Updated NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 17 संस्कृति | Important Questions 2026-27
Welcome, students! This guide will help you master "संस्कृति," a thought-provoking chapter by Bhadant Anand Kausalyayan. We'll break down complex ideas like 'Sanskriti' and 'Sabhyata' into simple points. This chapter is crucial for your CBSE board exams and builds a strong foundation for understanding society. Complete solutions updated for CBSE Board Exams 2026-27.
Chapter at a Glance
Chapter 17: संस्कृति – Quick Reference
| Chapter Name | संस्कृति (Sanskriti) |
| Chapter Number | 17 |
| Book Name | Kshitij (क्षितिज भाग 2) |
| Subject | Hindi Course A |
| Class | 10 |
| Board | CBSE |
| Author | भदंत आनंद कौसल्यायन (Bhadant Anand Kausalyayan) |
| Important Topics | संस्कृति और सभ्यता में अंतर (Difference between Culture and Civilization), आविष्कार और संस्कृत व्यक्ति (Invention and the Cultured Person), मानव-कल्याण (Human Welfare) |
| Difficulty Level | Medium to High (Conceptual) |
| Exam Weightage | 3–5 Marks |
Learning Objectives
Define the terms संस्कृति (Sanskriti) and सभ्यता (Sabhyata) with clarity.
Differentiate between culture and civilization using examples from the text.
Explain who the author considers a truly 'संस्कृत व्यक्ति' (cultured person).
Analyze the relationship between human welfare and cultural development.
Answer all NCERT and important board-style questions confidently.
Key Concepts & Definitions
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) – Practice & Self-Test
Explanation: संस्कृति (आंतरिक योग्यता) के कारण आविष्कार होता है, और वही आविष्कार 'सभ्यता' कहलाता है।
Explanation: पाठ के अनुसार, न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत खोजा था, जो उनकी मौलिक सोच का परिणाम था।
Explanation: जो योग्यता मानव का विनाश करे, वह असंस्कृति है।
Explanation: भूख मिटाने और भोजन पकाने की ज़रूरत ने आग की खोज को प्रेरित किया।
Explanation: पूर्वजों के आविष्कार का उपयोग करने वाला व्यक्ति 'सभ्य' होता है, जबकि आविष्कार करने वाला 'संस्कृत' होता है।
Full NCERT Solutions (प्रश्न-अभ्यास)
लेखक की दृष्टि में 'सभ्यता' और 'संस्कृति' की सही समझ अब तक इसलिए नहीं बन पाई है क्योंकि लोग इन दोनों शब्दों का प्रयोग बहुत ही मनमाने ढंग से करते हैं। वे अक्सर इन शब्दों को एक-दूसरे की जगह प्रयोग कर लेते हैं या फिर उनके अर्थ को आपस में मिला देते हैं।
- अस्पष्टता: इन शब्दों के साथ अनेक विशेषण लग जाते हैं, जैसे - भौतिक-सभ्यता, आध्यात्मिक-सभ्यता, जिससे इनका अर्थ और भी भ्रमित करने वाला हो जाता है।
- गलत प्रयोग: लोग यह समझ नहीं पाते कि कौन सी वस्तु 'सभ्यता' है और कौन सी 'संस्कृति'। वे इन दोनों के बीच के सूक्ष्म अंतर को नहीं पकड़ पाते।
- जटिलता: संस्कृति एक आंतरिक गुण है जबकि सभ्यता उसका बाहरी परिणाम। इस सूक्ष्म और आंतरिक भेद को समझना आसान नहीं है, इसीलिए लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं।
इस प्रकार, स्पष्ट परिभाषा और गहरे विश्लेषण की कमी के कारण आज भी इन दोनों शब्दों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
आग की खोज को एक बहुत बड़ी खोज इसलिए माना जाता है क्योंकि इसने मानव जीवन में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया। इसके मुख्य कारण हैं:
- पेट की ज्वाला शांत करना: आग के आविष्कार से मनुष्य भोजन को पकाकर खाना सीख गया, जिससे भोजन अधिक सुपाच्य और स्वादिष्ट हो गया।
- ठंड से बचाव: आग ने मनुष्य को सर्दी से बचने का साधन प्रदान किया।
- जंगली जानवरों से सुरक्षा: आग का उपयोग मनुष्य अपनी रक्षा के लिए जंगली जानवरों को डराकर भगाने में करने लगा।
- प्रकाश का स्रोत: रात के अंधेरे को दूर करने के लिए आग एक महत्वपूर्ण प्रकाश स्रोत बनी।
खोज के पीछे की प्रेरणा:
