CBSE 2026-27 | क्षितिज भाग 2

Updated NCERT Solutions for Ram-Lakshman-Parshuram Samvad | Important Questions 2026-27

📚 Class 10 CBSE 🇮-127475; Hindi Course A – Kshitij ⚡ 4–6 Marks 🔵 Medium to Hard

Hello, champions! Get ready to dive into one of the most dramatic chapters of your Hindi syllabus, "Ram-Lakshman-Parshuram Samvad." This chapter is not just a part of the epic Ramcharitmanas but also a goldmine for board exam questions. We'll break down every dialogue, emotion, and important question for you.

📋Chapter at a Glance

📚

Chapter 2: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद – Quick Reference

Chapter Nameराम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (Ram-Lakshman-Parshuram Samvad)
PoetGoswami Tulsidas (गोस्वामी तुलसीदास)
SourceRamcharitmanas (रामचरितमानस) - Balkand (बालकांड)
SubjectHindi Course A – Kshitij (क्षितिज भाग 2)
Class / BoardCBSE Class 10
Target Year2026-27
Important TopicsParshuram's anger, Lakshman's sarcasm, Ram's humility, The breaking of Shiva's bow (शिव धनुष).
Difficulty LevelMedium to Hard (due to Awadhi language)
Exam Weightage4–6 Marks (approx.)

📊Key Facts – Quick Details to Remember

👤
Poet
Tulsidas
📖
Source
Ramcharitmanas
🇮-127475;
Language
Awadhi
😡
Main Ras
Raudra (Fury)
💪
Hero's Ras
Veer (Courage)
🏹
Shiva's Bow
Pinaka

🎯Learning Objectives

1

Understand the context of Sita's Swayamvar and the breaking of Shiva's bow.

2

Analyze the characters of Lord Ram, Lakshman, and the sage Parshuram.

3

Explain the meaning of the chaupais (चौपाई) and dohas (दोहा) written in the Awadhi dialect.

4

Identify and explain literary devices like sarcasm (व्यंग्य), hyperbole (अतिशयोक्ति), and metaphor (रूपक).

5

Confidently answer Important Questions in your Board Exam Questions 2026.

💡Key Concepts & Characters

शिव धनुष (Shiva Dhanush) 'पिनाक'
The divine bow of Lord Shiva, which was a condition to be broken to marry Sita. Lord Ram breaks it.
परशुराम (Parshuram)
A powerful sage, a great devotee of Lord Shiva, and known for his fierce anger. He arrives enraged after the bow is broken.
लक्ष्मण (Lakshman)
Lord Ram's younger brother. He is witty, sharp-tongued, and fearless. He engages in a heated, sarcastic dialogue with Parshuram.
राम (Ram)
An incarnation of Lord Vishnu. He is calm, humble, and respectful. He tries to pacify Parshuram's anger.
अवधि भाषा (Awadhi Language)
The chapter is written in Awadhi, an older dialect of Hindi. Key words: 'रिपु' (enemy), 'कोही' (angry), 'भृगुसुत' (Parshuram).
रस (Ras)
The chapter is filled with रौद्र रस (Raudra Ras - Fury) from Parshuram's side and वीर रस (Veer Ras - Heroism) from Lakshman's side.

Extra MCQs – Practice & Self-Test

💡
How to Use
Click an option to check if it's correct or wrong. The explanation will appear instantly.
Difficulty: Easy
Q1. परशुराम किसके भक्त थे?
✅ Correct: (c) शिव
Difficulty: Easy
Q2. श्री राम ने कौन-सा धनुष तोड़ा था?
✅ Correct: (b) पिनाक (शिव धनुष)
Difficulty: Medium
Q3. लक्ष्मण ने परशुराम के वचनों की तुलना किससे की है?
✅ Correct: (c) करोड़ों वज्रों से
Difficulty: Medium
Q4. 'कुम्हड़बतिया' का क्या अर्थ है?
✅ Correct: (d) बहुत कमज़ोर या निर्बल व्यक्ति
Difficulty: Hard
Q5. 'गाधिसूनु' शब्द किसके लिए प्रयोग हुआ है?
✅ Correct: (d) विश्वामित्र

