NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 3: साना-साना हाथ जोड़ि
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Chapter at a Glance: साना-साना हाथ जोड़ि
Chapter 3: साना-साना हाथ जोड़ि – Quick Reference
| Chapter Name | साना-साना हाथ जोड़ि (Sana-Sana Hath Jodi) |
| Author | मधु कांकरिया (Madhu Kankariya) |
| Subject | Hindi Course A – Kritika (कृतिका भाग 2) |
| Class / Board | CBSE Class 10 |
| Target Year | 2026-27 |
| Important Topics | Author's journey, beauty of Sikkim, hardships of mountain life, environmental concerns, spirituality. |
| Difficulty Level | Moderate (Simple language, but deep themes) |
| Exam Weightage | 3–4 Marks |
Key Facts – Quick Things to Memorise
Learning Objectives
Understand the author's incredible travel experience through Sikkim.
Describe the breathtaking beauty of the Himalayas, including places like Gangtok and Katao.
Analyze the difficult and hardworking lives of the local people, especially women.
Discuss the chapter's core themes: nature's beauty vs. human hardship, environmentalism, and spirituality.
Confidently answer all types of questions from this chapter in your CBSE Class 10 Hindi board exam.
Key Concepts & Definitions
Extra MCQs – Practice & Self-Test
Full NCERT Solutions – All Exercise Questions
झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक शहर लेखिका को जादूई और सम्मोहक लग रहा था। उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे आसमान उल्टा पड़ा हो और सारे तारे नीचे बिखरकर टिमटिमा रहे हों। दूर ढलान पर बने घरों में जलती बत्तियाँ सितारों की तरह लग रही थीं, जो एक अद्भुत दृश्य बना रही थीं। इस जादुई सुंदरता ने लेखिका को इतना मंत्रमुग्ध कर दिया कि वह उसमें खो-सी गईं। उन्हें लगा कि इस शहर का हर कोना रहस्य और सुंदरता से भरा है, जो उन्हें अपनी ओर खींच रहा है।
गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' इसलिए कहा गया है क्योंकि इस शहर की सुंदरता और जीवन को वहाँ के मेहनती लोगों ने अपनी कड़ी मेहनत से बनाया है। लेखिका ने देखा कि यहाँ के लोग, चाहे वे पुरुष हों, महिलाएँ हों या बच्चे, सभी अपने जीवन को बेहतर बनाने और अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए कठोर परिश्रम करते हैं।
- स्त्रियों का परिश्रम: पहाड़ी औरतें पत्थर तोड़ती हैं, अपने बच्चों को पीठ पर लादकर काम करती हैं।
- पुरुषों का योगदान: पुरुष और सेना के जवान दुर्गम रास्तों पर काम करते हैं।
- प्रकृति से संघर्ष: इन लोगों ने प्रकृति की विषम परिस्थितियों से लड़कर भी अपने शहर को जीवंत और सुंदर बनाए रखा है।
उनकी इसी मेहनत और जिजीविषा को देखकर लेखिका ने उन्हें 'बादशाह' कहा, जो किसी सल्तनत के नहीं, बल्कि अपनी मेहनत के बादशाह हैं।
सिक्किम में फहराई जाने वाली श्वेत और रंगीन पताकाएँ अलग-अलग अवसरों का प्रतीक हैं:
- श्वेत पताकाएँ (White Flags): ये शांति और अहिंसा का प्रतीक हैं। जब किसी बौद्ध अनुयायी की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर किसी पवित्र स्थान पर 108 श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं। इन्हें उतारा नहीं जाता, ये अपने आप ही नष्ट हो जाती हैं।
- रंगीन पताकाएँ (Coloured Flags): ये किसी नए या शुभ कार्य की शुरुआत का प्रतीक हैं। किसी भी मांगलिक अवसर, जैसे कि नए व्यवसाय की शुरुआत या किसी त्योहार पर, ये रंगीन पताकाएँ फहराई जाती हैं।
इस प्रकार, ये पताकाएँ वहाँ के लोगों के जीवन के सुख-दुःख और आस्था से जुड़ी हैं।
जितेन नार्गे, जो लेखिका का ड्राइवर-कम-गाइड था, ने सिक्किम के बारे में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दीं:
- भौगोलिक स्थिति: उसने बताया कि गंतोक से युमथांग तक का रास्ता कितना खूबसूरत और खतरनाक है। उसने कटाओ के बारे में बताया, जिसे 'भारत का स्विट्जरलैंड' कहा जाता है और जहाँ हमेशा बर्फ़ मिलती है।
- आस्था और विश्वास: उसने बौद्ध धर्म से जुड़ी पताकाओं का महत्व समझाया (श्वेत मृत्यु पर और रंगीन शुभ अवसर पर)। उसने 'खेदुम' नामक पवित्र स्थान के बारे में भी बताया।
- जनजीवन: उसने पहाड़ी लोगों के कठोर परिश्रम, उनकी गरीबी और कठिनाइयों के बारे में बताया। उसने बताया कि कैसे पहाड़ी औरतें पत्थर तोड़ती हैं और बच्चे स्कूल जाने के लिए मीलों पैदल चलते हैं।
- प्रकृति और पर्यटन: उसने बताया कि युमथांग पहले फूलों से भरा रहता था, लेकिन प्रदूषण के कारण अब वहाँ उतने फूल नहीं दिखते।
इस तरह जितेन ने लेखिका को सिर्फ रास्ते नहीं दिखाए, बल्कि उस जगह की आत्मा से भी परिचय कराया।
