Updated NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 3 सवैया एवं कवित्त | Important Questions (2026-27)
Welcome, students! Get ready to dive into the beautiful world of Braj Bhasha poetry with Chapter 3, "सवैया एवं कवित्त" by the poet Dev. This chapter is a treat for the senses and a crucial one for your CBSE board exams. Our detailed solutions will make understanding these poems super easy!
Chapter at a Glance
Chapter 3: सवैया एवं कवित्त – Quick Reference
| Chapter Name | सवैया एवं कवित्त (Savaiya evam Kavitt) |
| Poet | देव (Dev) |
| Subject | Hindi Course A – Kshitij (क्षितिज भाग 2) |
| Class / Board | CBSE Class 10 |
| Target Year | 2026-27 |
| Important Topics | - सवैया: श्री कृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन - कवित्त 1: वसंत का मानवीकरण (Personification of Spring) - कवित्त 2: पूर्णिमा की चाँदनी रात का वर्णन (Description of a Moonlit Night) |
| Difficulty Level | Medium |
| Exam Weightage | 3–5 Marks |
Learning Objectives
Understand and appreciate the beauty of Braj Bhasha poetry.
Explain the meaning and summary of the Savaiya and Kavitts written by Dev.
Identify and explain various literary devices (अलंकार) like Simile (उपमा), Metaphor (रूपक), Alliteration (अनुप्रास), and Personification (मानवीकरण).
Analyze the vivid imagery used by the poet to describe Lord Krishna, Spring, and a moonlit night.
Confidently answer all CBSE Class 10 Hindi Course A – Kshitij (क्षितिज भाग 2) Chapter 3 questions in your exams.
Key Concepts & Definitions
2. उपमा (Upma - Simile): Comparison between two different things using words like 'सा', 'सी', 'सम', 'जैसा'. (e.g., तारा-सी तरुनि)
3. रूपक (Rupak - Metaphor): A direct comparison where one thing is said to be another. (e.g., मुखचंद - face is the moon)
4. मानवीकरण (Manvikaran - Personification): Giving human qualities to inanimate objects or abstract ideas. (e.g., describing spring as a child)
Full NCERT Solutions – प्रश्न-अभ्यास
कवि देव ने 'श्रीबजदूलह' (ब्रज का दूल्हा) श्री कृष्ण के लिए प्रयुक्त किया है।
उन्हें संसार-रूपी मंदिर का दीपक इसलिए कहा गया है क्योंकि:
- Beauty and Radiance: जिस प्रकार एक दीपक मंदिर के अंधकार को दूर कर उसे प्रकाशित कर देता है, उसी प्रकार श्री कृष्ण अपनी सुंदरता और अलौकिक तेज से पूरे संसार को मोहित और प्रकाशित करते हैं।
- Divine Presence: उनका दिव्य रूप इस संसार को एक पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। उनकी उपस्थिति ही संसार के लिए प्रकाश और आशा का स्रोत है।
In short, Krishna's divine aura illuminates the entire world, just like a lamp illuminates a temple.
अनुप्रास अलंकार (Alliteration):
- "कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।" - इसमें 'क' वर्ण की आवृत्ति हुई है। (Repetition of 'क' sound).
- "साँवरे अंग लसैं पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।" - इसमें 'ह' वर्ण की आवृत्ति हुई है। (Repetition of 'ह' sound).
रूपक अलंकार (Metaphor):
- "मुखचंद जुन्हाई" - यहाँ मुख पर चंद्रमा का आरोप है, यानी मुख को ही चंद्रमा बताया गया है। (Face is directly called the moon).
- "जय जग-मंदिर-दीपक" - यहाँ संसार को मंदिर और श्री कृष्ण को दीपक बताया गया है। (The world is a temple, and Krishna is the lamp).
