Updated NCERT Solutions for Netaji ka Chashma Class 10 | Important Questions 2026-27
Welcome, students! Getting ready for your CBSE Class 10 Hindi board exams? You've come to the right place. This guide provides updated NCERT Solutions and important questions for Chapter 10, "नेताजी का चश्मा". We'll break down this beautiful story, making it easy to understand and score full marks!
Chapter at a Glance
Chapter 10: नेताजी का चश्मा – Quick Reference
| Chapter Name | नेताजी का चश्मा (Netaji ka Chashma) |
| Author | स्वयं प्रकाश (Swayam Prakash) |
| Subject | Hindi Course A – Kshitij (क्षितिज भाग 2) |
| Class / Board | CBSE Class 10 |
| Target Year | 2026-27 |
| Important Topics | देशभक्ति की भावना (Patriotism), कैप्टन का चरित्र-चित्रण (Character Sketch of Captain), हालदार साहब की जिज्ञासा (Haldar Sahab's Curiosity), पानवाले का रेखाचित्र (Panwala's character), लेखक का संदेश (Author's Message) |
| Difficulty Level | Easy to Moderate |
| Exam Weightage | 3–5 Marks |
Key Facts – Quick Story Elements
Learning Objectives
Understand the true meaning of patriotism (देशभक्ति) in everyday life.
Analyze the characters of Captain Chashmewala, Haldar Sahab, and the Panwala.
Explain the central message and theme of the story "नेताजी का चश्मा".
Write detailed and high-scoring answers for your board exams.
Identify the satirical and emotional elements used by the author, Swayam Prakash.
Key Concepts & Characters
Extra MCQs – Practice & Self-Test
Full NCERT Solutions – नेताजी का चश्मा
चश्मेवाले को लोग 'कैप्टन' इसलिए कहते थे क्योंकि उसके अंदर देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। वह कोई सेनानी नहीं था, पर उसका व्यवहार किसी सैनिक जैसा ही था।
- नेताजी के प्रति सम्मान: उसके मन में स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति अपार श्रद्धा और सम्मान था। उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति अच्छी नहीं लगती थी, मानो इससे नेताजी को असुविधा हो रही हो।
- देशभक्ति का कार्य: वह अपनी छोटी सी दुकान से एक चश्मा नेताजी की मूर्ति पर लगा देता था। यह उसका देश के प्रति प्रेम और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान दिखाने का अपना तरीका था।
- 'कैप्टन' नाम: लोगों ने उसकी इसी देशभक्ति की भावना को देखकर, शायद मज़ाक में या सम्मान में, उसे 'कैप्टन' कहना शुरू कर दिया था। उसका यह नाम उसकी देशप्रेम की पहचान बन गया था।
(क) हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?
हालदार साहब यह सोचकर मायूस हो गए थे कि कैप्टन चश्मेवाले की मृत्यु हो चुकी है। अब कस्बे में ऐसा कोई नहीं है जिसके मन में नेताजी की मूर्ति के लिए सम्मान हो और वह उस पर चश्मा लगाए। उन्हें लगा कि लोगों में देशभक्ति की भावना समाप्त हो गई है और अब मूर्ति बिना चश्मे के ही रहेगी।
(ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?
मूर्ति पर लगा सरकंडे का चश्मा यह उम्मीद जगाता है कि देश में देशभक्ति की भावना अभी जीवित है, खासकर नई पीढ़ी में। यह चश्मा किसी बच्चे ने बनाकर लगाया था। यह इस बात का प्रतीक है कि बड़ों के साथ-साथ बच्चों के मन में भी अपने देश के नायकों के प्रति सम्मान और प्रेम है। यह देश के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद जगाता है।
(ग) हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?