Extra Board Exam Questions (2026-27)
गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' इसलिए कहा गया है क्योंकि वहाँ के लोगों ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से उस पहाड़ी क्षेत्र को खूबसूरत और रहने लायक बनाया है। वे किसी राजा की तरह अपनी मेहनत के बल पर जीते हैं, इसलिए उन्हें बादशाह कहा गया है।
'सेवन सिस्टर्स वॉटरफॉल' की सुंदरता के बीच जब लेखिका ने देखा कि पहाड़ी औरतें पत्थर तोड़ रही हैं, तो वह उदास हो गईं। उन्हें प्रकृति की अपार सुंदरता और इंसानी जीवन के कठिन संघर्ष के बीच का यह विरोधाभास बहुत दुखी कर गया।
लेखिका को बर्फ़ देखने के लिए 'कटाओ' इसलिए जाना पड़ा क्योंकि उस समय युमथांग जैसी जगहों पर प्रदूषण और स्नोफॉल की कमी के कारण बर्फ़ नहीं थी। जितेन नार्गे ने बताया कि 'कटाओ' एक ऐसी जगह है जहाँ बर्फ़ मिलने की पूरी गारंटी है।
फ़ौजी छावनियाँ देखकर लेखिका के मन में भारतीय सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के भाव आए। उन्होंने सोचा कि हम शहरों में चैन की नींद इसलिए सो पाते हैं क्योंकि ये जवान कड़कड़ाती ठंड और मुश्किल परिस्थितियों में भी सीमा पर हमारी रक्षा के लिए तैनात रहते हैं।
जितेन नार्गे ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले युमथांग घाटी फूलों से भरी रहती थी, लेकिन अब बढ़ते प्रदूषण (लायुंग में लकड़ी के चूल्हे का धुआँ) के कारण वहाँ बर्फ़बारी कम होती है और फूलों की संख्या भी घट गई है। यह पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा है।
'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ में लेखिका मधु कांकरिया ने हिमालय की यात्रा का वर्णन किया है, जहाँ एक ओर प्रकृति का असीम सौंदर्य मन को मोह लेता है तो दूसरी ओर मानवीय जीवन का कठोर संघर्ष हृदय को झकझोर देता है। एक तरफ़ बर्फ़ से ढके पहाड़, झरने और सुंदर घाटियाँ हैं, जो स्वर्ग का अनुभव कराती हैं। वहीं दूसरी तरफ, उन्हीं पहाड़ों पर औरतें अपने बच्चों को पीठ पर बांधकर पत्थर तोड़ती हैं, BRO के जवान जान जोखिम में डालकर रास्ते बनाते हैं और बच्चे कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते हैं। लेखिका जब 'सेवन सिस्टर्स वॉटरफॉल' की सुंदरता देखती हैं, तो वहीं पत्थर तोड़ती महिलाओं को देखकर उनका मन दुखी हो जाता है। यह यात्रा-वृत्तांत हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि जिन सुंदर वादियों को हम पर्यटन के लिए देखते हैं, वे वहाँ रहने वालों के लिए जीवन-संघर्ष का मैदान हैं।
यह कथन पूरी तरह सत्य है। जितेन नार्गे लेखिका के लिए केवल एक ड्राइवर नहीं था, बल्कि एक कुशल और संवेदनशील गाइड था। वह अपनी भूमिका को सिर्फ गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं रखता। वह लेखिका को सिक्किम की भौगोलिक स्थिति, वहाँ के रीति-रिवाजों, मान्यताओं और लोगों के जीवन से गहराई से परिचित कराता है। वह उन्हें बौद्ध धर्म से जुड़ी पताकाओं का अर्थ बताता है, 'कटाओ' जैसे अनछुए स्थान पर ले जाता है, और प्रदूषण के प्रति अपनी चिंता भी व्यक्त करता है। वह स्थानीय लोक कथाएँ सुनाता है और लेखिका के हर सवाल का जवाब धैर्यपूर्वक देता है। उसके कारण ही लेखिका की यात्रा केवल एक भौगोलिक यात्रा न रहकर एक मानसिक और भावनात्मक यात्रा बन जाती है।
- (क) "हिमालय बड़ा होते-होते विशालकाय होने लगा" - इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (1 Mark)
उत्तर: इसका आशय है कि जैसे-जैसे लेखिका की गाड़ी पहाड़ों में ऊपर की ओर जा रही थी, हिमालय के छोटे दिखने वाले पहाड़ अब और भी ऊँचे, भव्य और विशाल दिखाई देने लगे थे। - (ख) रास्ते की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं? (1 Mark)
उत्तर: रास्ते वीरान, सँकरे और जलेबी की तरह बहुत ज़्यादा घुमावदार बताए गए हैं। - (ग) लेखिका को सब कुछ कल्पना से परे क्यों लग रहा था? (2 Marks)
उत्तर: लेखिका को सब कुछ कल्पना से परे इसलिए लग रहा था क्योंकि उन्होंने ऐसी अद्भुत सुंदरता की केवल कल्पना की थी, लेकिन जो दृश्य वह देख रही थीं, वह उनकी कल्पना से भी कहीं ज़्यादा भव्य और अविश्वसनीय था। विशाल हिमालय, गहरी घाटियाँ और करीने से सजी हरियाली का मिला-जुला रूप एक जादुई प्रभाव पैदा कर रहा था।
Common Mistakes to Avoid
Exam Preparation Tips for 2026-27
Frequently Asked Questions (FAQs)
Master साना-साना हाथ जोड़ि 🌍
"Sana-Sana Hath Jodi" is not just a chapter for your exams; it's a journey that teaches us to appreciate beauty, respect hardship, and think about our impact on the planet. Mastering this chapter means understanding its soul. We hope these updated NCERT Solutions help you score full marks!
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