NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 4: आत्मकथ्य
Welcome, students! This guide provides complete NCERT solutions and important questions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 4, 'आत्मकथ्य' (Aatmkathya). Understand Jaishankar Prasad's deep emotions and poetic style to score full marks in your CBSE 2026-27 board exams. This chapter is key for building analytical skills.
Chapter at a Glance
Chapter 4: आत्मकथ्य – Quick Reference
| Chapter Name | आत्मकथ्य (Aatmkathya) |
| Author | जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad) |
| Subject | Hindi Course A – Kshitij (क्षितिज भाग 2) |
| Board / Class | CBSE Class 10 |
| Target Year | 2026-27 |
| Key Topics | Poet's humility, pain of personal life, metaphor usage (मधुप, गागर रीति), Chhayavadi (छायावादी) poetic style. |
| Difficulty Level | Medium to Hard |
| Exam Weightage | 3–5 Marks |
Key Terms to Remember
Learning Objectives
Understand why poet Jaishankar Prasad was hesitant to write his autobiography.
Analyze the deep themes of sorrow, humility, and personal tragedy in the poem.
Identify and explain the metaphors and symbols used, such as 'गागर रीति' and 'मधुप'.
Appreciate the key features of Chhayavadi (छायावादी) poetry.
Confidently answer all NCERT and board exam questions related to 'Aatmkathya'.
Key Concepts & Definitions
Full NCERT Solutions for Chapter 4: आत्मकथ्य
Here are the detailed, easy-to-understand answers for all the exercise questions from the NCERT Kshitij textbook.
कवि जयशंकर प्रसाद जी आत्मकथा लिखने से बचना चाहते हैं क्योंकि:
- जीवन में सुखों का अभाव: कवि को लगता है कि उनका जीवन सुखों से खाली और संघर्षों से भरा रहा है। उन्हें कोई ऐसी बड़ी उपलब्धि नज़र नहीं आती जिसे वे लोगों को बता सकें।
- उपहास का डर: उन्हें डर है कि अपनी कमजोरियों और दुखों को लिखने पर लोग उनका मज़ाक उड़ाएँगे। वे अपनी 'खाली गगरी' (गागर रीति) सबको नहीं दिखाना चाहते।
- व्यक्तिगत यादें: उनके जीवन में कुछ मधुर और निजी क्षण भी हैं, जो केवल उनकी अपनी संपत्ति हैं। वे अपनी प्रेयसी की यादों को सार्वजनिक नहीं करना चाहते।
- सरल स्वभाव: कवि का स्वभाव बहुत सरल और विनम्र है। वे खुद को महान बताकर प्रशंसा नहीं लूटना चाहते।
कवि 'अभी समय भी नहीं' ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि:
- मन की स्थिति: कवि का मन दुखों और निराशा से भरा हुआ है। वे अपने अतीत के घावों को फिर से कुरेदकर दुखी नहीं होना चाहते। उनके अनुसार, आत्मकथा लिखने के लिए जिस मानसिक शांति और स्थिरता की आवश्यकता होती है, वह उनके पास नहीं है।
- कोई बड़ी उपलब्धि नहीं: कवि को लगता है कि उन्होंने जीवन में अभी तक कोई ऐसी महान उपलब्धि हासिल नहीं की है जिसके बारे में बढ़-चढ़कर लिखा जा सके। इसलिए, उन्हें आत्मकथा लिखने का यह सही समय नहीं लगता।
'पाथेय' का अर्थ है रास्ते का भोजन या सहारा (provisions for a journey)। स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का आशय यह है कि उनके जीवन में जो कुछ सुखद क्षण उनकी प्रियतमा के साथ बीते थे, अब उन्हीं की यादें उनके जीवन का एकमात्र सहारा हैं। जैसे रास्ते में भोजन यात्री को ऊर्जा देता है, वैसे ही ये मधुर स्मृतियाँ कवि को जीवन के मुश्किल सफर में जीने की प्रेरणा और शक्ति देती हैं।
(क) मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया। आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।
भाव: इन पंक्तियों में कवि अपने जीवन की निराशा को व्यक्त कर रहे हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने जिस सुख की कल्पना की थी, वह उन्हें कभी नहीं मिला। सुख एक सपने की तरह था, जो आँख खुलते ही टूट गया। ऐसा लगा जैसे सुख उनके पास आते-आते, उन्हें गले लगाते-लगाते, मुस्कुरा कर दूर भाग गया। यह उनके जीवन की सबसे बड़ी विडंबना है।
(ख) जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में। अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।
भाव: इन पंक्तियों में कवि अपनी प्रेयसी के सौंदर्य का वर्णन कर रहे हैं। वे कहते हैं कि उनकी प्रेयसी के गाल (कपोल) इतने लाल और सुंदर थे कि प्रेमभरी सुबह (अनुरागिनी उषा) भी अपनी लाली उन्हीं से उधार लेती थी। यहाँ कवि ने अपनी प्रेयसी के सौंदर्य को प्रकृति के सौंदर्य से भी श्रेष्ठ बताया है। यह उनके जीवन के मधुर पलों की एक झलक है।
