CBSE 2026 | कृतिका भाग 2

NCERT Solutions for Class 10 Kritika Chapter 4: एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!

📚 Class 10 CBSE 🇮🇳 Hindi Kritika ✏️ 2–4 Marks 🔵 Moderate

Welcome, students! This guide provides complete NCERT solutions and important questions for Class 10 Hindi Kritika's Chapter 4, "एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!". This chapter is a beautiful story of love, sacrifice, and patriotism set during India's freedom struggle. Understanding its deep emotions is crucial for your board exams.

📋Chapter Overview: एक नज़र में

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Chapter 4: एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! – Quick Reference

Chapter Nameएही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!
Authorशिवप्रसाद मिश्र 'रुद्र' (Shivprasad Mishra 'Rudra')
SubjectHindi Course A – Kritika (कृतिका भाग 2)
Board / ClassCBSE Class 10
Target Year2026
Key TopicsPatriotism, Sacrifice, Role of artists in freedom struggle, Social stigma
Difficulty LevelModerate
Exam Weightage2–4 Marks (Expected)

🎯Learning Objectives (सीखने के उद्देश्य)

1

Understand the historical context of Benaras (Varanasi) during the Swadeshi Movement.

2

Analyze the complex characters of दुलारी (Dulari) and टुन्नू (Tuni).

3

Explain the central theme of patriotism triumphing over personal love and loss.

4

Appreciate the contribution of marginalized sections of society to India's freedom struggle.

5

Decode the symbolic meaning of the title and key events in the story.

💡Key Concepts and Characters (मुख्य पात्र और अवधारणाएँ)

दुलारी (Dulari)
A famous singer and dancer from Varanasi. Strong-willed, proud, but with a patriotic and sensitive heart.
टुन्नू (Tuni)
A young poet and freedom fighter, deeply in love with Dulari. Idealistic and sacrifices his life for the nation.
फेकू सरदार
A local strongman and a police informer for the British.
देशभक्ति
The core theme. The story shows how love for the country was more important than personal feelings.
Patriotism
स्वदेशी आंदोलन
The historical background, involving the boycott of foreign goods (like clothes) and promoting Indian goods (Khadi).
झुलनी (Jhulani)
A type of nose-ring. Symbolically represents Dulari's immense loss (losing Tuni).

Extra MCQs – Practice & Self-Test

Difficulty: Easy
Q1. टुन्नू ने दुलारी को भेंट में क्या दिया था?
✅ Correct: (d) गाँधी आश्रम में कती सूत की साड़ी
Difficulty: Medium
Q2. 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
✅ Correct: (d) ख और ग दोनों
Difficulty: Easy
Q3. दुलारी ने विदेशी कपड़ों के ढेर पर क्या फेंका था?
✅ Correct: (c) अपनी नई बंडी सिल्क की साड़ियों का बंडल
Difficulty: Easy
Q4. टुन्नू की मृत्यु कैसे हुई?
✅ Correct: (c) पुलिस के सिपाहियों द्वारा पीटे जाने से
Difficulty: Easy
Q5. कहानी किस शहर की पृष्ठभूमि पर आधारित है?
✅ Correct: (d) काशी (बनारस)

📝Full NCERT Solutions – All Exercise Questions

✅ Model Answer

यह कहना बिल्कुल सच है कि भारत की आज़ादी की लड़ाई में समाज के हर वर्ग ने योगदान दिया, जिसमें वे लोग भी शामिल थे जिन्हें समाज अक्सर उपेक्षित या नीची नज़रों से देखता था। 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' कहानी में लेखक शिवप्रसाद मिश्र 'रुद्र' ने इसी वर्ग के योगदान को बहुत खूबसूरती से उभारा है।