📝Full NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 2

✅ Model Answer

परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए:

  • बचपन की याद: लक्ष्मण ने कहा कि बचपन में हमने खेल-खेल में ऐसे कई छोटे-छोटे धनुष तोड़े हैं, तब तो किसी ने हम पर गुस्सा नहीं किया। इस विशेष धनुष पर इतनी ममता क्यों?
  • धनुष का पुराना होना: उन्होंने कहा कि यह धनुष बहुत ही पुराना और जर्जर था। श्री राम के तो छूते ही यह टूट गया, इसमें उनका कोई दोष नहीं है।
  • सब धनुष एक समान: लक्ष्मण ने व्यंग्य करते हुए कहा कि हमारी नज़र में तो सभी धनुष एक-समान होते हैं। इस पुराने धनुष को तोड़ने से हमें क्या लाभ या हानि हो सकती थी?
  • अनजाने में टूटना: उन्होंने यह भी तर्क दिया कि श्री राम ने इसे तोड़ने के इरादे से नहीं, बल्कि नया होने के भ्रम में उठाया था, लेकिन यह तो छूते ही खंड-खंड हो गया।
✅ Model Answer

राम और लक्ष्मण की प्रतिक्रियाओं के आधार पर दोनों के स्वभाव में निम्नलिखित अंतर हैं:

श्री राम का स्वभाव:

  • शांत और विनम्र: श्री राम स्वभाव से बहुत शांत, विनम्र और धैर्यवान हैं। परशुराम के क्रोध के बावजूद, वे बड़ी नम्रता से बात करते हैं और स्थिति को संभालने का प्रयास करते हैं।
  • विवेकशील: वे जानते थे कि परशुराम का क्रोध शांत करना आवश्यक है, इसलिए उन्होंने अपनी बातों में विवेक और शील का परिचय दिया।
  • आज्ञाकारी: वे स्वयं को परशुराम का 'दास' कहकर संबोधित करते हैं, जो उनकी बड़ो के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता है।

लक्ष्मण का स्वभाव:

  • उग्र और व्यंग्यात्मक: लक्ष्मण का स्वभाव राम के ठीक विपरीत, उग्र और निडर है। वे परशुराम के क्रोध का उत्तर क्रोध और व्यंग्य से देते हैं।
  • तार्किक और मुखर: वे अपनी बात को तर्क के साथ रखते हैं और किसी भी अन्यायपूर्ण बात को सहने के लिए तैयार नहीं हैं।
  • साहसी: वे परशुराम की धमकियों से डरते नहीं हैं और एक वीर योद्धा की तरह उन्हें चुनौती देने से भी नहीं हिचकिचाते।
✅ Model Answer

मुझे लक्ष्मण और परशुराम के बीच का वह संवाद सबसे रोचक लगा जिसमें लक्ष्मण, परशुराम को उनकी बातों का करारा जवाब देते हैं।

संवाद शैली:

लक्ष्मण: (मुस्कुराते हुए) हे मुनि! आप तो खुद को बहुत बड़ा योद्धा समझ रहे हैं। आप मुझे फूँक से पहाड़ उड़ाने वाला समझ रहे हैं क्या? यहाँ कोई कुम्हड़े की बतिया (बहुत कमज़ोर) नहीं है, जो तर्जनी अँगुली दिखाने से ही मुरझा जाए।

परशुराम: (क्रोध से अपना फरसा दिखाते हुए) अरे दुष्ट! तू मेरे फरसे और मेरे क्रोध को नहीं जानता। मैंने अपने इस फरसे से क्षत्रियों का नाश किया है।

लक्ष्मण: (व्यंग्य से) ओहो! तो आप भृगुवंशी हैं और अपना फरसा दिखाकर मुझे डरा रहे हैं। हे मुनिवर, हमने भी सुना है कि देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्त और गाय, इन पर हमारे कुल में वीरता नहीं दिखाई जाती। इसलिए यदि आप मुझे मार भी दें, तो भी मुझे आपके पैर ही पड़ने होंगे। आपका तो एक-एक वचन ही करोड़ों वज्रों के समान है, आपने यह धनुष-बाण और फरसा तो व्यर्थ ही धारण किया हुआ है।