इस खोज के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा 'पेट की ज्वाला' यानी भूख रही होगी। कच्चे मांस को खाने में होने वाली असुविधा और उसे पचाने की समस्या ने मनुष्य को भोजन पकाने के तरीके सोचने पर मजबूर किया होगा। साथ ही, कड़ाके की ठंड से शरीर को बचाने की ज़रूरत ने भी उसे आग की खोज के लिए प्रेरित किया होगा।
लेखक भदंत आनंद कौसल्यायन के अनुसार, वास्तविक अर्थों में 'संस्कृत व्यक्ति' वह है जो अपनी बुद्धि और विवेक के बल पर किसी नई चीज़ की खोज करता है या कोई नया आविष्कार करता है।
- एक संस्कृत व्यक्ति केवल आविष्कारक ही नहीं होता, बल्कि वह अपनी संतान को उस आविष्कार की जानकारी देकर उसे सभ्य भी बनाता है।
- उदाहरण के लिए, न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज की, इसलिए वह एक 'संस्कृत व्यक्ति' थे। उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग करके एक नए तथ्य का दर्शन किया।
- जिस व्यक्ति में ऐसी नई खोज करने की जितनी अधिक योग्यता होती है, वह उतना ही अधिक संस्कृत होता है। वह किसी भौतिक प्रेरणा या स्वार्थ के बिना, केवल मानव कल्याण के लिए चिंतन और आविष्कार करता है।
न्यूटन को 'संस्कृत मानव' कहने के पीछे यह तर्क दिया गया है कि उन्होंने अपनी बुद्धि और विवेक की शक्ति से गुरुत्वाकर्षण के रहस्य की खोज की थी। उन्होंने एक ऐसा नया सिद्धांत दुनिया को दिया जिसके बारे में पहले कोई नहीं जानता था। यह उनकी अपनी मौलिक खोज थी।
न्यूटन के सिद्धांतों को जानने वाले अन्य लोग संस्कृत इसलिए नहीं कहला सकते क्योंकि:
- वे केवल न्यूटन द्वारा दी गई जानकारी के ज्ञाता हैं, आविष्कारक नहीं।
- उन्होंने कोई नई मौलिक खोज नहीं की, बल्कि पहले से मौजूद ज्ञान को केवल समझा है।
- लेखक के अनुसार, भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी न्यूटन के ज्ञान को तो जानते हैं, पर उनमें वह 'संस्कृति' नहीं है जो न्यूटन में थी, क्योंकि उन्होंने न्यूटन की तरह कोई नया आविष्कार नहीं किया। वे केवल सभ्य कहला सकते हैं, संस्कृत नहीं।
सुई-धागे का आविष्कार निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हुआ होगा:
- शरीर को ढकने की आवश्यकता: मनुष्य ने जब अपने तन को ढकने और লজ্জা निवारण की ज़रूरत महसूस की होगी, तब उसे कपड़ों को जोड़ने के लिए किसी चीज़ की ज़रूरत पड़ी होगी।
- मौसम से सुरक्षा: सर्दी, गर्मी और बरसात जैसे मौसम के प्रभाव से अपने शरीर की रक्षा करने के लिए उसे सिले हुए वस्त्रों की आवश्यकता महसूस हुई होगी।
- सजावट की भावना: अपने शरीर को सुंदर दिखाने और सजाने की प्रवृत्ति ने भी मनुष्य को कपड़ों को विभिन्न तरीकों से सिलकर पहनने के लिए प्रेरित किया होगा।
शुरुआत में शायद दो कपड़ों के टुकड़ों को जोड़ने और जानवरों की खाल को सिलने के लिए इसका आविष्कार हुआ होगा।
'मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है' का अर्थ है कि संस्कृति किसी एक व्यक्ति या देश की धरोहर नहीं, बल्कि यह संपूर्ण मानव जाति की साझा विरासत है।
(क) जब मानव संस्कृति ने अपने एक होने का प्रमाण दिया:
- ज्ञान-विज्ञान का प्रसार: संसार के किसी भी कोने में हुआ कोई भी आविष्कार (जैसे आग, पहिया, या इंटरनेट) धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल जाता है और सभी मानव उसका लाभ उठाते हैं। यह दिखाता है कि संस्कृति बँटी हुई नहीं है।
- विचारों का आदान-प्रदान: कार्ल मार्क्स, महात्मा बुद्ध, या आइंस्टीन के विचार किसी एक देश तक सीमित नहीं रहे। उनके विचारों ने पूरी दुनिया के लोगों को प्रभावित किया और उनके जीवन में बदलाव लाए। यह संस्कृति की एकता का प्रमाण है।
(ख) जब मानव संस्कृति को विभाजित करने की चेष्टाएँ की गईं:
- वर्ण-व्यवस्था और भेदभाव: जब कुछ धर्मों और समाजों ने वर्ण (रंग) या जाति के आधार पर लोगों को श्रेष्ठ और निम्न घोषित किया और ज्ञान प्राप्त करने से रोका, तो यह संस्कृति को विभाजित करने का प्रयास था।
- साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद: जब शक्तिशाली देशों ने दूसरे देशों को गुलाम बनाया और अपनी संस्कृति को उन पर थोपने की कोशिश की, तो यह भी संस्कृति को बांटने का एक घृणित प्रयास था। हिटलर द्वारा यहूदियों पर किया गया अत्याचार इसका एक चरम उदाहरण है।
(क) मानव की जो योग्यता उससे आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार कराती है, हम उसे उसकी संस्कृति कहें या असंस्कृति?
