CBSE 2026-27 | क्षितिज भाग 2

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7: छाया मत छूना

📚 Class 10 CBSE 🌍 Hindi – Kshitij ⚡ 3–5 Marks 🔵 Moderate

Welcome, students! This guide provides detailed NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 7, "छाया मत छूना". We will explore the poem's deep meaning and tackle important questions. Mastering this chapter is crucial for scoring well in your CBSE board exams and understanding life's philosophy.

📋Chapter at a Glance

📚

Chapter 7: छाया मत छूना – Quick Reference

Chapter Nameअध्याय 7 – छाया मत छूना (Chhaya Mat Chhoona)
Poetगिरिजाकुमार माथुर (Girijakumar Mathur)
SubjectHindi Course A – Kshitij (क्षितिज भाग 2)
Class / BoardClass 10 / CBSE
Target Year2026-27
Important TopicsThe pain of nostalgia, living in the present, the illusion of past glory (मृगतृष्णा), accepting harsh reality (यथार्थ).
Difficulty LevelModerate (The philosophical theme requires careful understanding)
Exam Weightage3–5 Marks (Expect questions in extracts and short/long answer formats)

📊मुख्य अवधारणाएँ – Key Ideas

🌂
छाया
पुरानी यादें
🛠
यथार्थ
कठिन सच्चाई
😢😢
दुना दुख
दोगुना दुख
🌵
मृगतृष्णा
झूठा छलावा
🌙
चंद्रिका
सुख के पल
🌑
रात कृष्णा
दुख के पल

🎯Learning Objectives

1

Understand the central message of the poem "छाया मत छूना".

2

Explain the poet's advice to not dwell on past memories.

3

Define and use key terms like 'छाया', 'यथार्थ', 'दुना दुख', and 'मृगतृष्णा'.

4

Analyze the poetic devices and metaphors used by Girijakumar Mathur.

5

Confidently answer all NCERT exercise questions and important board exam questions.

💡Key Concepts & Definitions

छाया (Chhaya)
In this poem, 'छाया' doesn't mean a literal shadow. It refers to the sweet memories of the past, past glories, and achievements. The poet calls them 'shadows' because they are not the present reality.
दुना दुख (Duna Dukh)
This means "double sorrow". The poet says that when we are sad and remember happy moments from the past, our current sorrow doubles.
यथार्थ (Yatharth)
This means the harsh reality of the present. The poet advises us to accept and face this reality instead of escaping into the past.
मृगतृष्णा (Mrigtrishna)
Literally means a "mirage". In the poem, it refers to the useless chase for fame, wealth, and greatness (प्रभुता), which are ultimately illusions just like a mirage in a desert.
हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है
This beautiful line means that behind every moonlit, happy night (सुख), there is a dark, sad night hidden (दुख). It signifies that happiness and sorrow are two sides of the same coin.
रस-बसंत (Ras-Basant)
Refers to the vibrant and happy moments of spring in one's life.

📝Full NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7

📌 प्रश्न-अभ्यास
✅ Model Answer

कवि गिरिजाकुमार माथुर ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात इसलिए कही है क्योंकि यही जीवन का सत्य है।

  • वर्तमान ही सत्य है: भूतकाल की सुखद यादें एक भ्रम की तरह होती हैं, जो हमें वर्तमान के दुखों से दूर नहीं ले जा सकतीं।
  • यादें दुख बढ़ाती हैं: जब हम वर्तमान में दुखी होते हैं और अतीत के सुख को याद करते हैं, तो हमारा दुख कम होने की बजाय और भी बढ़ जाता है (दुना दुख)।
  • भविष्य का निर्माण: यथार्थ को स्वीकार करके ही हम अपने वर्तमान को सुधार सकते हैं और एक बेहतर भविष्य की नींव रख सकते हैं। यथार्थ से भागना कायरता है और उसका सामना करना ही बुद्धिमानी है।
✅ Model Answer

इन पंक्तियों का भाव यह है:

  • प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है: इसका अर्थ है कि बड़प्पन, प्रसिद्धि और धन-दौलत का एहसास केवल एक छलावा (मृगतृष्णा) है। इंसान पूरी जिंदगी इनके पीछे भागता रहता है, लेकिन यह उसे कभी सच्ची संतुष्टि नहीं देते। यह वैसे ही है जैसे रेगिस्तान में प्यासा हिरण पानी की तलाश में चमकती रेत के पीछे भागता है।
  • हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है: इसका अर्थ है कि जीवन में सुख और दुख का चक्र हमेशा चलता रहता है। हर चाँदनी रात (सुख) के पीछे एक काली रात (दुख) छिपी होती है। इसलिए, हमें सुख में बहुत अधिक उत्साहित और दुख में बहुत अधिक निराश नहीं होना चाहिए।
✅ Model Answer
  1. 'छाया' का संदर्भ: कविता में 'छाया' शब्द अतीत की सुखद स्मृतियों, पुरानी यादों, और बीते हुए गौरवशाली पलों के संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है। यह हमारे मन का एक भ्रम है, जो अब वास्तविक नहीं है।
  2. छूने से मना करने का कारण: कवि ने 'छाया' को छूने अर्थात् पुरानी यादों में खो जाने से इसलिए मना किया है क्योंकि:
    • यह वर्तमान के दुख को दोगुना कर देता है।
    • यह हमें यथार्थ का सामना करने से रोकता है और कमजोर बनाता है।
    • बीते हुए सुख को याद करके वर्तमान का दुख और भी गहरा महसूस होता है। इसलिए, कवि वर्तमान में जीने की सलाह देते हैं।
✅ Model Answer

कविता में विशेषण के प्रयोग से आए अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • दुना दुख: यहाँ 'दुना' विशेषण 'दुख' की तीव्रता को बढ़ा रहा है। यह सामान्य दुख नहीं, बल्कि दोगुना दुख है जो अतीत को याद करने से होता है।
  • जीवित क्षण: यहाँ 'जीवित' विशेषण 'क्षण' को बहुत मूल्यवान बना रहा है। इसका अर्थ है वर्तमान का वह पल जिसमें हम जी रहे हैं, जो वास्तविक है।
  • सुरंग-सुधियाँ: 'सुधियाँ' (यादें) के साथ 'सुरंग' (रंग-बिरंगी) विशेषण लगाने से यादों के सुंदर और मनमोहक होने का भाव प्रकट होता है।
  • रस-बसंत: 'बसंत' के साथ 'रस' विशेषण लगाने से जीवन के सुखद और आनंदमय समय का चित्र उभरता है।
  • एक रात कृष्णा: यहाँ 'कृष्णा' (काली) विशेषण 'रात' के अंधकार, दुख और निराशा को दर्शाता है।
✅ Model Answer
  • 'मृगतृष्णा' का शाब्दिक अर्थ: रेगिस्तान में गर्मी के कारण रेत पर पानी होने का जो भ्रम पैदा होता है, उसे मृगतृष्णा कहते हैं। प्यासा हिरण उसे पानी समझकर उसके पीछे भागता है, पर उसे पानी कभी नहीं मिलता।
  • कविता में प्रयोग: कविता में 'मृगतृष्णा' का प्रयोग धन, मान, सम्मान, और बड़प्पन (प्रभुता) के पीछे भागने के अर्थ में हुआ है। कवि कहते हैं कि इंसान इन चीजों के पीछे भागकर भी कभी संतुष्ट नहीं हो पाता, यह सब एक छलावा मात्र है।
✅ Model Answer

यह भाव कविता की निम्नलिखित पंक्ति में स्पष्ट रूप से झलकता है:
"जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण।"

इस पंक्ति का अर्थ है कि जो तुम्हें जीवन में नहीं मिल सका, उसे भूल जाओ और अपने आने वाले कल (भविष्य) को बेहतर बनाने का प्रयास करो। यह पंक्ति अतीत को भूलकर वर्तमान में जीते हुए भविष्य को संवारने की प्रेरणा देती है।

✅ Model Answer

कविता के अनुसार मनुष्य के दुखों के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. अतीत की यादें: अपने अतीत के सुखद पलों को याद करना वर्तमान के दुख को और बढ़ा देता है।
  2. प्रभुता की चाह: मान-सम्मान, धन और बड़प्पन के पीछे भागना भी दुख का कारण है क्योंकि यह एक मृगतृष्णा है जो कभी पूरी नहीं होती।
  3. यथार्थ को स्वीकार न करना: वर्तमान की कठिन सच्चाइयों से मुँह मोड़ना और कल्पनाओं में जीना दुख को बढ़ाता है।
  4. सही समय पर सही अवसर न मिलना: कविता में कहा गया है, "समय पर मिल न सकी, दुखी है मन"। इसका अर्थ है कि जब मनचाही वस्तु समय पर नहीं मिलती तो मन दुखी हो जाता है।