✅ Model Answer

परशुराम ने क्रोध में भरकर अपने बल और पराक्रम का बखान करते हुए सभा में कहा:

  • वे केवल एक सामान्य मुनि नहीं, बल्कि बाल ब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी स्वभाव के हैं।
  • पूरा संसार उन्हें क्षत्रिय कुल के विनाशक के रूप में जानता है।
  • उन्होंने अपनी भुजाओं के बल पर इस पृथ्वी को कई बार राजाओं से विहीन कर दिया था और उसे ब्राह्मणों को दान में दे दिया था।
  • उन्होंने सहस्रबाहु जैसे पराक्रमी राजा की भुजाओं को अपने फरसे से काट डाला था।
  • उनका फरसा इतना भयानक है कि इसके डर से गर्भ में पल रहे बच्चे भी नष्ट हो जाते हैं।
✅ Model Answer

लक्ष्मण ने परशुराम के बड़बोलेपन पर व्यंग्य करते हुए एक वीर योद्धा की निम्नलिखित विशेषताएँ बताईं:

  • शूरवीर युद्ध में वीरता दिखाते हैं: सच्चे योद्धा युद्ध भूमि में अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हैं, बातों से अपनी ताकत का बखान नहीं करते।
  • शत्रु को सामने पाकर कार्य करते हैं: वे रणभूमि में शत्रु को सामने पाकर कायरों की तरह केवल शब्दों से प्रहार नहीं करते, बल्कि शस्त्रों से अपनी वीरता सिद्ध करते हैं।
  • आत्म-प्रशंसा से बचते हैं: वीर पुरुष धैर्यवान होते हैं और वे कभी भी अपने मुँह से अपनी प्रशंसा नहीं करते। उनकी वीरता तो उनके कर्मों से ही प्रकट होती है।
✅ Model Answer

यह कथन पूरी तरह सत्य है कि साहस और शक्ति के साथ विनम्रता का होना उसे और भी बेहतर बना देता है।

  • साहस और शक्ति का दुरुपयोग: यदि किसी व्यक्ति में केवल साहस और शक्ति है, लेकिन विनम्रता नहीं है, तो वह अहंकारी और क्रोधी बन सकता है, जैसा कि परशुराम के चरित्र में दिखाई देता है। वे शक्तिशाली हैं, पर अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख पाते।
  • विनम्रता संतुलन लाती है: विनम्रता व्यक्ति को विवेकशील बनाती है। श्री राम साहस और शक्ति के प्रतीक होते हुए भी विनम्र हैं। उनकी विनम्रता ही परशुराम के भयंकर क्रोध को अंत में शांत कर देती है।
  • सम्मान का पात्र: विनम्र व्यक्ति अपनी शक्ति का सही उपयोग करता है और समाज में अधिक सम्मान पाता है। लक्ष्मण साहसी हैं, पर उनकी बातों में व्यंग्य है, जबकि राम की विनम्रता उन्हें सबसे श्रेष्ठ बनाती है। अतः, शक्ति का सच्चा श्रंगार विनम्रता ही है।
✅ Model Answer

(क) बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥ पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥

भाव: इसका भाव यह है कि लक्ष्मण हँसकर कोमल वाणी में व्यंग्य करते हुए परशुराम से कहते हैं - "अरे मुनिवर! आप तो अपने आप को बहुत बड़ा योद्धा मानते हैं। आप बार-बार मुझे यह कुल्हाड़ी दिखाकर ऐसे डरा रहे हैं, जैसे आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ा देना चाहते हों।" यहाँ लक्ष्मण परशुराम को यह बताना चाह रहे हैं कि वे कमज़ोर नहीं हैं जो उनकी धमकियों से डर जाएँगे।

(ख) इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥ देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना॥

