CBSE 2026-27 | क्षितिज भाग 2

Updated NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 5: उत्साह और अट नहीं रही

📚 Class 10 CBSE 🌍 Hindi – Kshitij ⚡ 4–6 Marks 🔵 Moderate

Welcome, students! This guide provides detailed NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 5, "उत्साह और अट नहीं रही". These beautiful poems by Suryakant Tripathi 'Nirala' are crucial for your board exams. We'll break down every concept and question to help you score full marks. Complete NCERT solutions updated for CBSE Board Exams 2026-27.

📋Chapter at a Glance

📚

Chapter 5: उत्साह और अट नहीं रही – Quick Reference

Chapter NameChapter 5 - उत्साह और अट नहीं रही (Utsah aur At Nahi Rahi)
Poetसूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (Suryakant Tripathi 'Nirala')
SubjectHindi Course A – Kshitij (क्षितिज भाग 2)
Board / ClassCBSE Class 10
Important Topics'उत्साह' - एक आह्वान गीत (An Invocation Song)
बादलों का प्रतीकात्मक अर्थ (Symbolism of Clouds)
'अट नहीं रही' - फागुन की सुंदरता (Beauty of the Spring Season)
प्रकृति का मानवीकरण (Personification of Nature)
Difficulty LevelModerate
Exam Weightage4–6 Marks

📊Key Facts – Important Terms

🌧
Poet
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
💥
Poem 1 (उत्साह)
क्रांति और नवजीवन
🌷
Poem 2 (अट नहीं रही)
फागुन की सुंदरता
👤
Literary Device
मानवीकरण (Personification)
🎤
Literary Era
छायावाद
Verse Style
मुक्त छंद (Free Verse)

🎯Learning Objectives

1

Understand the central idea (भावार्थ) of both poems, 'उत्साह' and 'अट नहीं रही'.

2

Explain the symbolic meaning of clouds as a source of both revolution and new life.

3

Describe the overwhelming beauty of the 'Phagun' (spring) season as depicted by the poet.

4

Identify literary devices like personification (मानवीकरण) and sound imagery (नाद-सौंदर्य).

5

Analyze the unique style of poet Suryakant Tripathi 'Nirala'.

6

Confidently answer all CBSE Class 10 Hindi Course A – Kshitij (क्षितिज भाग 2) Chapter 5 questions.

💡Key Concepts & Definitions

आह्वान गीत (Aahvan Geet)
An invocation or a summoning song. The poem 'उत्साह' is an 'Aahvan Geet' where the poet is calling upon the clouds.
उत्साह (Utsah)
Means 'enthusiasm' or 'zeal'. The poem's title reflects the revolutionary energy the poet wants to evoke through the clouds.
ललित कल्पना (Lalit Kalpana)
Means beautiful imagination. The poet describes the clouds as a product of a child's beautiful imagination.
वज्र (Vajra)
A thunderbolt. The poet says that the clouds hide the power of a thunderbolt, symbolizing immense revolutionary energy.
Revolution
नवजीवन (Navjivan)
New life. Clouds bring rain, which gives new life to thirsty and withered plants and people.
फागुन (Phagun)
A month in the Hindu calendar corresponding to February-March, representing the peak of the spring season.
अट नहीं रही (At Nahi Rahi)
A phrase meaning 'unable to be contained' or 'overflowing'. Used to describe how the beauty of spring is so vast.
मानवीकरण (Manvikaran)
Personification. The poet gives human-like qualities to nature, for example, when he says the Phagun month 'breathes' ('साँस लेते हो').

📝Full NCERT Solutions for Utsah aur At Nahi Rahi

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास (उत्साह)

✅ Model Answer

कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए इसलिए कहता है क्योंकि ‘गरजना’ क्रांति, बदलाव और विद्रोह का प्रतीक है। कवि समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहता है और इसके लिए उसे कोमलता या मृदुता की नहीं, बल्कि उत्साह और संघर्ष की आवश्यकता महसूस होती है।

  • क्रांति का आह्वान: बादलों की गर्जना लोगों के मन में सोई हुई क्रांति की भावना को जगा सकती है।
  • नवचेतना का संचार: गर्जना से एक नई चेतना और जोश का संचार होता है, जो सामाजिक परिवर्तन के लिए आवश्यक है।
  • विनाश में सृजन: कवि का मानना है कि पुराने और जर्जर विचारों को हटाने के लिए विध्वंस (destruction) भी जरूरी है, जिसके बाद ही नए सृजन (creation) का मार्ग खुलता है। बादल की गर्जना इसी विध्वंस का प्रतीक है।
✅ Model Answer