🚀Extra Important Questions (Board Exam Style 2026-27)

📌 Multiple Choice Questions (MCQs) - (1 Mark)
Difficulty: Easy
Q1. कविता 'छाया मत छूना' में 'छाया' किसका प्रतीक है?
✅ उत्तर: (ग) पुरानी मीठी यादें
Difficulty: Easy
Q2. कवि के अनुसार जीवन में क्या चीज़ हमेशा साथ चलती है?
✅ उत्तर: (ख) सुख और दुख
Difficulty: Medium
Q3. 'मृगतृष्णा' का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
✅ उत्तर: (ग) झूठा बड़प्पन और छलावा
Difficulty: Easy
Q4. कवि वर्तमान के किस रूप को पूजने की बात कहते हैं?
✅ उत्तर: (ख) कठिन यथार्थ
Difficulty: Hard
Q5. 'रस-बसंत' बीत जाने पर क्या शेष रह जाता है?
✅ उत्तर: (घ) केवल फूलों की गंध (कविता की पंक्ति 'फूल न खिला तो क्या, रस-बसंत जाने पर गंध तो रही' के अनुसार)
📌 Short Answer Questions (2-3 Marks)
✅ Model Answer

उत्तर: 'दुना दुख' का अर्थ है दुख का दोगुना हो जाना। कवि के अनुसार, यह तब होता है जब व्यक्ति अपने वर्तमान के दुखों से परेशान होकर अतीत के सुखद पलों को याद करने लगता है। अतीत का सुख और वर्तमान का दुख मिलकर उसके कष्ट को और भी बढ़ा देते हैं।

✅ Model Answer

उत्तर: कवि ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि वर्तमान की कठोर सच्चाई ही जीवन का वास्तविक सत्य है। अतीत की यादों में जीने से कोई लाभ नहीं होता। हमें वर्तमान की चुनौतियों का डटकर सामना करना चाहिए ताकि हम अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकें। यथार्थ को स्वीकार करना ही साहस है।

✅ Model Answer

उत्तर: कविता में 'शरद-रात' (चाँदनी रात) और 'बसंत' दोनों ही जीवन के सुखद, सुंदर और आनंदमय समय के प्रतीक हैं। ये उन खुशियों भरे पलों को दर्शाते हैं जो बीत चुके हैं और अब केवल यादों के रूप में शेष हैं।

✅ Model Answer

उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि यदि सही समय पर सफलता या खुशी नहीं मिली, तो उसके लिए दुखी नहीं होना चाहिए। यदि जीवन रूपी बसंत बीत जाने पर भी फूल (सफलता) नहीं खिला, तो भी उसकी यादों की सुगंध हमारे साथ रहती है। हमें उसी के सहारे आगे बढ़ना चाहिए, न कि उस पर शोक मनाना चाहिए।

✅ Model Answer

उत्तर: कविता के अनुसार, मनुष्य की दुविधा का मुख्य कारण यह है कि उसका मन अतीत की सुखद यादों और वर्तमान की कठोर सच्चाई के बीच फँसा हुआ है। वह न तो अतीत को पूरी तरह भुला पाता है और न ही वर्तमान को पूरी तरह अपना पाता है। इसी कश्मकश में उसका दुख बढ़ता जाता है।

📌 Long Answer Questions (5 Marks)
✅ Model Answer

उत्तर: 'छाया मत छूना' शीर्षक कविता के मूल भाव को पूरी तरह से व्यक्त करता है। यह शीर्षक अत्यंत सार्थक और सटीक है।