भाव: इसका भाव यह है कि लक्ष्मण अपनी निडरता और वीरता का परिचय देते हुए कहते हैं - "यहाँ कोई छुईमुई या कुम्हड़े का छोटा फल नहीं है, जो तर्जनी उँगली देखते ही मुरझा जाए। मैंने आपके हाथ में कुल्हाड़ी और कंधे पर धनुष-बाण देखकर ही आपको एक वीर योद्धा समझकर कुछ अभिमानपूर्वक बातें कहीं थीं।" लक्ष्मण स्पष्ट करना चाहते हैं कि वे परशुराम को एक साधारण मुनि नहीं, बल्कि एक योद्धा समझकर ही उत्तर दे रहे हैं।

(ग) गाधिसूनु कह हृदयँ हसि मुनिहि हरियरे सूझ। अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ॥

भाव: इस पंक्ति में विश्वामित्र मन ही मन हँसते हुए सोच रहे हैं - "मुनि परशुराम को तो चारों ओर हरा ही हरा सूझ रहा है (अर्थात वे सब को एक जैसा कमज़ोर क्षत्रिय समझ रहे हैं)।" वे यह नहीं समझ पा रहे कि राम और लक्ष्मण कोई साधारण योद्धा नहीं, बल्कि गन्ने के रस से बनी खाँड (आसानी से पिघलने वाले) नहीं हैं। ये तो लोहे से बनी तलवार (अयमय खाँड़) हैं, जिन्हें पराजित करना असंभव है। विश्वामित्र को परशुराम की नासमझी पर हँसी आ रही है।

🚀Extra Board Exam Questions (2026-27)

📌 Short Answer Questions
✅ Model Answer

परशुराम ने अपने फरसे को बहुत भयानक बताते हुए कहा कि यह अत्यंत कठोर है और इसने सहस्रबाहु की भुजाओं को काटा था। इसकी गर्जना सुनकर गर्भ में पल रहे शिशु भी मर जाते हैं।

✅ Model Answer

लक्ष्मण के अनुसार, उनके रघुकुल की यह परंपरा थी कि वे देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्त और गाय पर अपनी वीरता का प्रदर्शन नहीं करते थे, क्योंकि इन्हें मारने से पाप लगता है और इनसे हारने पर अपयश मिलता है।

✅ Model Answer

राम ने अत्यंत विनम्रता से कहा, "हे नाथ! शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला कोई आपका ही एक दास होगा। क्या आज्ञा है, मुझसे कहिए।" इन मीठे वचनों से उन्होंने परशुराम का क्रोध शांत करने का प्रयास किया।

📌 Long Answer Questions
✅ Model Answer

इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि क्रोध और अहंकार व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर देता है, जबकि विनम्रता और शांति से बड़ी से बड़ी समस्या को भी हल किया जा सकता है।

  • परशुराम अपनी शक्ति के अहंकार में डूबे हैं और क्रोध में किसी की बात नहीं सुनते।
  • वहीं, लक्ष्मण का व्यंग्य और क्रोध आग में घी का काम करता है।
  • इसके विपरीत, श्री राम का शांत, विनम्र और विवेकपूर्ण व्यवहार ही अंत में परशुराम के क्रोध को शांत करता है और स्थिति को बिगड़ने से बचाता है।
  • यह पाठ हमें सिखाता है कि शक्ति का प्रयोग विवेक और विनम्रता के साथ ही करना चाहिए।
✅ Model Answer

लक्ष्मण के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताओं ने परशुराम को और अधिक क्रोधित कर दिया:

  1. व्यंग्यात्मक स्वभाव: लक्ष्मण हर बात का जवाब सीधे न देकर व्यंग्य में देते थे, जैसे परशुराम को 'महाभट' कहना और फूँक से पहाड़ उड़ाने की बात कहना।
  2. निडरता: वे परशुराम के फरसे और उनकी धमकियों से बिल्कुल भी नहीं डरे, जिसने परशुराम के अहंकार को ठेस पहुँचाई।
  3. तर्कशीलता: लक्ष्मण ने धनुष के पुराने होने और बचपन में कई धनुष तोड़ने जैसे तर्क दिए, जो परशुराम को अपनी बात का अपमान लगे।
  4. उग्रता: उन्होंने परशुराम की बातों का जवाब शांत भाव से नहीं, बल्कि उन्हीं की तरह ऊँचे स्वर और उग्रता से दिया, जिससे संवाद विवाद में बदल गया।
📌 Case-Based Question
✅ Model Answer
"तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा॥
सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा॥
अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालकु बधजोगू॥"

