CBSE 2026-27 | क्षितिज भाग 2

Updated NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 14 (एक कहानी यह भी) with Important Questions (2026-27)

📚 Class 10 CBSE 🌍 Hindi – Kshitij ⚡ 3–5 Marks 🔵 Moderate

Hello, future toppers! This guide will help you master "एक कहानी यह भी," an inspiring chapter from your Kshitij textbook. We'll explore Mannu Bhandari's life, break down key themes, and provide detailed NCERT solutions and important questions to help you score full marks in your board exams.

📋Chapter Overview

📚

Chapter 14: एक कहानी यह भी – Quick Reference

Chapter Nameएक कहानी यह भी (Ek Kahani Yeh Bhi)
Authorमन्नू भंडारी (Mannu Bhandari)
SubjectHindi Course A – Kshitij (क्षितिज भाग 2)
Class / BoardCBSE Class 10
Target Year2026-27
Important TopicsAuthor's childhood, father-daughter relationship, women's empowerment, role in the freedom struggle.
Difficulty LevelModerate (Requires understanding of emotions and context)
Exam Weightage3–5 Marks (Short and Long Answer Questions)

🎯Learning Objectives

1

Understand the key events that shaped the author, Mannu Bhandari's, personality.

2

Analyze the complex and contradictory character of her father.

3

Explain the significant role of the Hindi lecturer, Sheela Aggarwal, in the author's life.

4

Describe the social and political atmosphere of India during the 1940s.

5

Write well-structured answers for your board exams with confidence.

💡Key Concepts and Characters

💡
Genre Note
This chapter is an आत्मकथांश (part of an autobiography). Understanding these key people and ideas is crucial.
मन्नू भंडारी
The narrator and author. The story follows her journey from a shy, under-confident girl to a vocal and active participant in the freedom movement.
पिता (The Father)
A central and complex character. He was a man of principles and ego (अहंवादी), proud yet insecure. He wanted his daughter to be successful but couldn't handle her public fame.
माँ (The Mother)
A traditional, patient, and selfless woman who held the family together without any expectations for herself. Her personality was the complete opposite of the father's.
शीला अग्रवाल
The author's Hindi lecturer. A fiery, intellectual, and inspiring woman who ignited the author's passion for the स्वतंत्रता आंदोलन (Freedom Movement).
Key Themes
Father-daughter dynamics, the journey to self-discovery, women's awakening and independence, and the influence of education.

📝Full NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 14 (Updated 2026-27)

अभ्यास प्रश्न (Exercise Questions)

✅ Model Answer

लेखिका मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व पर मुख्य रूप से दो लोगों का गहरा प्रभाव पड़ा:

  1. पिता का प्रभाव: लेखिका के पिता का प्रभाव उनके जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों में पड़ा।
    • सकारात्मक प्रभाव: उनके पिता ने ही उन्हें रसोई की दुनिया से निकालकर समाज और देश में हो रही घटनाओं के प्रति जागरूक बनाया। उन्होंने लेखिका को देश की राजनैतिक बहसों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनके अंदर आत्मविश्वास जागा।
    • नकारात्मक प्रभाव: पिता के शक्की और क्रोधी स्वभाव के कारण लेखिका के मन में हीन-भावना (inferiority complex) घर कर गई थी। वह अपने पिता के दोहरे चरित्र, यानी समाज में मान-सम्मान चाहना पर घर में रौब जमाने वाले स्वभाव से भी परेशान रहती थीं।
  2. प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का प्रभाव: शीला अग्रवाल लेखिका की हिंदी प्राध्यापिका थीं। उनका प्रभाव लेखिका के जीवन में एक नया मोड़ लेकर आया।
    • उन्होंने लेखिका की साहित्यिक समझ का दायरा बढ़ाया और अच्छी पुस्तकों को चुनकर पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
    • उन्होंने ही लेखिका के मन में दबी हुई देशभक्ति की भावना को जगाया और उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। शीला अग्रवाल ने लेखिका के अंदर साहस और आत्मविश्वास भरा।
✅ Model Answer

लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर इसलिए संबोधित किया है क्योंकि उनका मानना था कि रसोई में काम करना महिलाओं की प्रतिभा और क्षमता को नष्ट कर देता है। 'भटियारखाना' वह जगह होती है जहाँ भट्टी जलती है और हर चीज़ झोंक दी जाती है। पिता का मानना था कि रसोई में उलझकर लड़कियाँ अपनी रचनात्मकता और क्षमताओं को उसी भट्टी में झोंक देती हैं। वह चाहते थे कि उनकी बेटी रसोई के कामों तक सीमित न रहकर घर के बाहर की दुनिया को जाने, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा ले और अपनी एक अलग पहचान बनाए।