कहानी के दो मुख्य पात्र, दुलारी और टुन्नू, इसी उपेक्षित वर्ग से आते हैं।

  1. दुलारी का योगदान: दुलारी एक गौनहारिन (पेशेवर गायिका) है, जिसे उस समय का समाज सम्मान की दृष्टि से नहीं देखता था। इसके बावजूद, उसके मन में देश के प्रति गहरा प्रेम और सम्मान था।
    • जब विदेशी कपड़ों की होली जलाई जा रही थी, तो उसने अपनी कीमती रेशमी साड़ियों के बंडल में से एक नई कोरी साड़ी जुलूस में फेंक दी।
    • उसने टुन्नू द्वारा भेंट की गई खાદੀ की साड़ी को सहेज कर रखा और टुन्नू की शहादत के बाद उसी साड़ी को पहनकर उसकी मृत्यु पर शोक और गर्व दोनों व्यक्त किया। यह उसका मौन लेकिन शक्तिशाली विरोध था।
  2. टुन्नू का योगदान: टुन्नू एक गरीब, उभरता हुआ शायर और गायक था। वह आज़ादी के आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेता था।
    • वह प्रभात फेरियों में हिस्सा लेता था और देश प्रेम के गीत गाता था।
    • उसने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार के लिए अपनी जान दे दी। अंग्रेज़ सिपाहियों ने उसे बेरहमी से मारकर उसकी हत्या कर दी।

इस प्रकार, लेखक ने दिखाया है कि देशभक्ति किसी वर्ग या पेशे की मोहताज नहीं होती। दुलारी और टुन्नू जैसे 'उपेक्षित' लोगों ने भी अपनी कला, अपनी भावनाओं और अपने प्राणों की आहुति देकर स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

✅ Model Answer

दुलारी को सभी कठोर दिल वाली और स्वाभिमानी महिला समझते थे, क्योंकि वह अपने पेशे की मजबूरियों के कारण अपनी भावनाओं को खुलकर प्रकट नहीं करती थी। लेकिन टुन्नू की मृत्यु की खबर सुनकर वह बुरी तरह विचलित हो उठी। इसके कई कारण थे:

  • कला का सम्मान: दुलारी स्वयं एक सच्ची कलाकार थी और वह टुन्नू की काव्य-प्रतिभा का सम्मान करती थी। टुन्नू की शायरी और गायकी में जो सच्चाई और भाव था, उसने दुलारी के मन को छू लिया था।
  • निस्वार्थ प्रेम: टुन्नू का प्रेम वासना से रहित, सच्चा और निस्वार्थ था। उसने दुलारी को एक देवी की तरह सम्मान दिया, न कि केवल एक गौनहारिन की तरह। इस पवित्र प्रेम ने दुलारी के कठोर बाहरी आवरण को भेद दिया था।
  • देशभक्ति की भावना: टुन्नू ने अपना जीवन देश के लिए बलिदान कर दिया था। उसकी इस शहादत ने दुलारी के मन में उसके प्रति सम्मान और भी बढ़ा दिया। उसे दुख इस बात का था कि देश के लिए मरने वाले एक सच्चे सपूत को उसने ठीक से पहचाना नहीं।
  • अपराध बोध: दुलारी को यह सोचकर दुख हो रहा था कि उसने टुन्नू को हमेशा दुत्कारा और उसके प्रेम को स्वीकार नहीं किया। अब जब टुन्नू हमेशा के लिए चला गया था, तो उसे अपनी गलती का एहसास हो रहा था।

इन्हीं सब कारणों से, जो भावनाएँ दुलारी ने अब तक अपने दिल में दबा रखी थीं, वे टुन्नू की मृत्यु की खबर सुनकर आँसुओं के रूप में फूट पड़ीं और वह पूरी तरह से विचलित हो गई।

✅ Model Answer

कजली-दंगल जैसे आयोजनों के कई सामाजिक और सांस्कृतिक उद्देश्य होते थे:

  1. कला का प्रदर्शन: यह कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा (गायन, काव्य) दिखाने का एक मंच था। इससे लोक-कला को बढ़ावा मिलता था।
  2. मनोरंजन: आम जनता के लिए यह मनोरंजन का एक प्रमुख साधन था। लोग अपने दैनिक जीवन के तनाव से दूर होकर इन आयोजनों का आनंद लेते थे।
  3. सामाजिक मेलजोल: ऐसे आयोजन लोगों को एक-दूसरे से मिलने-जुलने और सामाजिक संबंध मजबूत करने का अवसर प्रदान करते थे।
  4. प्रतिस्पर्धा और सम्मान: इसमें दो दलों के बीच काव्यात्मक और संगीतमय मुकाबला होता था, जिससे कला में और निखार आता था। जीतने वाले दल को सम्मान मिलता था।

कुछ अन्य पारंपरिक लोक-आयोजन:

  • रामलीला: भगवान राम के जीवन का नाट्य रूपांतरण।
  • नौटंकी: उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध लोक-नाट्य, जिसमें संगीत और संवाद दोनों होते हैं।
  • बिरहा: पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार का एक लोक-गायन, जिसमें वीर रस या श्रृंगार रस की कथाएँ गाई जाती हैं।
  • आल्हा-गायन: बुंदेलखंड क्षेत्र में गाए जाने वाले वीर-रस के गीत, जो आल्हा-ऊदल की वीरता का वर्णन करते हैं।
  • जात्रा: बंगाल का एक प्रसिद्ध लोक-थिएटर।
✅ Model Answer

दुलारी भले ही समाज के तथाकथित 'विशिष्ट' दायरे से बाहर थी, लेकिन उसका चरित्र कई महान गुणों से भरा हुआ था। उसकी प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • स्वाभिमानी: दुलारी बहुत स्वाभिमानी थी। वह किसी की दया पर नहीं जीती थी और न ही किसी के सामने झुकती थी। फेकू सरदार जैसे প্রভাবশালী व्यक्ति के उपहारों को भी वह तिरस्कारपूर्वक लौटा देती थी।
  • कला-प्रेमी: वह एक सच्ची कलाकार थी और कला का सम्मान करती थी। यही कारण था कि वह टुन्नू की काव्य-प्रतिभा से प्रभावित थी।
  • देशभक्त: उसके हृदय में देश के प्रति गहरा प्रेम था। उसने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार आंदोलन में अपनी कीमती साड़ी दान कर दी और टुन्नू की दी हुई खાદੀ की साड़ी को उसकी शहादत के बाद पहनकर अपना समर्थन और गर्व प्रकट किया।
  • भावुक और संवेदनशील: बाहर से वह कठोर दिखती थी, पर अंदर से वह बहुत भावुक थी। टुन्नू का सच्चा प्रेम और उसकी शहादत उसे अंदर तक झकझोर देती है और वह फूट-फूट कर रो पड़ती है।
  • साहसी और निडर: वह किसी से डरती नहीं थी। उसने सरेआम पुलिस के मुखबिर फेकू सरदार का अपमान किया और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अपना मौन विरोध दर्ज कराया।
✅ Model Answer

दुलारी और टुन्नू के बीच का संबंध सामान्य प्रेम संबंध नहीं था; यह कला के धागे से बुना हुआ एक गहरा रिश्ता था। उनकी कला और उनके कलाकार मन ने इस प्रेम को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

  1. कला के माध्यम से परिचय: दुलारी और टुन्नू की पहली मुलाकात और पहचान 'कजली दंगल' के मंच पर हुई थी। टुन्नू ने अपने काव्य और गायन से दुलारी को चुनौती दी और उसे प्रभावित किया। यहीं से उनके रिश्ते की नींव पड़ी।
  2. समानधर्मा होना: दोनों ही कलाकार थे और एक-दूसरे की कला का सम्मान करते थे। टुन्नू, दुलारी की गायन कला का प्रशंसक था, तो दुलारी, टुन्नू की काव्य प्रतिभा की कायल थी। यह कलात्मक समानता उन्हें एक-दूसरे के करीब लाई।
  3. भावनाओं की अभिव्यक्ति: कलाकारों का मन सामान्य लोगों से अधिक संवेदनशील होता है। टुन्नू ने अपने प्रेम को अपनी शायरी के माध्यम से व्यक्त किया। दुलारी, जो अपने पेशे के कारण अपनी भावनाओं को दबाकर रखती थी, टुन्नू की कला में व्यक्त सच्चाई और पवित्रता को समझ गई।
  4. प्रेम का उदात्त रूप: टुन्नू का प्रेम शारीरिक आकर्षण से परे, एक कलाकार का दूसरे कलाकार के प्रति सम्मान और आराधना का भाव था। उसने दुलारी को शरीर के रूप में नहीं, बल्कि उसकी कला और आत्मा के रूप में देखा। प्रेम के इसी उदात्त (sublime) रूप ने दुलारी को गहराई से प्रभावित किया।

इसलिए, यह कहना उचित है कि उनका प्रेम उनकी कला की ही उपज था, जो कला के मंच पर जन्मा और कलात्मक सम्मान के आधार पर विकसित हुआ।

🚀Extra Board Exam Questions (2026)