(क) यह वचन कौन, किससे कह रहा है? (1 mark)
उत्तर: यह वचन लक्ष्मण, परशुराम से कह रहे हैं।

(ख) वक्ता को ऐसा क्यों लग रहा है कि काल को हाँककर लाया जा रहा है? (2 marks)
उत्तर: वक्ता (लक्ष्मण) को ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि परशुराम बार-बार उन्हें मारने की धमकी दे रहे हैं। लक्ष्मण व्यंग्य में कह रहे हैं कि ऐसा लगता है जैसे आप तो मेरे लिए काल (मृत्यु) को हाँक लगाकर बुला रहे हैं।

(ग) इन पंक्तियों को सुनकर परशुराम की क्या प्रतिक्रिया हुई? (2 marks)
उत्तर: लक्ष्मण के कठोर वचन सुनकर परशुराम ने अपने भयानक फरसे को हाथ में सुधार कर पकड़ लिया और सभा से कहा कि अब कोई मुझे दोष मत देना, यह कड़वे वचन बोलने वाला बालक वध करने के योग्य है।

Common Mistakes to Avoid

01
🇮-127475;
Ignoring the Language
Students struggle with Awadhi words. **Tip:** Make a list of difficult words (e.g., रिपु-शत्रु, कोही-क्रोधी, कुठारु-कुल्हाड़ी).
02
👥
Mixing up Characters
Confusing who said what. **Tip:** Read the dialogue like a play. Imagine the scene to remember the speaker's tone and words.
03
🔍
Generic Answers
Don't just write "Parshuram was angry." Explain **why** (devotion to Shiva) and use examples/quotes from the text.
04
💬
Misinterpreting Lakshman
He wasn't just disrespectful. His reaction was a brave warrior's response to a threat against his brother. His words were sarcastic, but courageous.

📚Exam Preparation Tips for 2026-27

01
📈
Focus on Summary
Understand the story first. Who came, why were they angry, and how did it end?
02
👤
Character Sketches
Prepare short notes on the character traits of Ram, Lakshman, and Parshuram with examples. This is a very common Board Exam Question.
03
📓
Key Stanzas
Pay extra attention to the meanings of the stanzas mentioned in the NCERT exercises (भाव स्पष्ट कीजिए).
04
Practice Writing
Don't just read answers. Practice writing them to improve your speed and presentation for the board exam.

🅾Frequently Asked Questions (FAQs)

Why was Parshuram so angry in the Ram-Lakshman-Parshuram Samvad?
Parshuram was a great devotee of Lord Shiva. When he heard that someone had broken the divine bow of Shiva (Pinaka) at Sita's Swayamvar, he became extremely enraged, considering it a personal insult to his revered deity.
What is the main theme of CBSE Class 10 Hindi Chapter 2?
The main theme is the conflict between anger/arrogance (personified by Parshuram) and humility/wisdom (personified by Ram). It also explores courage and wit (personified by Lakshman).
Who was Tulsidas, the author of this chapter?
Goswami Tulsidas was a great poet-saint of 16th-century India, best known for writing the epic 'Ramcharitmanas' in the Awadhi language, from which this chapter is taken.
How did Lord Ram calm Parshuram's anger?
Lord Ram used calm, respectful, and humble words. He referred to himself as Parshuram's 'das' (servant) and accepted responsibility, which eventually pacified the sage's fury, especially after Ram showed his divine nature.

Master राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद 💪

Great job on getting through this intense but fascinating chapter! It teaches us more than just a story; it teaches us about human emotions and the power of humility. Keep revising the character sketches and the meanings of the Chaupais. You've got this!

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