हालदार साहब यह देखकर भावुक हो उठे कि किसी बच्चे ने अपनी छोटी सी कोशिश से नेताजी की मूर्ति को बिना चश्मे के नहीं रहने दिया। जिस बात को वे बड़े लोग भूल चुके थे, उस ज़िम्मेदारी को एक बच्चे ने निभाया। यह देखकर उन्हें एहसास हुआ कि देशप्रेम की यह लौ आने वाली पीढ़ियों में भी जल रही है। इस छोटी-सी बात में देश के प्रति महान प्रेम और आशा छिपी थी, जिसने उन्हें भावुक कर दिया।
इस पंक्ति का आशय यह है कि हालदार साहब उन लोगों पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं जिनमें देशभक्ति की भावना खत्म हो चुकी है।
- देशभक्तों का अपमान: वे सोचते हैं कि जब कोई قوم (राष्ट्र) अपने उन महान लोगों का सम्मान नहीं करती, जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ (घर, परिवार, जवानी, जीवन) बलिदान कर दिया, तो उस राष्ट्र का भविष्य अंधकारमय है। पानवाले द्वारा कैप्टन का मज़ाक उड़ाना इसी मानसिकता का प्रतीक है।
- स्वार्थी लोग: ऐसे लोग देशभक्तों पर हँसते हैं और केवल अपने स्वार्थ के बारे में सोचते हैं। वे हर मौके पर "बिकने" के लिए, यानी अपने छोटे-छोटे फायदों के लिए देशहित को भी दाँव पर लगा सकते हैं।
- चिंता: हालदार साहब को ऐसे लोगों की स्वार्थी और संवेदनहीन प्रवृत्ति देखकर देश के भविष्य की चिंता होती है।
पानवाला कहानी का एक महत्वपूर्ण और रोचक पात्र है। उसका रेखाचित्र इस प्रकार है:
- शारीरिक बनावट: पानवाला एक काला, मोटा और खुशमिजाज आदमी था। उसके मुँह में हमेशा पान भरा रहता था, जिसके कारण उसके दाँत लाल-काले हो गए थे। जब वह हँसता था तो उसकी तोंद थिरकती थी।
- स्वभाव: वह स्वभाव से बातूनी और मज़ाकिया था। वह हर बात को मज़ाक के अंदाज़ में कहता था, जैसे कैप्टन के बारे में बताते हुए वह कहता है "वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में! पागल है पागल!"
- संवेदनशील हृदय: ऊपरी तौर पर वह कठोर और संवेदनहीन लगता है, लेकिन अंदर से वह एक भावुक इंसान है। कैप्टन की मृत्यु की खबर देते समय उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं और वह अपनी धोती के सिरे से आँखें पोंछता है। यह घटना उसके संवेदनशील पक्ष को उजागर करती है।
इस प्रकार, पानवाला एक सामान्य भारतीय नागरिक का प्रतीक है जो बाहर से भले ही उदासीन दिखे, पर उसके मन में भी भावनाएँ और संवेदनाएँ होती हैं।
कैप्टन के प्रति पानवाले की यह टिप्पणी बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना और दुखद है। यह टिप्पणी दर्शाती है कि पानवाला कैप्टन की देशभक्ति की गहराई को समझने में असमर्थ है।
- असंवेदनशील टिप्पणी: किसी की शारीरिक अक्षमता (लँगड़ापन) का मज़ाक उड़ाना बहुत गलत है। पानवाले को ऐसा नहीं करना चाहिए था।
- देशभक्ति का अपमान: पानवाला कैप्टन के देशप्रेम को "पागलपन" कहता है, जो कि सरासर गलत है। कैप्टन का कार्य पागलपन नहीं, बल्कि सच्ची देशभक्ति का प्रतीक था। वह अपने तरीके से देश के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहा था।
- सतही सोच: यह टिप्पणी पानवाले की सतही सोच को दर्शाती है। वह व्यक्ति के बाहरी रूप और शारीरिक स्थिति को देखता है, उसके अंदर की भावनाओं और महान विचारों को नहीं।
मेरी प्रतिक्रिया में, मैं पानवाले की इस बात का कड़ा विरोध करूँगा/करूँगी। हमें किसी भी व्यक्ति का, विशेषकर उसकी शारीरिक कमी का, मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए और देशभक्ति जैसी पवित्र भावना को पागलपन कहना निंदनीय है।
Extra Board Exam Questions (2026-27)
हालदार साहब को पानवाले द्वारा कैप्टन चश्मेवाले को 'लँगड़ा' और 'पागल' कहना बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कैप्टन अपनी सीमित क्षमता के बावजूद देशभक्ति का एक अनूठा कार्य कर रहा था, जो सम्मान के योग्य था। उसका मज़ाक उड़ाना एक सच्चे देशभक्त का अपमान करने जैसा था।
कैप्टन एक चश्मे बेचने वाला था। जब कोई ग्राहक आता और उसे वैसा ही फ्रेम चाहिए होता जैसा मूर्ति पर लगा है, तो कैप्टन मूर्ति से वह फ्रेम उतारकर ग्राहक को दे देता था और मूर्ति पर दूसरा नया फ्रेम लगा देता था। इसलिए मूर्ति का चश्मा बार-बार बदल जाता था।