📌 Short Answer Questions
✅ Model Answer

दुलारी ने टुन्नू द्वारा दी गई खादी की साड़ी को पहले तो अस्वीकार कर दिया, लेकिन बाद में उसे सहेज कर अपने संदूक में रख लिया। टुन्नू की शहादत के बाद, उसने उसी साड़ी को पहनकर अपना शोक, सम्मान और ब्रिटिश हुकूमत के प्रति विरोध प्रकट किया।

✅ Model Answer

फेकू सरदार एक पुलिस का मुखबिर और दुलारी पर अधिकार जमाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति था। दुलारी उसे इसलिए नापसंद करती थी क्योंकि वह देशद्रोही था, घमंडी था और प्रेम की जगह अधिकार और रौब दिखाना चाहता था, जो दुलारी के स्वाभिमानी स्वभाव के बिल्कुल विरुद्ध था।

✅ Model Answer

इस कथन का आशय है कि टुन्नू केवल उम्र में छोटा था, लेकिन अपनी कला, समझदारी और देशभक्ति की भावना में वह बहुत परिपक्व और श्रेष्ठ था। उसने अपने प्रेम और बलिदान से दुलारी जैसी अनुभवी और कठोर महिला का भी हृदय परिवर्तन कर दिया, इसलिए वह वास्तव में 'उस्ताद' था।

✅ Model Answer

'कजली' एक लोक-गायन शैली है जो कहानी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी कजली-दंगल के माध्यम से दुलारी और टुन्नू एक-दूसरे की कलात्मक प्रतिभा से परिचित होते हैं। यह उनकी प्रेम कहानी की शुरुआत का प्रतीक है।

✅ Model Answer

टुन्नू के चरित्र की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  1. प्रखर देशभक्त: वह देश की आज़ादी के लिए समर्पित था और इसी कारण उसने अपने प्राणों का बलिदान कर दिया।
  2. सच्चा प्रेमी: उसका प्रेम वासना रहित और पवित्र था। वह दुलारी की कला और उसके व्यक्तित्व का सम्मान करता था।
📌 Long Answer Questions
✅ Model Answer

दुलारी 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' कहानी की नायिका है। वह काशी की एक प्रसिद्ध गौनहारिन है, जो अपने स्वाभिमान, साहस और कला-प्रेम के लिए जानी जाती है।

  • बाहरी व्यक्तित्व: बाह्य रूप से, वह कठोर, स्वाभिमानी और मुँहफट है। वह किसी के दबाव में नहीं आती और गलत बात का तुरंत विरोध करती है, जैसा कि वह फेकू सरदार के साथ करती है।
  • आंतरिक व्यक्तित्व: अंदर से, वह एक संवेदनशील और भावुक स्त्री है। टुन्नू का निश्छल प्रेम और उसकी काव्य प्रतिभा उसके दिल को छू जाती है।
  • देशभक्ति: उसके चरित्र का सबसे उज्ज्वल पक्ष उसकी देशभक्ति है। वह विदेशी कपड़ों के बहिष्कार का समर्थन करती है और टुन्नू की शहादत पर गर्व करती है। खादी की साड़ी पहनकर वह मौन रूप से अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करती है।

संक्षेप में, दुलारी एक ऐसी सशक्त स्त्री का प्रतीक है जो सामाजिक रूप से उपेक्षित होते हुए भी चारित्रिक रूप से अत्यंत मजबूत, देशभक्त और स्वाभिमानी है।

✅ Model Answer

कहानी का शीर्षक 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' एक प्रसिद्ध कजली गीत की पंक्ति है, जिसका शाब्दिक अर्थ है, 'हे राम! इसी जगह मेरी नाक की नथ (झुलनी) खो गई है'। यह शीर्षक कहानी के लिए प्रतीकात्मक और अत्यंत सार्थक है।