इन पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य इस प्रकार है:
- भाव-सौंदर्य (Emotional Beauty): इन पंक्तियों में कवि देव ने श्री कृष्ण के बाल रूप के श्रृंगार का अत्यंत मनमोहक वर्णन किया है। उनके पैरों में सुंदर पायल और कमर में करधनी की मधुर ध्वनि कानों में रस घोल रही है। उनके साँवले शरीर पर पीला वस्त्र (पीताम्बर) और गले में वन-फूलों की माला सुशोभित हो रही है। यह दृश्य अत्यंत आकर्षक और भक्ति भाव जगाने वाला है।
- शिल्प-सौंदर्य (Artistic Beauty):
- भाषा: मधुर और संगीतमय ब्रज भाषा का प्रयोग हुआ है।
- अलंकार: 'कटि किंकिनि' और 'पट पीत' में अनुप्रास अलंकार है।
- शैली: सवैया छंद का प्रयोग हुआ है, जो इसे गेय (singable) बनाता है।
- बिंब: पंक्तियों को पढ़कर श्री कृष्ण का एक सजीव और गतिशील चित्र (दृश्य बिंब) आँखों के सामने आ जाता है।
परंपरागत रूप से, कवि वसंत को एक नायक या राजा के रूप में चित्रित करते हैं जो प्रकृति में प्रेम और उत्साह (उद्दीपन) जगाता है।
लेकिन, कवि देव का वर्णन इससे भिन्न है क्योंकि:
- Personification as a Child: देव ने वसंत को एक राजा के रूप में नहीं, बल्कि कामदेव राजा के नवजात शिशु (बालक) के रूप में चित्रित किया है।
- Nature as a Nanny: प्रकृति के सभी तत्व (पेड़, पत्ते, फूल, हवा) उस शिशु की देखभाल कर रहे हैं। जैसे - पेड़ की डाली उसका पालना है, नए पत्ते उसका बिछौना हैं, और फूल उसके वस्त्र हैं।
- Lullaby and Play: हवा उसे झूला झुलाती है, मोर और तोता उससे बातें करके उसका मन बहलाते हैं। कमल की कली (नायिका) उसे प्यार से जगाती है।
यह अनूठा दृष्टिकोण वसंत का एक वात्सल्यपूर्ण, कोमल और बिलकुल नया चित्र प्रस्तुत करता है, जो इसे परंपरागत वर्णन से अलग और विशेष बनाता है।
इस पंक्ति का भाव यह है कि सुबह होने पर, गुलाब की कली चटक कर खिलती है। कवि ने कल्पना की है कि यह ऐसा है मानो कोई नायिका (लता रूपी नायिका) चुटकी बजाकर वसंत रूपी बालक को प्यार से जगा रही हो।
- चटकारी दै: इसका अर्थ है 'चुटकी बजाकर'।
- Symbolism: यहाँ सुबह के समय कली के खिलने की प्राकृतिक क्रिया को एक मानवीय क्रिया (चुटकी बजाकर जगाना) के रूप में दिखाया गया है। यह वसंत के सजीव और आनंदमय वातावरण को दर्शाता है।
कवि देव ने चाँदनी रात की सुंदरता को निम्नलिखित रूपों में देखा है:
- स्फटिक का मंदिर (Crystal Temple): आकाश एक पारदर्शी स्फटिक (crystal) की शिलाओं से बने मंदिर जैसा लग रहा है।
- दही का समुद्र (Ocean of Curd): चारों ओर फैली चाँदनी ऐसी लग रही है मानो दही का समुद्र उमड़ आया हो।
- दूध का झाग (Foam of Milk): फ़र्श पर फैली चाँदनी दूध के झाग के समान उज्ज्वल और सुंदर है।
- मोतियों की चमक (Shine of Pearls): चाँदनी की चमक मोतियों जैसी है।
- राधा का प्रतिबिंब (Reflection of Radha): आकाश में चमकता हुआ चाँद ऐसा लग रहा है मानो वह राधिका के सुंदर मुख का प्रतिबिंब हो।
- भाव (Meaning): इस पंक्ति का भाव है कि पूर्णिमा का चाँद इतना सुंदर और उज्ज्वल है कि वह राधा के सुंदर मुख का प्रतिबिंब (परछाई) जैसा प्रतीत हो रहा है। कवि ने यहाँ चंद्रमा की सुंदरता की तुलना राधा के मुख की सुंदरता से की है, लेकिन उन्होंने चंद्रमा को राधा के मुख से भी कमतर (उपमान को उपमेय से हीन बताना) दिखाया है।
- अलंकार (Figure of Speech): इस पंक्ति में व्यतिरेक अलंकार (Vyatirek Alankar) है। व्यतिरेक अलंकार वहाँ होता है जहाँ उपमान (जैसे चाँद) की तुलना में उपमेय (जैसे राधा का मुख) को अधिक श्रेष्ठ बताया जाता है। यहाँ चाँद को राधा के मुख का मात्र प्रतिबिंब बताकर राधा के सौंदर्य को चंद्रमा से भी बढ़कर बताया गया है। कुछ विद्वान इसमें उपमा अलंकार का आभास भी मानते हैं क्योंकि 'सो' शब्द का प्रयोग हुआ है, लेकिन मुख्य अलंकार व्यतिरेक ही है।
