक नेक और मददगार युवक था। जब भी कोई मुसीबत में होता, वह तुरंत उसकी मदद के लिए पहुँच जाता था। अपने इसी परोपकारी और मिलनसार स्वभाव के कारण वह पूरे द्वीप में सभी का प्रिय था।
पहली मुलाकात में ताताँरा, वामीरो का मधुर गीत सुनकर उसकी ओर आकर्षित हुआ और सुध-बुध खो बैठा। वहीं वामीरो एक अजनबी द्वारा खुद को घूरते देखे जाने पर असहज और थोड़ी क्रोधित थी। लेकिन ताताँरा के विनम्र और बार-बार किए गए अनुरोध के बाद उसका क्रोध भी शांत हो गया।
वामीरो घर पहुँचकर बेचैन थी क्योंकि ताताँरा का व्यक्तित्व उसे आकर्षित कर रहा था, लेकिन साथ ही वह अपने गाँव की परंपरा से भी बंधी हुई थी कि वह किसी दूसरे गाँव के लड़के से प्रेम नहीं कर सकती। इस आंतरिक संघर्ष और ताताँरा से दोबारा मिलने की व्याकुलता के कारण वह बेचैन थी।
पशु पर्व में जब वामीरो ताताँरा को देखकर रोने लगी, तो उसकी माँ को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने ताताँरा को गाँव वालों के सामने खूब भला-बुरा कहा और अपमानित किया। इसका मुख्य कारण यह था कि ताताँरा दूसरे गाँव का था और उनकी बेटी उसके कारण अपनी मान-मर्यादा भूल रही थी, जो गाँव की रीति के विरुद्ध था।
लेखक ने इस कथा को 'त्यागमयी' इसलिए कहा है क्योंकि इसमें ताताँरा और वामीरो दोनों ने अपने प्रेम के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। उनके इस त्याग ने समाज को एक नई दिशा दी और एक कठोर रूढ़ि को तोड़ने पर मजबूर कर दिया, जिससे आने वाली पीढ़ियों का जीवन सुधर सका।
यदि मैं ताताँरा और वामीरो की दुखद घटना का साक्षी होता, तो मेरा हृदय करुणा और क्रोध से भर जाता। मैं यह देखकर व्यथित हो जाता कि कैसे समाज की एक निरर्थक परंपरा ने दो निर्दोष प्रेमियों की जान ले ली। इस घटना के बाद, मैं चुप नहीं बैठता। मैं अपने गाँव के युवाओं और बड़ों को एकत्रित करता और उन्हें समझाता कि प्रेम और मानवता किसी भी परंपरा से बड़े हैं। मैं तर्क देता कि जो रीति-रिवाज खुशियाँ छीन लें और दुःख का कारण बनें, उन्हें बदल देना ही उचित है। मैं ताताँरा-वामीरो के बलिदान को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करता ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी पीड़ा से न गुजरना पड़े। मेरा लक्ष्य होता कि हमारा समाज प्रेम और आपसी समझ को महत्व दे, न कि खोखली रूढ़ियों को।
ताताँरा "ताताँरा-वामीरो कथा" का मुख्य नायक है, जो अपने गुणों के कारण पूरे द्वीप में प्रसिद्ध है।
- व्यक्तित्व: वह एक सुंदर, शक्तिशाली और आकर्षक युवक है।
- स्वभाव: उसका स्वभाव अत्यंत नेक, मददगार और परोपकारी है। वह सभी की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता है, जिस कारण लोग उसका बहुत आदर करते हैं।
- प्रेमी के रूप में: वह एक सच्चा और गहरा प्रेम करने वाला व्यक्ति है। वह वामीरो के प्रेम को पाने के लिए समाज के हर नियम का सामना करने को तैयार है।
- विद्रोही स्वभाव: जब समाज उसके प्रेम को स्वीकार नहीं करता और उसे अपमानित करता है, तो उसका विद्रोही रूप सामने आता है। उसका क्रोध विनाशकारी साबित होता है और द्वीप के दो टुकड़े हो जाते हैं।
संक्षेप में, ताताँरा शक्ति, प्रेम, सेवा और त्याग का प्रतीक है।
"परिवर्तन ही जीवन का नियम है" - यह कथन 'ताताँरा-वामीरो कथा' के संदर्भ में पूरी तरह सार्थक है। कहानी में निकोबारी समाज एक कठोर रूढ़ि से जकड़ा हुआ था, जिसके अनुसार विवाह केवल अपने ही गाँव में हो सकता था। यह नियम समय के साथ अपनी प्रासंगिकता खो चुका था और अब लोगों के लिए बंधन बन गया था।
ताताँरा और वामीरो ने इस नियम को तोड़ने का साहस किया, लेकिन समाज ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। उनके प्रेम और बलिदान ने समाज को झकझोर कर रख दिया। उनकी मृत्यु के बाद लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने इस निरर्थक परंपरा को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। यह दिखाता है कि जब कोई परंपरा या नियम मनुष्य की भलाई के रास्ते में आता है, तो उसमें परिवर्तन आवश्यक हो जाता है। ताताँरा-वामीरो का त्याग उस बड़े सामाजिक परिवर्तन का कारण बना, जो जीवन के विकास के लिए अनिवार्य है।
Common Mistakes to Avoid
Exam Preparation Tips for 2026-27
Frequently Asked Questions (FAQs)
Master ताताँरा-वामीरो कथा 🌍
The story of "ताताँरा-वामीरो कथा" is not just a simple love story; it’s a powerful lesson on sacrifice, social reform, and the triumph of love. We hope these updated NCERT Solutions, important questions, and tips help you prepare thoroughly for your CBSE Class 10 board exams 2026-27.
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