आशय: इस पंक्ति का आशय यह है कि संस्कृति का संबंध हमेशा मानव कल्याण से होता है। जब मनुष्य की बुद्धि और योग्यता का प्रयोग मानवता को नष्ट करने वाले साधनों, जैसे परमाणु बम, हथियार आदि बनाने में होता है, तो उसे 'संस्कृति' नहीं कहा जा सकता। वह 'असंस्कृति' है। ऐसी योग्यता मानवता के लिए विनाशकारी है और यह संस्कृति के मूल उद्देश्य (कल्याण) के विरुद्ध है। सच्ची संस्कृति हमेशा रचनात्मक होती है, विनाशकारी नहीं।
(ख) संस्कृति के नाम से जिस कूड़े-करकट के ढेर का बोध होता है, वह न तो संस्कृति है न रक्षणीय वस्तु।
आशय: इस पंक्ति का आशय यह है कि हम अक्सर पुरानी परंपराओं, रूढ़ियों और रीति-रिवाजों को बिना सोचे-समझे 'संस्कृति' मानकर ढोते रहते हैं। लेखक के अनुसार, जो परंपराएं या रीति-रिवाज समय के साथ अनुपयोगी हो गए हैं और समाज के विकास में बाधा डाल रहे हैं, वे संस्कृति नहीं बल्कि 'संस्कृति के नाम पर कूड़ा-करकट' हैं। ऐसी चीज़ों की रक्षा करना मूर्खता है। हमें उन्हें त्यागकर आगे बढ़ना चाहिए। सच्ची संस्कृति वह है जो प्रगतिशील और कल्याणकारी हो।
Extra Important Questions (Board Style 2026-27)
- आंतरिक बनाम बाह्य: संस्कृति एक आंतरिक, सूक्ष्म गुण है, जबकि सभ्यता उसका बाह्य, स्थूल परिणाम है।
- कारण बनाम प्रभाव: संस्कृति आविष्कार का कारण है, और सभ्यता उस आविष्कार का प्रभाव या फल है।
लेखक के अनुसार, लेनिन एक संस्कृत व्यक्ति था। वह जानता था कि संसार के मजदूरों और गरीबों को सुखी देखने का जो स्वप्न वह देखता है, वह तभी पूरा हो सकता है जब वह स्वयं भी त्याग और साम्यवाद का पालन करे। वह केवल दूसरों को उपदेश नहीं देना चाहता था, बल्कि अपने आचरण से यह साबित करना चाहता था कि संसाधनों पर सबका समान अधिकार है। इसीलिए वह अपनी रोटी दूसरों को खिला देता था।
इस पंक्ति का आशय है कि किसी व्यक्ति की 'संस्कृति' का स्तर उसकी आविष्कार करने की क्षमता से मापा जाता है। जिस व्यक्ति में अपनी बुद्धि और विवेक से नई चीजों को खोजने की जितनी अधिक मौलिक योग्यता होती है, उसे उतना ही अधिक 'संस्कृत' माना जाता है। यह योग्यता केवल ज्ञान रटने से नहीं, बल्कि मौलिक चिंतन से आती है।
'संस्कृति' पाठ के माध्यम से लेखक भदंत आनंद कौसल्यायन यह गहरा संदेश देना चाहते हैं कि सच्ची संस्कृति का संबंध मानव कल्याण से है, न कि विनाश से। उनके मुख्य संदेश इस प्रकार हैं:
- सभ्यता और संस्कृति का अंतर समझें: लेखक चाहते हैं कि हम संस्कृति (आंतरिक योग्यता) और सभ्यता (बाहरी परिणाम) के बीच के सूक्ष्म अंतर को पहचानें। हमें केवल बाहरी भौतिक प्रगति को ही सब कुछ नहीं मान लेना चाहिए।
- मौलिक चिंतन को बढ़ावा दें: लेखक हमें केवल ज्ञान का उपभोक्ता बनने के बजाय ज्ञान का निर्माता बनने के लिए प्रेरित करते हैं। असली 'संस्कृत व्यक्ति' वही है जो नया सोचता और आविष्कार करता है, जैसे न्यूटन।
- मानव कल्याण सर्वोपरि है: लेखक का सबसे बड़ा संदेश यह है कि कोई भी योग्यता या आविष्कार तभी 'संस्कृति' कहलाने योग्य है जब वह मानवता का भला करे। यदि कोई अपनी बुद्धि का प्रयोग बम और हथियार बनाने में करता है, तो वह 'असंस्कृति' है।