  • प्रतीकात्मक अर्थ: यहाँ 'छाया' का अर्थ बीती हुई सुखद यादें हैं। 'छूना' का अर्थ है उन यादों में खो जाना। कवि सलाह देते हैं कि हमें इन यादों में नहीं डूबना चाहिए।
  • दुख का कारण: कवि स्पष्ट करते हैं कि इन छायाओं को छूने से मन का दुख दोगुना हो जाता है। यह हमें वर्तमान की सच्चाइयों से दूर ले जाकर कमजोर बनाता है।
  • कविता का केंद्रीय संदेश: पूरी कविता इसी एक विचार के इर्द-गिर्द घूमती है कि अतीत से चिपके रहने की बजाय हमें वर्तमान की चुनौतियों को स्वीकार कर भविष्य की ओर देखना चाहिए। शीर्षक 'छाया मत छूना' एक चेतावनी और एक सलाह दोनों है, जो पाठक को जीवन जीने का सही मार्ग दिखाती है। अतः, यह शीर्षक कविता की आत्मा है।
✅ Model Answer

उत्तर: कवि गिरिजाकुमार माथुर इस कविता के माध्यम से जीवन जीने का एक महत्वपूर्ण दार्शनिक संदेश देना चाहते हैं।

  • वर्तमान में जिएं: सबसे प्रमुख संदेश यह है कि मनुष्य को अतीत की स्मृतियों में न उलझकर वर्तमान में जीना चाहिए। बीता हुआ कल वापस नहीं आ सकता।
  • यथार्थ को स्वीकारें: जीवन की कठोर सच्चाइयों से भागना नहीं चाहिए, बल्कि साहसपूर्वक उनका सामना करना चाहिए।
  • सुख-दुख को समान मानें: कवि बताते हैं कि सुख और दुख जीवन के दो पहलू हैं। हमें सुख में अधिक घमंड और दुख में अधिक निराशा नहीं करनी चाहिए।
  • भौतिकता से दूर रहें: धन, दौलत, और यश के पीछे भागना एक मृगतृष्णा की तरह है। सच्ची खुशी भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि मानसिक शांति और संतुष्टि में है।
  • भविष्य का निर्माण करें: जो जीवन में नहीं मिल पाया, उसका शोक मनाने की बजाय उसे भूलकर अपने भविष्य को संवारने का प्रयास करना चाहिए।

इस प्रकार, यह कविता हमें एक सकारात्मक और यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देती है।

📌 Extract-Based Questions (4 Marks)
छाया मत छूना,
मन, होगा दुख दूना।
जीवन में हैं सुरंग-सुधियाँ सुहावनी,
छवियों की चित्र-गंध फैली मनभावनी;
तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,
कुंतल के फूलों की याद बनी चाँदनी।
भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-
छाया मत छूना,
मन, होगा दुख दूना।
✅ Model Answers

प्रश्न (क): कवि किसे छूने से मना कर रहे हैं और क्यों?
उत्तर: कवि 'छाया' अर्थात अतीत की सुखद स्मृतियों को छूने (याद करने) से मना कर रहे हैं, क्योंकि ऐसा करने से वर्तमान का दुख दोगुना हो जाएगा।

प्रश्न (ख): 'सुरंग-सुधियाँ सुहावनी' का क्या आशय है?
उत्तर: इसका आशय है कि हमारे जीवन में अतीत की कई रंग-बिरंगी और मन को अच्छी लगने वाली यादें होती हैं।

प्रश्न (ग): 'बीत गई यामिनी' से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: 'बीत गई यामिनी' का तात्पर्य है कि प्रिय के साथ बिताई गई चाँदनी रात (सुखद समय) अब बीत चुकी है और केवल उसकी यादें ही शेष हैं।

प्रश्न (घ): काव्यांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: काव्यांश का मुख्य भाव यह है कि हमें अतीत की सुखद यादों में खोकर अपने वर्तमान के दुख को और नहीं बढ़ाना चाहिए।

दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं,
देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं।
दुख है न चाँद खिला शरद-रात आने पर,
क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण,
छाया मत छूना,
मन, होगा दुख दूना।
✅ Model Answers

प्रश्न (क): 'दुविधा-हत साहस' का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि व्यक्ति का साहस दुविधाओं और असमंजस के कारण नष्ट हो गया है, उसे आगे का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है।

प्रश्न (ख): देह के सुखी होने पर भी मन क्यों दुखी है?
उत्तर: देह के सुखी होने पर भी मन इसलिए दुखी है क्योंकि वह अतीत और वर्तमान के बीच फँसा है। उसे मनचाही वस्तु समय पर नहीं मिली, जिसका दुख उसे सता रहा है।