इस कथन के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि उनके जीवन में प्रेम और सुख के जो क्षण (मधुर चाँदनी रातें) आए थे, वे अत्यंत निजी और व्यक्तिगत हैं। ये उनकी अपनी धरोहर हैं। वे इन मधुर और निजी यादों को आत्मकथा लिखकर सार्वजनिक नहीं करना चाहते और दुनिया के सामने उनका मज़ाक नहीं बनवाना चाहते। इसलिए वह अपनी 'उज्ज्वल गाथा' किसी को नहीं सुना सकते।
'आत्मकथ्य' कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- छायावादी शैली: यह कविता छायावाद का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें प्रकृति का मानवीकरण और व्यक्तिगत भावनाओं की गहरी अभिव्यक्ति है।
- खड़ी बोली का प्रयोग: कवि ने शुद्ध, साहित्यिक और संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया है।
- लाक्षणिकता और प्रतीकात्मकता: कवि ने अपनी बात सीधे न कहकर प्रतीकों और लक्षणों के माध्यम से कही है। उदाहरण: 'मधुप' (मन), 'गागर रीति' (खाली जीवन)।
- अलंकारों का सुंदर प्रयोग: कविता में अनुप्रास, रूपक, मानवीकरण और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। उदाहरण: 'अरुण-कपोलों', 'अनुरागिनी उषा' (मानवीकरण)।
- गीतात्मकता और संगीतात्मकता: कविता में एक लय और प्रवाह है, जो इसे गेय (sung) बनाती है।
कवि ने सुख के स्वप्न को एक ऐसे छलावे के रूप में व्यक्त किया है जो उनके करीब आते-आते ही दूर चला गया। कविता की पंक्तियों "आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया" से यह स्पष्ट होता है। उन्होंने अपनी प्रेयसी के साथ सुखद जीवन का सपना देखा था, लेकिन वह सपना पूरा होने से पहले ही टूट गया। यह सुख क्षणिक था और अब केवल यादों में ही शेष है।
Extra Board Exam Questions (2026-27)
Explanation: कवि का मन रूपी भौंरा यादों के रस को चखना चाहता है।
Explanation: कवि अपने जीवन को एक खाली घड़े के समान मानते हैं जिसमें कोई बड़ी सफलता नहीं है।
Explanation: कवि इन यादों को अपनी निजी पूँजी मानते हैं।
Explanation: कवि कहते हैं कि उनका दुख अभी शांत है, वे उसे जगाना नहीं चाहते।
Explanation: मुंशी प्रेमचंद द्वारा संपादित 'हंस' पत्रिका के आत्मकथा विशेषांक के लिए प्रसाद जी के मित्रों ने उनसे आग्रह किया था।
कवि अपने जीवन की कहानी को 'भोली' इसलिए कहते हैं क्योंकि उनका स्वभाव सरल है और उन्होंने जीवन में कोई चालाकी या छल-कपट नहीं किया। वे मानते हैं कि उनकी सरलता और भोलेपन के कारण ही उन्हें जीवन में धोखे मिले।
इस पंक्ति का आशय है कि कवि अपने जीवन को बहुत सामान्य और छोटा मानते हैं। उन्हें लगता है कि उनके जीवन में ऐसा कुछ भी असाधारण या महान नहीं हुआ है, जिसे बढ़ा-चढ़ाकर बड़ी-बड़ी कहानियों के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
अरे खिल-खिला कर हँसने होने वाली उन बातों की।
मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।
(क) कवि कैसी 'गाथा' गाने में असमर्थ हैं?
उत्तर: कवि अपने जीवन के प्रेम-भरे मधुर क्षणों की 'उज्ज्वल गाथा' गाने में असमर्थ हैं। वे अपनी निजी और सुखद यादों को सार्वजनिक नहीं करना चाहते।
(ख) 'आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया' - इस पंक्ति में किस सुख की बात हो रही है?
उत्तर: इस पंक्ति में कवि अपनी प्रियतमा से मिलने वाले प्रेम और सुख की बात कर रहे हैं। यह सुख उन्हें प्राप्त होते-होते रह गया, जैसे कोई सपना पूरा होने से पहले ही टूट जाए।
(ग) इन पंक्तियों में निहित काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर: भाव-सौंदर्य: कवि ने अपने जीवन की निराशा और निजी पलों की पवित्रता को व्यक्त किया है। शिल्प-सौंदर्य: खड़ी बोली का प्रयोग है। 'खिल-खिला' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। 'मुसक्या कर जो भाग गया' में मानवीकरण अलंकार है। भाषा सरल और भावपूर्ण है।
'आत्मकथ्य' शीर्षक पूरी तरह से सार्थक है। यह कविता आत्मकथा लिखने के आग्रह के जवाब में लिखी गई है। इसमें कवि आत्मकथा न लिखने के कारणों को बताते हैं।
- यह कविता 'आत्मकथा' नहीं है, बल्कि 'आत्मकथा के बारे में' कही गई बात है, यानी 'आत्मकथ्य'।
- कवि इसमें अपने जीवन की कहानी नहीं सुनाते, बल्कि यह बताते हैं कि वे कहानी क्यों नहीं सुना सकते।
- वे अपने जीवन को 'खाली गगरी' और 'भोला' बताते हैं और कहते हैं कि इसमें ऐसा कुछ नहीं जिसे बताया जाए।
- इस प्रकार, यह शीर्षक कविता के मूल उद्देश्य को सटीक रूप से व्यक्त करता है, जो आत्मकथा न लिखने के पक्ष में तर्क देना है।
Common Mistakes Students Make
Exam Preparation Tips for 2026-27
Frequently Asked Questions (FAQs)
Master आत्मकथ्य 🎨
'Aatmkathya' is more than just a poem; it's a window into the soul of a great poet. Understanding its emotional depth will help you score well and appreciate Hindi literature. Revise the key concepts and practice writing answers to master this chapter.
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