✅ Model Answer

वह घटना कॉलेज से जुड़ी थी। जब कॉलेज की प्रिंसिपल ने लेखिका के पिता को पत्र लिखकर उनकी आंदोलनात्मक गतिविधियों के बारे में शिकायत की और बताया कि क्यों न लेखिका को कॉलेज से निकाल दिया जाए, तो उनके पिता बहुत गुस्से में कॉलेज गए।

जब पिता कॉलेज से वापस लौटे तो वह गुस्से में नहीं, बल्कि बहुत खुश और गौरवान्वित थे। उन्होंने लेखिका को बताया कि वह प्रिंसिपल की बातें सुनते ही उन पर बरस पड़े और कहा, "यह तो पूरे देश की पुकार है... इस पर कोई कैसे रोक लगा सकता है भला?" उन्होंने यह भी कहा कि सारे कॉलेज की लड़कियाँ उनकी बेटी के एक इशारे पर बाहर आ जाती हैं।

अपने पिता के मुँह से अपनी प्रशंसा सुनकर और उनके बदले हुए व्यवहार को देखकर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हुआ और न ही अपने कानों पर। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि जो पिता उनकी गतिविधियों से नाराज़ रहते थे, आज वही उन पर गर्व कर रहे हैं।

✅ Model Answer

लेखिका और उनके पिता के बीच कई बातों पर वैचारिक टकराहट (clash of ideas) थी। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  • व्यक्तित्व और रंग: लेखिका का मानना था कि उनके पिता उनकी बड़ी बहन सुशीला को पसंद करते थे क्योंकि वह गोरी और सुंदर थी, जबकि लेखिका काली और मरियल थीं। इस वजह से लेखिका के मन में हीन-भावना पैदा हो गई।
  • स्वतंत्रता की सीमा: पिता चाहते थे कि लेखिका जागरूक बनें, देश की राजनीति में रुचि लें, पर यह सब घर की चारदीवारी के अंदर रहकर करें। वहीं, लेखिका सड़क पर नारे लगाते हुए, हड़तालें करवाते हुए अपनी स्वतंत्रता व्यक्त करना चाहती थीं, जो पिता को पसंद नहीं था।
  • विवाह की इच्छा: पिता लेखिका का विवाह अपनी पसंद के लड़के से करना चाहते थे, जबकि लेखिका ने अपनी पसंद के लड़के (राजेन्द्र यादव) से विवाह करने का फैसला किया। इस बात पर उनके बीच का टकराव चरम पर पहुँच गया।

संक्षेप में, पिता का स्वभाव विरोधाभासी (contradictory) था। वह आधुनिक बनना चाहते थे, पर अपनी पारंपरिक सोच और सामाजिक प्रतिष्ठा की चिंता को छोड़ नहीं पाते थे। यही लेखिका और उनके बीच के टकराव का मुख्य कारण था।

✅ Model Answer

'एक कहानी यह भी' आत्मकथ्य में 1942 से 1947 तक के स्वाधीनता आंदोलन के माहौल का सजीव चित्रण मिलता है। उस समय देश में हर तरफ आजादी का जुनून छाया हुआ था।

  • माहौल: शहरों में प्रभात-फेरियाँ, हड़तालें, जुलूस और भाषण आम बात हो गई थी। युवा, विशेषकर छात्र-छात्राएँ, इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे। जगह-जगह 'भारत छोड़ो' जैसे नारे गूँज रहे थे।
  • मन्नू जी की भूमिका: अपनी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल से प्रेरित होकर मन्नू भंडारी भी इस आंदोलन में सक्रिय हो गईं। पहले जो लेखिका सिर्फ किताबों में रुचि रखती थीं, अब वह भी सड़कों पर उतर आईं। उन्होंने:
    1. कॉलेज में भाषण दिए और छात्राओं को आंदोलन से जोड़ा।
    2. शहर में जुलूस निकाले और हड़तालों का नेतृत्व किया।
    3. नारेबाजी की और अपनी बात को निडर होकर रखा।

उनकी इन गतिविधियों के कारण उन्हें कॉलेज से निकालने की धमकी भी मिली और उनके पिता भी उनसे नाराज़ हुए। लेकिन उन्होंने साहस नहीं छोड़ा और देश की आज़ादी में एक युवा छात्रा के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

🚀Extra Important Questions (for CBSE Board Exam 2026-27)