इस कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ बिल्कुल उपयुक्त है। यह शीर्षक कविता के मूल भाव को पूरी तरह व्यक्त करता है।

  • ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत: बादल अपनी गर्जना और वर्षा से न केवल गर्मी से तपती धरती को शीतलता प्रदान करते हैं, बल्कि लोगों के मन में उत्साह और आशा का संचार भी करते हैं।
  • क्रांति का प्रतीक: कविता में बादल को क्रांति और परिवर्तन लाने वाले एक नायक के रूप में दिखाया गया है। यह क्रांति बिना उत्साह और जोश के संभव नहीं है।
  • कवि की अपील: कवि बादलों के माध्यम से समाज में निराशा और आलस्य को दूर कर एक नए उत्साह का आह्वान करता है। इसलिए, यह शीर्षक कविता की केंद्रीय भावना को दर्शाता है।
✅ Model Answer

कविता में बादल निम्नलिखित अर्थों की ओर संकेत करता है:

  1. पीड़ित-प्यासे जन की आकांक्षा पूरी करने वाला: बादल बरसकर गर्मी से परेशान लोगों की प्यास बुझाता है और उन्हें शांति प्रदान करता है।
  2. नई कल्पना और नए अंकुर के लिए विध्वंस, विप्लव और क्रांति चेतना को संभव करने वाला: बादल की गर्जना और मूसलाधार वर्षा पुरानी और सूखी हुई चीजों को नष्ट कर नई सृष्टि के लिए जमीन तैयार करती है। यह समाज में क्रांति का प्रतीक है।
  3. नवजीवन और उत्साह का प्रतीक: वर्षा के बाद धरती पर नया जीवन अंकुरित होता है। इसी तरह, बादल लोगों के मन में नया जीवन और उत्साह भरने वाला है।
✅ Model Answer

'उत्साह' कविता में नाद-सौंदर्य (sound imagery) वाले शब्द निम्नलिखित हैं:

  • घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!
  • ललित ललित, काले घुंघराले,
  • बाल कल्पना के-से पाले,
  • विद्युत-छवि उर में,
  • विकल विकल, उन्मन थे उन्मन।

इन शब्दों और पंक्तियों की पुनरावृत्ति (repetition) और ध्वनि से बादलों के गरजने और घिर आने का दृश्य सजीव हो उठता है।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास (अट नहीं रही है)

✅ Model Answer

निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है कि कविता में अंतर्मन के भावों का बाहरी दुनिया से सामंजस्य बिठाया गया है:

  • "आभा फागुन की तन, सट नहीं रही है।": यहाँ फागुन की सुंदरता इतनी अधिक है कि वह प्रकृति के शरीर में समा नहीं पा रही है। यह कवि के मन में उमड़ रहे आनंद और उल्लास को व्यक्त करता है जो उसके अंदर समा नहीं पा रहा है।
  • "कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो,
    उड़ने को नभ में तुम, पर-पर कर देते हो।"
    : यहाँ फागुन को सांस लेते हुए दिखाया गया है, जिससे पूरा वातावरण सुगंधित हो जाता है। यह सुगंध लोगों के मन को कल्पना के पंख लगाकर अनंत आकाश में उड़ने के लिए प्रेरित करती है।
  • "आँख हटाता हूँ तो, हट नहीं रही है।": कवि फागुन की सुंदरता से इतना अभिभूत है कि वह चाहकर भी अपनी आँखें उससे हटा नहीं पा रहा है। यह प्रकृति के प्रति उसके गहरे लगाव और आकर्षण को दर्शाता है।
✅ Model Answer

कवि की आँख फागुन की सुंदरता से इसलिए नहीं हट रही है क्योंकि इस मौसम में प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम पर होता है।

  • चारों ओर हरे-भरे पेड़ और उन पर लगे लाल-हरे पत्ते मन को मोह लेते हैं।
  • जगह-जगह खिले रंग-बिरंगे फूल वातावरण को सुगंधित कर देते हैं।
  • प्रकृति की यह शोभा इतनी व्यापक और मनमोहक है कि कवि को लगता है जैसे फागुन की सुंदरता सब जगह छलक रही है। इस असीम सौंदर्य को देखकर कवि मंत्रमुग्ध हो जाता है और चाहकर भी अपनी नज़रें नहीं हटा पाता।
✅ Model Answer

कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन निम्नलिखित रूपों में किया है:

  1. पेड़ों पर प्रभाव: फागुन के आने से पेड़ों की डालियाँ नए-नए पत्तों से लद गई हैं, कहीं हरी तो कहीं लाल।
  2. फूलों का प्रभाव: पेड़ों के गले में मंद-मंद सुगंध वाले फूलों की मालाएँ पड़ी हुई प्रतीत होती हैं।
  3. व्यापकता: फागुन की सुंदरता सर्वव्यापी है। वह 'घर-घर' में और हर जगह फैली हुई है। कवि कहता है "पाट-पाट शोभा-श्री पट नहीं रही है", अर्थात जगह-जगह सौंदर्य इतना अधिक है कि वह समा नहीं पा रहा है।
  4. मन पर प्रभाव: फागुन का सौंदर्य मन को कल्पना के पंख लगाकर आकाश में उड़ने को विवश कर देता है।
✅ Model Answer

फागुन का महीना वसंत ऋतु का चरम होता है। इस समय प्रकृति में होने वाले बदलाव उसे बाकी ऋतुओं से भिन्न बनाते हैं:

  • इस मौसम में न अधिक सर्दी होती है और न अधिक गर्मी। मौसम बहुत सुहावना होता है।
  • पेड़-पौधे नए पत्तों और रंग-बिरंगे फूलों से लद जाते हैं, जबकि अन्य ऋतुओं में ऐसा नहीं होता (जैसे पतझड़ में पत्ते झड़ जाते हैं)।
  • हवा में फूलों की मनमोहक सुगंध फैली रहती है।
  • यह मौसम सभी प्राणियों के मन में उल्लास और उमंग भर देता है, जो अन्य ऋतुओं में कम देखने को मिलता है।
✅ Model Answer

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ इन कविताओं के आधार पर इस प्रकार हैं:

  1. प्रतीकात्मकता: निराला जी ने अपनी कविताओं में प्रतीकों का बहुत सुंदर प्रयोग किया है। 'उत्साह' में बादल क्रांति और नवजीवन का प्रतीक है।
  2. प्रकृति चित्रण: वे प्रकृति के कुशल चितेरे हैं। 'अट नहीं रही है' कविता में उन्होंने फागुन का अत्यंत सजीव और मनमोहक वर्णन किया है।
  3. मानवीकरण अलंकार का प्रयोग: निराला जी ने प्रकृति को मानवीय क्रियाएँ करते हुए दिखाया है, जैसे फागुन का साँस लेना, बादलों का बच्चों की तरह कल्पना से बना होना आदि।
  4. सरल और तत्सम शब्दों का मेल: उनकी भाषा में संस्कृत के तत्सम शब्द (जैसे- विद्युत-छवि, उन्मन, शोभा-श्री) और सरल, आम बोलचाल के शब्द दोनों का सुंदर संतुलन है।
  5. मुक्त छंद: निराला जी को 'मुक्त छंद' का प्रवर्तक माना जाता है। उनकी कविताओं में छंद का बंधन नहीं होता, जिससे भावों की अभिव्यक्ति अधिक सहज हो जाती है।
  6. नाद-सौंदर्य: 'घेर घेर घोर गगन' जैसी पंक्तियों में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा कर वे कविता को संगीतमय बना देते हैं।

🚀Extra Important Questions for Board Exam 2026-27

📌 Multiple Choice Questions (MCQs)
Q1. 'उत्साह' कविता में कवि ने किसे गरजने का आह्वान किया है?
✅ Correct: (ख) बादल को
Explanation: कवि बादलों को गरजकर क्रांति लाने के लिए पुकारता है।
Q2. कवि ने बादलों को किसकी कल्पना के समान बताया है?
✅ Correct: (ख) बच्चों की कल्पना
Explanation: पंक्ति "बाल कल्पना के-से पाले" में यह स्पष्ट है।
Q3. 'अट नहीं रही है' कविता में किस महीने की सुंदरता का वर्णन है?
✅ Correct: (ग) फागुन
Explanation: फागुन (वसंत ऋतु) की सर्वव्यापी सुंदरता का वर्णन है।
Q4. "उर में विद्युत-छवि" का क्या अर्थ है?
✅ Correct: (ख) हृदय में क्रांति की भावना
Explanation: बिजली यहाँ शक्ति और क्रांति का प्रतीक है।
📌 Short Answer Questions (2-3 Marks)
✅ Model Answer

इसे 'आह्वान गीत' इसलिए कहा गया है क्योंकि इसमें कवि बादलों का आह्वान करता है, यानी उन्हें पुकारता है। वह बादलों से केवल बरसने के लिए नहीं, बल्कि गरज-गरज कर समाज में व्याप्त निराशा को दूर करने और एक नई क्रांति व चेतना लाने का आह्वान करता है।