कैप्टन की मृत्यु का समाचार सुनकर हालदार साहब बहुत दुखी और निराश हो गए। उन्हें लगा कि अब नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाने वाला कोई नहीं रहा और कस्बे के लोगों में देशभक्ति की भावना मर चुकी है।
"नेताजी का चश्मा" कहानी के माध्यम से लेखक स्वयं प्रकाश एक बहुत गहरा और महत्वपूर्ण संदेश देना चाहते हैं।
- देशभक्ति का व्यापक अर्थ: लेखक बताते हैं कि देशभक्ति केवल सीमाओं पर लड़ने या बड़े-बड़े काम करने तक सीमित नहीं है। देश के निर्माण में सभी नागरिक अपने-अपने तरीके से योगदान दे सकते हैं।
- नागरिकों का कर्तव्य: देश के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह देश को बनाने वाले महापुरुषों और प्रतीकों का सम्मान करे। कैप्टन का छोटा सा कार्य इसी कर्तव्य-बोध का प्रतीक है।
- नई पीढ़ी में आशा: कहानी के अंत में बच्चे द्वारा सरकंडे का चश्मा लगाना यह संदेश देता है कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है और नई पीढ़ी में भी देशभक्ति की भावना जीवित है।
- सच्ची देशभक्ति: लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि सच्ची देशभक्ति दिखावे या शारीरिक शक्ति की मोहताज नहीं होती। एक साधारण, गरीब और शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति भी एक सच्चा देशभक्त हो सकता है।
हालदार साहब "नेताजी का चश्मा" कहानी के एक प्रमुख पात्र हैं। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- सच्चे देशभक्त: हालदार साहब के मन में देश और देश के नायकों के प्रति गहरा सम्मान है। वे नेताजी की मूर्ति को बहुत ध्यान से देखते हैं और चश्मे के बदलने पर उत्सुक होते हैं।
- जिज्ञासु स्वभाव: वे बहुत जिज्ञासु हैं। जब वे मूर्ति पर बदलते चश्मे को देखते हैं, तो उनकी जिज्ञासा बढ़ जाती है और वे पानवाले से इसका कारण पूछते हैं।
- भावुक और संवेदनशील: वे एक भावुक और संवेदनशील व्यक्ति हैं। जब वे कैप्टन की देशभक्ति के बारे में जानते हैं तो उनके प्रति सम्मान से भर जाते हैं। कैप्टन की मृत्यु की खबर सुनकर दुखी होते हैं और अंत में बच्चे द्वारा लगाए गए सरकंडे के चश्मे को देखकर भावुक हो जाते हैं।
- विचारशील व्यक्ति: वे समाज और देश के बारे में सोचते हैं। वे उन लोगों पर चिंतित होते हैं जो देशभक्तों का मज़ाक उड़ाते हैं।
दिए गए परिदृश्य और "नेताजी का चश्मा" पाठ के आधार पर, कैप्टन और आज के कुछ लोगों के चरित्र में जमीन-आसमान का अंतर है:
अंतर:
- कैप्टन: कैप्टन के मन में राष्ट्रीय प्रतीक (नेताजी की मूर्ति) के प्रति गहरा सम्मान और जिम्मेदारी का भाव था। वह अपनी छोटी सी आमदनी और कमजोर शरीर के बावजूद उस प्रतीक की गरिमा बनाए रखने की पूरी कोशिश करता था।
- आज के लोग: इसके विपरीत, कुछ लोग राष्ट्रीय प्रतीकों और संपत्ति को महत्वहीन समझते हैं। वे स्वार्थ और लापरवाही के कारण देश को नुकसान पहुँचाते हैं। उनमें जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना की कमी है।
प्रेरणा:
हमें कैप्टन चश्मेवाले से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि देशभक्ति के लिए किसी पद, धन या शक्ति की आवश्यकता नहीं होती। सच्ची देशभक्ति हमारे छोटे-छोटे कार्यों में झलकती है। हमें भी अपने आसपास के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए, सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना चाहिए और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे कैप्टन ने नेताजी की मूर्ति के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझी।
Common Mistakes to Avoid
Exam Preparation Tips for 2026-27
Frequently Asked Questions (FAQs)
Master नेताजी का चश्मा 🌍
"नेताजी का चश्मा" एक बहुत ही प्रेरणादायक कहानी है जो हमें सिखाती है कि देशप्रेम की भावना हर दिल में हो सकती है। यह अध्याय बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस लेख में दिए गए NCERT Solutions, अतिरिक्त प्रश्न और टिप्स आपकी तैयारी को और भी मजबूत करेंगे। All the best!
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