❓ MCQs (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Difficulty: Easy
Q1. लेखिका के पिता ने सबसे बड़ी कमज़ोरी किसे बताया?
✅ Correct: (ख) यश-लिप्सा को (Desire for fame)
Difficulty: Easy
Q2. लेखिका को साहित्य की दुनिया में प्रवेश किसने कराया?
✅ Correct: (ग) शीला अग्रवाल ने
Difficulty: Medium
Q3. लेखिका के पिता का स्वभाव कैसा था?
✅ Correct: (ख) क्रोधी और शक्की (Angry and suspicious)
Difficulty: Medium
Q4. 'आजाद हिंद फौज' के मुकदमे के दौरान शहर में क्या होता था?
✅ Correct: (ग) बहसें, जुलूस और हड़तालें होती थीं
Difficulty: Hard
Q5. लेखिका के पिता के सबसे करीबी मित्र कौन थे, जिनके उकसाने पर पिता ने लेखिका की शादी की?
✅ Correct: (घ) अंबालाल जी
📌 Short Answer Questions (लघु उत्तरीय प्रश्न)
✅ Model Answer

लेखिका की माँ का व्यक्तित्व त्याग और धैर्य की प्रतिमूर्ति था। उनकी दो प्रमुख विशेषताएँ थीं:

  • धरती से भी अधिक धैर्य व सहनशक्ति: वह परिवार के हर सदस्य की उचित-अनुचित माँग को चुपचाप स्वीकार कर लेती थीं।
  • निःस्वार्थ सेवा-भाव: वह अपनी इच्छाओं का दमन करके केवल दूसरों के लिए जीती थीं।
✅ Model Answer

शीला अग्रवाल की जोशीली और क्रांतिकारी बातें लेखिका को बहुत पसंद आईं। वह साहित्य को सिर्फ पढ़ाती नहीं थीं, बल्कि छात्रों को उसमें जीना सिखाती थीं। उनकी बातों से लेखिका के खून में लावा बहने लगता था और उन्हें देश की आज़ादी के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिलती थी।

✅ Model Answer

लेखिका के पिता अक्सर उनकी तुलना उनकी गोरी और सुंदर बड़ी बहन सुशीला से करते थे। वह लेखिका के काले रंग और मरियल शरीर को लेकर ताने कसते थे। पिता के इस तुलनात्मक और उपेक्षापूर्ण व्यवहार ने लेखिका के मन में गहरी हीन-भावना पैदा कर दी।

📌 Long Answer Questions (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
✅ Model Answer

इस पंक्ति के माध्यम से लेखिका मन्नू भंडारी अपने बचपन और पारिवारिक स्थिति पर प्रकाश डालती हैं।

  • संदर्भ: यह वाक्य 'एक कहानी यह भी' पाठ से लिया गया है। यहाँ लेखिका अपने परिवार में अपने स्थान और अपनी बहन सुशीला के साथ होने वाली तुलना का वर्णन कर रही हैं।
  • व्याख्या: लेखिका बताती हैं कि वह अपने पाँच भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर थीं। उनकी बड़ी बहन सुशीला गोरी, सुंदर और स्वस्थ थी, जिसके कारण परिवार में, विशेषकर पिता की नजरों में, उसका अधिक महत्व था। लेखिका स्वयं को काला और दुबला-पतला मानती थीं, जिसके कारण उन्हें लगता था कि परिवार में उनकी कोई खास अहमियत नहीं है। 'बिना किसी खास महत्त्वकांक्षा' का अर्थ है कि उस समय उनके मन में कोई बड़ी इच्छा या लक्ष्य नहीं था, वह बस अपने हीन-भावना के साथ जी रही थीं। यह पंक्ति उनके आत्म-विश्लेषण और बचपन में महसूस की गई उपेक्षा को दर्शाती है।
✅ Model Answer

लेखिका के पिता का व्यक्तित्व विरोधाभासों से भरा था। वह एक ही समय में आधुनिक और परंपरावादी, उदार और संकीर्ण थे।

  • आधुनिकता बनाम संकीर्णता: वह चाहते थे कि उनकी बेटी देश-दुनिया के बारे में जाने, राजनैतिक बहसों में हिस्सा ले, लेकिन वह यह भी नहीं चाहते थे कि वह सड़कों पर लड़कों के साथ नारे लगाए। वह चाहते थे कि बेटी जागरूक बने, पर उसकी सक्रियता घर की चारदीवारी तक ही सीमित रहे।
  • यश-लिप्सा बनाम क्रोध: वह समाज में बहुत मान-सम्मान और प्रतिष्ठा चाहते थे। जब कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति उनकी बेटी की प्रशंसा करता, तो वह गर्व से भर जाते थे (जैसे प्रिंसिपल के सामने)। लेकिन जब वही बेटी अपनी मर्जी से कुछ करती, तो वह क्रोधित हो जाते थे।
  • सिद्धांत बनाम व्यवहार: वह विशिष्ट बनकर जीना चाहते थे और आर्थिक तंगी के बावजूद अपनी शान बनाए रखते थे, लेकिन अपनी बेटियों की स्वतंत्रता को लेकर उनके सिद्धांत बहुत सीमित थे।