✅ Model Answer

इस पंक्ति से कवि की मंत्रमुग्ध और विवशतापूर्ण मनोदशा का पता चलता है। फागुन का सौंदर्य इतना आकर्षक और असीम है कि कवि उससे अभिभूत है। वह अपनी आँखें हटाना चाहता है ताकि अन्य काम कर सके, लेकिन प्रकृति का सम्मोहन उसे ऐसा करने से रोक देता है। यह प्रकृति के प्रति उसके गहरे अनुराग को दर्शाता है।

✅ Model Answer

'उत्साह' कविता में बादलों के दो रूप हैं:

  1. सृजनकारी रूप: बादल वर्षा करके प्यासे लोगों की प्यास बुझाते हैं और सूखी धरती को नया जीवन देते हैं।
  2. विध्वंसकारी/क्रांतिकारी रूप: बादल अपने भीतर बिजली और गर्जना की शक्ति छिपाए हुए हैं, जो क्रांति और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है।
📌 Long Answer Questions (4-5 Marks)
✅ Model Answer

'उत्साह' और 'अट नहीं रही है' दोनों ही कविताएँ प्रकृति पर आधारित हैं, लेकिन उनके सौंदर्य-बोध में स्पष्ट अंतर है:

  • 'उत्साह' का सौंदर्य: इस कविता में सौंदर्य का संबंध ओज, शक्ति और क्रांति से है। यहाँ बादलों का गरजना, उनकी विध्वंसक शक्ति और उसके बाद होने वाला नव-सृजन ही सौंदर्य का स्रोत है। यह एक वीर और क्रांतिकारी सौंदर्य है जो मन में जोश और उत्साह भरता है।
  • 'अट नहीं रही है' का सौंदर्य: इस कविता में सौंदर्य का संबंध माधुर्य, कोमलता और उल्लास से है। यहाँ फागुन की सुंदरता, रंग-बिरंगे फूल, नई पत्तियाँ, और मनमोहक सुगंध सौंदर्य का आधार हैं। यह एक शांत और मन को हरने वाला सौंदर्य है जो आँखों को तृप्ति और मन को कल्पना की उड़ान देता है।

अतः, एक कविता में सौंदर्य 'शक्ति' में है, तो दूसरी में 'कोमलता' में।

✅ Model Answer

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जीवन संघर्षों से भरा था। उन्होंने समाज में व्याप्त असमानता, शोषण और रूढ़ियों को बहुत करीब से देखा था। उनके व्यक्तिगत जीवन में भी अनेक दुःख थे। इन परिस्थितियों का उनकी रचनाओं पर गहरा प्रभाव पड़ा। 'उत्साह' कविता इसका एक सटीक उदाहरण है।

कविता में बादलों को क्रांति का दूत बताया गया है। कवि बादलों से गरजने का आह्वान करता है ताकि सोए हुए और निराश लोग जाग उठें और समाज में परिवर्तन लाएं। यह आह्वान वास्तव में निराला जी के अपने क्रांतिकारी विचारों का प्रतिबिंब है। वे समाज की जर्जर व्यवस्था को बदलकर एक नया, ऊर्जावान समाज बनाना चाहते थे। बादल उनके लिए सिर्फ एक प्राकृतिक उपादान नहीं, बल्कि उनकी क्रांतिकारी चेतना का प्रतीक हैं, जो विध्वंस के माध्यम से नव-सृजन करता है।

📌 Extract-Based Questions (4 Marks)
✅ Model Answer

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

कहीं साँस लेते हो,
घर-घर भर देते हो,
उड़ने को नभ में तुम
पर-पर कर देते हो,
आँख हटाता हूँ तो
हट नहीं रही है।

1. 'कहीं साँस लेते हो' - यहाँ 'तुम' सर्वनाम किसके लिए प्रयोग हुआ है और साँस लेने का क्या अर्थ है?

उत्तर: यहाँ 'तुम' सर्वनाम फागुन महीने के लिए प्रयोग हुआ है। साँस लेने का अर्थ है कि जब फागुन में हवा चलती है, तो वह फूलों की सुगंध से भरकर हर घर को महका देती है।

2. 'घर-घर भर देते हो' - इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि फागुन की सुंदरता और सुगंध किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सर्वव्यापी है। उसकी महक हर घर में, हर कोने में समा गई है, जिससे पूरा वातावरण आनंदित हो गया है।

3. 'पर-पर कर देते हो' का क्या अर्थ है?