प्रश्न (ग): कवि क्या भूलकर किसे अपनाने की बात कर रहे हैं?
उत्तर: कवि अतीत में जो कुछ नहीं मिल सका, उसे भूलकर वर्तमान को स्वीकार करते हुए भविष्य को अपनाने (भविष्य वरण) की बात कर रहे हैं।

प्रश्न (घ): 'दुख है न चाँद खिला शरद-रात आने पर' - पंक्ति का प्रतीकार्थ क्या है?
उत्तर: इसका प्रतीकार्थ है कि सही समय (शरद-रात) आने पर भी जब अपेक्षित खुशी (चाँद) नहीं मिलती, तो मन में दुख होता है।

Common Mistakes Students Make

01
🔄
Literal Interpretation
छात्र अक्सर 'छाया' का अर्थ 'परछाई' समझ लेते हैं, जबकि इसका प्रतीकात्मक अर्थ 'पुरानी यादें' है।
02
🔍
Ignoring the Message
केवल शब्दार्थ लिखने की बजाय कविता का गहरा दार्शनिक संदेश समझाना ज़रूरी है। उत्तर में 'वर्तमान में जीने की प्रेरणा' और 'यथार्थ का सामना' जैसे बिंदुओं का उल्लेख अवश्य करें।
03
🗳
Confusing 'मृगतृष्णा' and 'छाया'
'छाया' बीती हुई खुशी है, जबकि 'मृगतृष्णा' भविष्य में मिलने वाले यश और धन का छलावा है। दोनों में अंतर स्पष्ट रखें।
04
💬
Not Quoting Lines
उत्तर लिखते समय कविता की पंक्तियों का उदाहरण देने से उत्तर अधिक प्रभावशाली बनता है और अच्छे अंक मिलते हैं।

📚Exam Preparation Tips for 2026-27

01
📈
Understand the Core Theme
सबसे पहले, कविता के केंद्रीय भाव को समझें: अतीत को भूलकर वर्तमान में जियो।
02
📋
Memorize Key Terms
'छाया', 'यथार्थ', 'दुना दुख', 'मृगतृष्णा' जैसे शब्दों के अर्थ और संदर्भ को याद कर लें।
03
📍
Practice Bhavarth (भावार्थ)
हर काव्यांश का भावार्थ लिखने का अभ्यास करें। इससे आपकी समझ गहरी होगी।
04
Time Management
कविता पर आधारित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त और सटीक होने चाहिए। 3 अंक के प्रश्न के लिए 5-6 मिनट और 5 अंक के प्रश्न के लिए 8-10 मिनट से ज़्यादा न लगाएँ।

🅾Frequently Asked Questions (FAQs)

What is the main message of the poem 'Chhaya Mat Chhoona'?
The main message is to live in the present reality rather than dwelling on past happy memories. The poet advises that clinging to the past ('chhaya') only doubles our present sorrow ('duna dukh').
Who is the poet of 'Chhaya Mat Chhoona'?
The poet of 'छाया मत छूना' is Girijakumar Mathur (गिरिजाकुमार माथुर). He was a prominent writer of modern Hindi literature.
Why does the poet say that remembering happy memories brings more pain?
The poet says this because when we compare our past happiness with our present struggles, the contrast makes our current situation feel even more painful, thus doubling our sorrow.
What is the meaning of 'Mrigtrishna' in the poem?
In the poem, 'Mrigtrishna' (mirage) symbolizes the futile chase for worldly achievements like fame, power, and wealth ('प्रभुता'). The poet suggests that this pursuit is an illusion that never leads to true satisfaction.
How to write good answers for questions from this poem in the board exam?
To write good answers, first explain the literal meaning of the line, then its symbolic meaning in the context of the poem. Always connect your answer to the central theme of living in the present and accepting reality. Using keywords like 'यथार्थ', 'छाया', and 'दुख दूना' will fetch you more marks.

Master छाया मत छूना 🌍

"छाया मत छूना" is not just a chapter in your syllabus; it's a life lesson. It teaches us the art of letting go and finding strength in our present reality. We hope these Updated NCERT Solutions, Important Questions, and preparation tips for CBSE Class 10 Hindi Chapter 7 help you excel in your Board Exam 2026-27. Revise regularly, practice writing the answers, and face your exams with confidence!

⚡ Practice Chapter 7 MCQs Free
← Previous Chapter
Ch 6: यह दंतुरित मुसकान
Next Chapter →
Ch 8: कन्यादान