  • झुलनी का प्रतीक: 'झुलनी' या नाक की नथ एक सुहागिन स्त्री के लिए उसके सुहाग और सम्मान का प्रतीक है। यहाँ, यह दुलारी के लिए सबसे कीमती वस्तु का प्रतीक है।
  • 'एही ठैयाँ' का प्रतीक: 'इसी जगह' से तात्पर्य उस स्थान से है जहाँ विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई और जहाँ टुन्नू को शहीद किया गया। यह स्थान दुलारी के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन जाता है।
  • भावार्थ: जब दुलारी को टुन्नू की मृत्यु का समाचार मिलता है, तो उसे लगता है कि उसने अपनी सबसे कीमती चीज़—टुन्नू का सच्चा, निस्वार्थ प्रेम और सम्मान—हमेशा के लिए खो दिया है। टुन्नू उसके लिए किसी 'झुलनी' से कम नहीं था। इस प्रकार, शीर्षक दुलारी के हृदय की पीड़ा, उसके गहरे शोक और अपार क्षति को व्यक्त करता है। यह शीर्षक कहानी के केंद्रीय भाव को पूरी तरह से समेट लेता है, इसलिए यह पूर्णतः सार्थक है।
📌 Case-Based / Value-Based Questions
✅ Model Answer
"दुलारी ने अपनी दोनों बाँहें फैलाकर उस रेशमी साड़ी के नए बंडल को जुलूस में फेंक दिया। लोगों ने आश्चर्य से चीखकर उस दान का स्वागत किया। ... टुन्नू की दी हुई धोती आज भी उसके संदूक में पड़ी थी। उसने उसे पहना तो नहीं था, पर निकालकर देख ज़रूर लिया था।"
  1. दुलारी ने रेशमी साड़ी का बंडल जुलूस में क्यों फेंका? यह उसके किस गुण को दर्शाता है?
    उत्तर: दुलारी ने रेशमी साड़ी का बंडल जुलूस में फेंककर विदेशी कपड़ों के बहिष्कार आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। यह उसके मन में छिपी देशभक्ति की गहरी भावना को दर्शाता है। इससे पता चलता है कि देश का सम्मान उसके लिए अपनी कीमती वस्तुओं से भी बढ़कर था।
  2. टुन्नू की दी हुई धोती (साड़ी) को सहेज कर रखना क्या साबित करता है?
    उत्तर: टुन्नू की दी हुई खादी की साड़ी को सहेज कर रखना यह साबित करता है कि दुलारी मन ही मन टुन्नू का और उसके प्रेम का सम्मान करती थी। भले ही उसने सबके सामने उसे दुत्कारा हो, पर टुन्नू की भावनाओं और उसके दिए उपहार का उसके दिल में एक विशेष स्थान था। यह उसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

Common Mistakes to Avoid

01
🔄
Misunderstanding Dulari
Students often mistake Dulari for a negative or purely materialistic character initially. It's important to see the patriotic and sensitive layers of her personality.
02
🔍
Ignoring the Symbolism
Don't just read the story literally. Understand the symbolic meaning of the 'Jhulani' (nose-ring) and the 'Khadi saree'. They represent loss, pride, and patriotism.
03
👤
Mixing up Characters
Be clear about the roles of Tuni (the lover, patriot) and Pheku Sardar (the police informer).
04
💬
Superficial Answers
Avoid writing short, one-line answers. For board exams, explain your point with evidence from the text. For example, if you say Dulari was patriotic, mention the incident of her throwing the saree.

📚Exam Preparation Tips for 2026

01
📈
Character Sketches
Prepare detailed character notes for Dulari and Tuni. Questions are very frequently asked about their personalities and relationship.
02
📋
Theme is Key
The central theme is patriotism. Frame your answers around this theme, linking characters' actions to their love for the country.
03
📍
Remember the Context
Keep the background of the Swadeshi Movement in mind. It helps in understanding the motivations of the characters.
04
📝
Quick Revision
Before the exam, read the chapter summary and the answers to the main NCERT questions once more. This will refresh the entire story in your mind.

🅾Frequently Asked Questions (FAQs)

What is the meaning of "Ehi Thaiyan Jhulani Herani Ho Rama"?
It's a line from a folk song (Kajri) meaning, "Oh Ram! I lost my nose-ring right here." Symbolically, it signifies Dulari's profound loss of someone precious (Tuni) at a significant place and moment.
Who was Tuni and how did he die in Kritika Chapter 4?
Tuni was a young poet and freedom fighter who was in love with Dulari. He was brutally beaten to death by British police officials for participating in a protest against foreign goods.
What is the central theme of the chapter 'Ehi Thaiyan Jhulani Herani Ho Rama'?
The central theme is the triumph of patriotism (Desh Prem) over personal love and grief. It also highlights the contribution of artists and marginalized people to India's freedom struggle.

Master This Chapter & Connect to Our History 🇮🇳

"एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!" is more than just a story; it's a window into the hearts of ordinary people who made extraordinary sacrifices for India's freedom. Understanding the emotional depth of characters like Dulari and Tuni will not only help you score well but also connect you to our rich history.

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