उत्तर: 'पर-पर कर देते हो' का अर्थ है 'पंख लगा देना'। कवि कहना चाहता है कि फागुन का मनमोहक वातावरण मन को इतना हल्का और प्रसन्न कर देता है कि वह कल्पना के पंख लगाकर खुले आकाश में उड़ने के लिए आतुर हो उठता है।

4. कवि की आँखें क्यों नहीं हट रही हैं?

उत्तर: कवि की आँखें फागुन की असीम और मनमोहक सुंदरता के कारण नहीं हट रही हैं। वह प्रकृति के इस अद्भुत रूप से इतना प्रभावित है कि वह चाहकर भी अपनी दृष्टि वहां से हटा नहीं पा रहा।

Common Mistakes to Avoid

01
🔄
शाब्दिक अर्थ लिखना
छात्र अक्सर कविताओं का केवल शाब्दिक अर्थ (literal meaning) लिख देते हैं, जबकि परीक्षक भावार्थ (symbolic meaning) चाहता है। 'बादल' का अर्थ सिर्फ पानी बरसाने वाला पिंड नहीं, बल्कि क्रांति का प्रतीक भी है।
02
🔍
दोनों कविताओं को मिला देना
कुछ छात्र 'उत्साह' की क्रांतिकारी भावना को 'अट नहीं रही है' के सौंदर्य वर्णन में मिला देते हैं। याद रखें, एक कविता ओजपूर्ण है और दूसरी माधुर्यपूर्ण।
03
👤
कवि का नाम गलत लिखना
कवि का नाम 'सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'' सही-सही लिखना याद रखें।
04
🎨
अलंकार न पहचानना
मानवीकरण, पुनरुक्ति प्रकाश जैसे अलंकारों को पहचानना और उत्तर में उनका उल्लेख करना आपके अंक बढ़ा सकता है।

📚Exam Preparation Tips for 2026-27

01
📈
भावार्थ पर फोकस करें
'उत्साह' का भाव क्रांति है और 'अट नहीं रही है' का भाव प्रकृति का सौंदर्य है। दोनों कविताओं का केंद्रीय भाव अच्छे से समझें।
02
📋
मुख्य पंक्तियों की व्याख्या
"घेर घेर घोर गगन", "आभा फागुन की तन सट नहीं रही है" जैसी मुख्य पंक्तियों की व्याख्या लिखकर अभ्यास करें।
03
📍
पिछले साल के प्रश्न पत्र देखें
PYQs (Previous Year Questions) से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि बोर्ड परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं।
04
लिखकर अभ्यास करें
हिंदी में लिखने की गति और वर्तनी (spelling) सुधारने के लिए उत्तरों को लिखकर अभ्यास करना बहुत ज़रूरी है।

🅾Frequently Asked Questions (FAQs)

What is the main message of the poem 'Utsah'?
The main message of 'Utsah' is to invoke a spirit of revolution and enthusiasm to bring about social change. The poet uses clouds as a symbol to urge people to break free from despair and create a new, energetic society.
How does the poet describe the beauty of Phagun in 'At Nahi Rahi'?
The poet describes the beauty of Phagun as overwhelming and boundless. He says its radiance ('आभा') cannot be contained. The trees are full of new leaves, flowers are blooming everywhere, and the fragrant air inspires everyone's hearts to soar high with joy.
Who was Suryakant Tripathi 'Nirala'?
Suryakant Tripathi 'Nirala' (1899-1961) was a prominent poet of the Chhayavaad (छायावाद) era of Hindi literature. He was known for his revolutionary ideas, use of free verse (मुक्त छंद), and powerful depiction of nature and human emotions.
Why are clouds compared to 'a child's imagination' (बाल कल्पना) in the poem?
Clouds are compared to a child's imagination because they are constantly changing shape and form, just like a child's thoughts. They are dense, dark, and curly ('काले घुंघराले'), appearing whimsical and creative, much like the imaginative world of a child.

Master उत्साह और अट नहीं रही 🌷

Mastering 'उत्साह और अट नहीं रही' is all about understanding the deep symbolism and appreciating the poetic beauty. We hope these Updated NCERT Solutions and Important Questions help you prepare thoroughly. Consistent practice is the key to scoring high in your Hindi board exam. Good luck!

⚡ Practice Chapter 5 MCQs Free
← Previous Chapter
Ch 4: आत्मकथ्य
Next Chapter →
Ch 6: यह दंतुरित मुसकान