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि लेखिका के पिता दोहरी मानसिकता में जीते थे, जो उस समय के कई भारतीय पिताओं का प्रतिनिधित्व करता है।

📌 Value-Based Question (मूल्यपरक प्रश्न)
✅ Model Answer

'एक कहानी यह भी' पाठ स्पष्ट रूप से दिखाता है कि किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व-निर्माण में उसके परिवार, समाज और शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

  • परिवार और माहौल: लेखिका के पिता ने उन्हें रसोई से निकालकर सामाजिक बहसों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनकी बौद्धिक चेतना जागी। वहीं, पिता के शक्की स्वभाव ने उनके मन में हीन-भावना भी पैदा की। इससे पता चलता है कि पारिवारिक माहौल हमारे आत्मविश्वास को बना और बिगाड़ सकता है।
  • शिक्षक की भूमिका: शीला अग्रवाल जैसी शिक्षिका ने लेखिका के जीवन की दिशा ही बदल दी। उन्होंने न केवल साहित्य का सही अर्थ समझाया, बल्कि उनके अंदर छिपे साहस और नेतृत्व क्षमता को भी उभारा। एक अच्छा शिक्षक केवल विषय नहीं पढ़ाता, बल्कि छात्र को जीवन जीना सिखाता है और उसकी सोच को एक नई दिशा देता है।

अतः, यह पाठ हमें सिखाता है कि एक सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल व अच्छे शिक्षक किसी भी व्यक्ति को एक साधारण इंसान से एक असाधारण व्यक्तित्व में बदल सकते हैं।

Common Mistakes Students Make

01
🔄
Confusing Father's Character
Students often label the father as purely 'good' or 'bad'. The key is to explain his contradictory nature with examples from the text.
02
🔍
Underestimating Sheela Aggarwal's Role
Don't just mention her name. Explain how she changed the author's life – by introducing her to new literature and igniting her political consciousness.
03
💬
General Answers
Avoid writing vague answers like "she participated in the freedom struggle." Be specific: "She organized strikes, gave speeches, and led processions in the streets of Ajmer."
04
Mixing Up Events
Create a mental timeline: childhood insecurities → father's initial encouragement → college life & Sheela Aggarwal's influence → active participation in protests → father's mixed reactions.

📚Exam Preparation Tips for 2026-27

01
📈
Character Sketches are Key
Prepare short notes on the characters of the Father, Mother, and Sheela Aggarwal. This is a very common question.
02
📋
Focus on Themes
Understand the main ideas: the struggle for identity, the father-daughter relationship, and the role of women in the freedom movement.
03
📍
Read the Chapter Twice
Read once for the story and a second time to highlight important lines and events.
04
📝
Practice Writing
Don't just read the solutions. Practice writing the answers to the long questions in your own words. Time yourself!

🅾Frequently Asked Questions (FAQs)

What is the main message of 'Ek Kahani Yeh Bhi'?
The main message is that our personality is shaped by our experiences, family, and mentors. It highlights a woman's journey to finding her own identity and voice amidst societal and family pressures.
Why was Mannu Bhandari's father proud and angry at the same time?
He was proud that his daughter was becoming famous and influential, which satisfied his ego. However, he was angry because she was achieving this by breaking traditional norms, like protesting on the streets, which he felt was against his family's reputation.
Who was Sheela Aggarwal and what was her influence on the author?
Sheela Aggarwal was Mannu Bhandari's Hindi lecturer in college. She was a dynamic and patriotic woman who introduced the author to great literary works and inspired her to actively participate in India's freedom struggle.
Is 'Ek Kahani Yeh Bhi' a full autobiography?
No, it is not a full autobiography. It is an 'आत्मकथांश' (a part of an autobiography), focusing specifically on the formative years that shaped the author's personality and writing career.
Why is this chapter important for CBSE Class 10 exams?
This chapter is important as it often features in board exams with questions related to character analysis, thematic interpretation, and the socio-political context of the pre-independence era. It tests a student's ability to understand complex human emotions and historical settings.

Master एक कहानी यह भी 🌍

"एक कहानी यह भी" is more than just a story; it's a lesson in courage, identity, and the power of influence. We hope this detailed guide, with complete NCERT solutions and important questions, has cleared all your doubts. All the best!

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