तीसरे कवित्त में चाँदनी रात के उज्ज्वल और धवल सौंदर्य का वर्णन करने के लिए कवि ने निम्नलिखित उपमानों (comparisons) का प्रयोग किया है:
- सुधा-मंदिर (Temple of Nectar): आकाश को अमृत का मंदिर कहा है।
- स्फटिक शिला (Crystal Stone): चाँदनी की شفافیت (transparency) दिखाने के लिए।
- दधि को समुद्र (Ocean of Curd): चाँदनी के फैलाव और सफेदी के लिए।
- दूध को सो फेन (Foam of Milk): फ़र्श पर फैली चाँदनी की सफेदी और कोमलता के लिए।
- मोतिन की ज्योति (Luster of Pearls): तारों की चमक के लिए।
- राधिका को प्रतिबिंब (Reflection of Radha): चंद्रमा की सुंदरता के लिए।
Extra Important Questions (Board Style 2026-27)
वसंत रूपी बालक को पवन (हवा) झूला झुला रही है। कवि ने कल्पना की है कि जब हवा चलती है तो पेड़ की डालियाँ हिलती हैं, जो वसंत रूपी शिशु के लिए पालने के झूले के समान है।
कवि के अनुसार, संसार रूपी मंदिर में दीपक का कार्य 'श्रीबजदूलह' अर्थात श्री कृष्ण कर रहे हैं। क्योंकि जिस प्रकार दीपक अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार श्री कृष्ण अपने दिव्य सौंदर्य से पूरे संसार को प्रकाशित और आनंदित कर रहे हैं।
इस पंक्ति का आशय है कि वसंत रूपी बालक के लिए पेड़ की डाली (डार द्रुम) पालने (पलना) का काम कर रही है और उस पालने में वृक्षों पर आए नए-नए कोमल पत्ते (नव पल्लव) बिछौने का काम कर रहे हैं।
दूसरे कवित्त में कवि देव ने चाँदनी रात की अद्भुत सुंदरता का वर्णन किया है। उनके अनुसार, आकाश एक पारदर्शी स्फटिक के मंदिर जैसा है, जिसमें सब कुछ साफ़ दिखाई दे रहा है। चारों ओर फैली चाँदनी दही के उमड़ते हुए समुद्र के समान है। फ़र्श पर फैली सफेदी दूध के झाग जैसी लग रही है। तारे सुंदर युवतियों की तरह लग रहे हैं और चाँद ऐसा है मानो राधा के सुंदर मुख की परछाई हो। यह वर्णन चाँदनी रात की पवित्रता, शीतलता और उज्ज्वलता को दर्शाता है।
'सवैया एवं कवित्त' पाठ कवि देव की अद्भुत कल्पना शक्ति का प्रमाण है।
- सवैया में: वे कृष्ण के श्रृंगार का ऐसा सजीव चित्र खींचते हैं मानो वह हमारे सामने ही हों।
- पहले कवित्त में: वे वसंत जैसी प्राकृतिक ऋतु को एक नन्हे शिशु के रूप में कल्पित करते हैं और पूरी प्रकृति को उसकी देखभाल में लगा हुआ दिखाते हैं, जो एक बिलकुल नई और मौलिक कल्पना है।
- दूसरे कवित्त में: वे चाँदनी रात की तुलना स्फटिक मंदिर, दही के समुद्र और दूध के झाग से करते हैं, जो उनकी सूक्ष्म दृष्टि और असाधारण कल्पना को दर्शाता है।
सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।
पवन झुलावै, केकी-कीर बतरावैं 'देव',
कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै।।"
(i) प्रस्तुत पंक्तियों में किसका वर्णन किया गया है?
Answer: प्रस्तुत पंक्तियों में ऋतुराज वसंत का एक नन्हे बालक के रूप में वर्णन किया गया है।
(ii) वसंत रूपी बालक का 'झिंगूला' (झबला) किस चीज़ का बना है?
Answer: वसंत रूपी बालक का झिंगूला (झबला) फूलों (सुमन) का बना है जो उसके शरीर पर बहुत सुंदर लग रहा है।
(iii) बालक वसंत का मन कौन-कौन बहला रहा है?
Answer: बालक वसंत का मन पवन उसे झूला झुलाकर, तथा मोर (केकी) और तोता (कीर) उससे बातें करके बहला रहे हैं। कोयल भी तालियाँ बजा-बजाकर उसे प्रसन्न कर रही है।
Common Mistakes to Avoid
Exam Preparation Tips for 2026-27
Frequently Asked Questions (FAQs)
Master सवैया एवं कवित्त 🌍
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