- रूढ़ियों का त्याग करें: हमें संस्कृति के नाम पर पुरानी, अनुपयोगी और समाज को नुकसान पहुँचाने वाली परंपराओं को ढोने के बजाय उन्हें त्याग देना चाहिए।
इस प्रकार, लेखक हमें एक प्रगतिशील, कल्याणकारी और चिंतनशील समाज बनाने का संदेश देते हैं।
यह कथन पूरी तरह सत्य है। संस्कृति का मूल आधार ही 'मानव कल्याण' है। जब कोई आविष्कार या विचार इस भावना से अलग हो जाता है, तो वह विकृत होकर 'असंस्कृति' बन जाता है।
उदाहरण:
- आग का आविष्कार: जब आग का आविष्कार पेट की ज्वाला शांत करने, ठंड से बचने और रोशनी के लिए हुआ, तो वह संस्कृति का प्रतीक था। लेकिन जब उसी आग का उपयोग किसी का घर जलाने, लोगों को मारने या युद्ध में विनाश फैलाने के लिए किया जाने लगा, तो वह असंस्कृति बन गई।
- परमाणु ऊर्जा: जब परमाणु ऊर्जा का उपयोग बिजली बनाने, चिकित्सा (कैंसर इलाज) और अनुसंधान के लिए होता है, तो वह संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। लेकिन जब उसी ज्ञान का उपयोग परमाणु बम बनाने के लिए किया जाता है, जो पल भर में लाखों लोगों की जान ले सकता है, तो वह मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा और असंस्कृति का चरम रूप है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि कोई भी आविष्कार या योग्यता अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती। उसका उपयोग करने वाले की मंशा और उसका परिणाम ही यह तय करता है कि वह संस्कृति है या असंस्कृति। कल्याण की भावना के बिना संस्कृति विनाश का रूप ले लेती है।
'संस्कृति' पाठ के आधार पर बताइए:
- इन दोनों में से 'संस्कृत व्यक्ति' कौन है और क्यों?
इन दोनों में से व्यक्ति 'A' एक 'संस्कृत व्यक्ति' है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने अपनी बुद्धि और योग्यता का प्रयोग मानव कल्याण के लिए किया है। उसका बनाया हुआ ऐप किसानों की मदद कर रहा है, जो एक रचनात्मक और परोपकारी कार्य है। 'संस्कृति' पाठ के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी मौलिक सोच से मानव हित का कोई कार्य करता है, वही संस्कृत है। - व्यक्ति 'B' की योग्यता को आप संस्कृति कहेंगे या असंस्कृति? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
व्यक्ति 'B' की योग्यता को हम 'असंस्कृति' कहेंगे। यद्यपि वह बुद्धिमान है और उसके पास तकनीकी योग्यता है, लेकिन उसने अपनी इस योग्यता का प्रयोग दूसरों को नुकसान पहुँचाने, चोरी करने और समाज में अव्यवस्था फैलाने के लिए किया है। उसका कार्य विनाशकारी और अकल्याणकारी है। लेखक के अनुसार, जब योग्यता का संबंध कल्याण की भावना से टूट जाता है और वह विनाश का कारण बनती है, तो वह 'असंस्कृति' कहलाती है।
Common Mistakes to Avoid
Exam Preparation Tips for 2026-27
Frequently Asked Questions (FAQs)
Master संस्कृति 🌍
'संस्कृति' एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक अध्याय है जो हमें प्रगति और मानवता के सही अर्थ को समझाता है। उम्मीद है कि इस विस्तृत गाइड ने आपकी सभी शंकाओं को दूर कर दिया होगा। नियमित रूप से इन प्रश्नों का अभ्यास करें और आप निश्चित रूप से अच्छा प्रदर्शन करेंगे!
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